कूड़े के ढेर से निकली चमकती पहचान : लखनऊ बना उत्तर प्रदेश का पहला 'जीरो डंप सिटी'!
उत्तर प्रदेश
चेतना मंच
01 Dec 2025 02:18 PM
उत्तर प्रदेश के कई शहरों को अब भी गंदगी और कचरे के ढेरों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी बीच नवाबों की नगरी लखनऊ ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला जीरो डंप सिटी बन गया है। यानी अब इस शहर में न तो कोई कचरे का पहाड़ है और न ही कूड़े की बदबू, बल्कि हर रोज के कचरे का 100% वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जा रहा है। Uttar Pradesh Samachar :
कैसे बना लखनऊ 'जीरो डंप सिटी'?
शिवरी कूड़ा निस्तारण प्लांट की तीनों यूनिट शुरू होने के बाद लखनऊ इस मुकाम तक पहुंचा है। हर दिन शहर से निकलने वाले 2,100 मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया न केवल पुराने कचरे के ढेर को हटाने में सफल रही, बल्कि अब नए कचरे का भी पूर्ण रूप से उपयोग किया जा रहा है।
कितना खर्च हुआ?
लखनऊ नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत साल 2023 में 96 करोड़ की एक परियोजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य पुराने कचरे का निपटान और नए कचरे की सतत प्रोसेसिंग था। जनवरी 2024 से पुणे की भूमि ग्रीन एनर्जी कंपनी ने कार्यभार संभाला। कंपनी ने माइक्रोबियल कल्चर और एयर ड्राइंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलना शुरू किया।
हर यूनिट रोजाना 700 मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस करती है।
कचरे से क्या बनता है?
लखनऊ में अब कचरे का इस्तेमाल इन उत्पादों को बनाने में हो रहा है:
-जैविक खाद
-सीमेंट और पेपर उद्योग के लिए ईंधन
-भूमि सुधार में काम आने वाली मिट्टी और मलबा
-कंस्ट्रक्शन वेस्ट के उपयोगी उत्पाद
सिर्फ सफाई नहीं, कमाई भी
इस पूरी प्रक्रिया से राजस्व भी उत्पन्न हो रहा है। यानी लखनऊ अब कचरे को बोझ नहीं बल्कि एक संपत्ति के रूप में देख रहा है।
लखनऊ की यह उपलब्धि न केवल स्वच्छता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा है। यह दिखाता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, तकनीकी समाधान और निवेश के सही मेल से भारत के शहर भी जीरो वेस्ट मॉडल की ओर बढ़ सकते हैं। लखनऊ की सफाई सिर्फ एक शहर की कहानी नहीं, बल्कि आने वाले भारत की तस्वीर है। क्या आपके शहर की बारी अब आएगी? Uttar Pradesh Samachar :