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उत्तर प्रदेश में हाईवे और एक्सप्रेसवे की भरमार के बीच एक ऐसा हाईवे भी मौजूद है जो कारों, बसों या ट्रकों के लिए नहीं बल्कि सिर्फ साइकिल चालकों के लिए बनाया गया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं "आगरा-इटावा साइकिल हाईवे" की जो न सिर्फ यूपी का बल्कि एशिया का भी पहला साइकिल हाईवे है।

यह साइकिल हाईवे इटावा के लायन सफारी पार्क से शुरू होता है और आगरा तक 207 किलोमीटर की दूरी तय करता है। रास्ते में यह हाईवे 92 गांवों से गुजरता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को नई पहचान और कनेक्टिविटी मिलती है। यह हाईवे मुख्य सड़कों के समानांतर चलता है और इसकी चौड़ाई लगभग 7 फीट है। साइकिल चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसके बीच में डिवाइडर बनाया गया हैपर्यावरण और पर्यटन दोनों को बढ़ावा
यह हाईवे केवल एक ट्रैक नहीं, बल्कि एक ईको-टूरिज्म कॉरिडोर भी है। सफर के दौरान साइकिल सवार चंबल और यमुना की घाटियों की सुंदरता का आनंद ले सकते हैं। नौगवा का किला, राजा भोज की हवेली और बटेश्वरनाथ मंदिर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से होकर गुजरते है यह हाईवे। आगरा-इटावा साइकिल हाईवे का उद्घाटन साल 2016 में हुआ था। उद्घाटन के मौके पर भारत सहित 5 देशों के 90 साइकिल चालकों ने इस रूट पर रैली भी निकाली थी।
विवाद भी जुड़े रहेहालांकि शुरुआत में यह परियोजना काफी सराही गई, लेकिन कुछ समय बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे। कुछ हिस्सों में दरारें पड़ गईं। विपक्षी दलों ने इसे "दिखावटी प्रोजेक्ट" बताकर आलोचना भी की। ये साइकिल इसलिए खास हाईवे है कि स्वस्थ यात्रा, पर्यटन, पर्यावरण की सुरक्षा, तीनों को एक साथ साधता है। यह परियोजना बताती है कि साइकिलिंग केवल एक खेल या व्यायाम नहीं, बल्कि सतत विकास की दिशा में ठोस कदम है। अगर अन्य राज्यों में भी ऐसे साइकिल हाईवे होंगे तो भारत का साइकिलिंग फ्यूचर भी एक्सप्रेसवे जितना ही तेज हो सकता है! Uttar Pradesh samachar :
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