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कार्यक्रम के बाद स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) की प्रबंध निदेशक ईशा दुहन ने कड़ा रुख अपनाया और जांच के आदेश के साथ-साथ पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इन अधिकारियों में अरविंद सिंघल (चीफ इंजीनियर), सुनील अग्रवाल (सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर), प्रिंस गौतम (एक्सईएन), राणा प्रताप (एसडीओ), ललित कुमार (जेई) शामिल हैं।
ईशा दुहन ने सख्त लहजे में कहा कि “हर सरकारी और वीआईपी कार्यक्रम के लिए बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश होते हैं। ऐसी जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्था और कंटिजेंसी प्लान अनिवार्य होता है। इसके बावजूद मुरादाबाद की घटना घोर लापरवाही का संकेत देती है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” उन्होंने आगे कहा कि यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा में असफलता है। विभाग ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं और बाकी सभी जोनों को चेतावनी जारी कर दी गई है।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा का यह दौरा 'जनता से सीधा संवाद' कार्यक्रम का हिस्सा था, जहां वह ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाने, लाइन लॉस कम करने और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान पर योजनाएं साझा कर रहे थे। लेकिन यही कार्यक्रम बिजली गुल होने से खुद सवालों में आ गया। इस घटना के बाद प्रदेश के अन्य जोनों में भी हड़कंप मच गया है। विभाग ने सभी डिस्कॉम्स को निर्देश दिया है कि भविष्य में किसी भी सरकारी या वीआईपी कार्यक्रम के दौरान बिजली आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था की समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए। सूत्रों की मानें तो कई जोनों में अधिकारियों को अलर्ट मोड पर लाया गया है और तैयारियों की रिव्यू मीटिंग्स बुलाई जा रही हैं।
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