राज्य में कुल 8,66,261 सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें से अधिकांश ने समय पर विवरण प्रदान कर दिया। लेकिन जिन कर्मचारियों ने यह जिम्मेदारी नहीं निभाई, उनके वेतन पर रोक लगा दी गई है। सबसे अधिक लापरवाही तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों में देखी गई।

राज्य में कुल 8,66,261 सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें से अधिकांश ने समय पर विवरण प्रदान कर दिया। लेकिन जिन कर्मचारियों ने यह जिम्मेदारी नहीं निभाई, उनके वेतन पर रोक लगा दी गई है। सबसे अधिक लापरवाही तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों में देखी गई। इसीलिए 68000 से अधिक सरकारी कर्मचारियों के वेतन रोक दिए गए। जैसे ही ये अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण जमा करा देंगे इनका वेतन दे दिया जाएगा।
यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया गयासरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही, ऐसे कर्मचारियों को चेतावनी भी दी गई है कि अगर उन्होंने समय पर संपत्ति का विवरण नहीं दिया तो उनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय से यह संदेश गया कि उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के प्रति कोई समझौता नहीं करेगी।