यूपी में मिली विदेशी मछली ने गंगा तट पर मचाई सनसनी, वैज्ञानिकों ने चिंता जताई
Uttar Pradesh Samachar :
भारत
चेतना मंच
02 Aug 2025 10:06 PM
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के सैदपुर तहसील के पटना गाँव के पास नदी से एक ऐसी दुर्लभ कैटफिश मछली पकड़ी गई, जिसने मछुआरों और ग्रामीणों को हैरानी में डाल दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसकी चमकदार त्वचा पर बिल्ली जैसे धब्बे हैं और पूरे शरीर में कांटे-नुकीली प्लेटें चिपकी हुई हैं। मछली को देखकर ग्रामीण इसे बिल्ली-जैसी मछली कह रहे थे। जब फोटो इंटरनेट पर साझा किया गया, तो इसे अमेरिकी सुचेरमाउथ कैटफिश बताया गया, जो मूलत: दक्षिण अमेरिका की अमेजन नदी में मिलती है और भारत में स्वाभाविक रूप से नहीं पाई जाती। Uttar Pradesh Samachar :
इस मछली की पहचान वैज्ञानिकों ने कैसे की?
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के जीवविज्ञानी प्रोफेसर बेचन लाल की टीम ने हाईपोस्टोमस प्लेकोस्टोमस के तौर पर सीमित नमूने की पुष्टि की थी। उनका कहना था कि यह मछली अत्यधिक जहरीले अपघटन से बनी जलनिक्षेप (जैसे एक्वैरियम से छोड़ी गई मछली) के कारण गंगा तट पर पहुंच गई होगी, प्राकृतिक प्रविष्टि संभव नहीं। साइंटिस्ट कृपाल दत्त जोशी ने चेताया कि यह एक हिन्दी बेलामा (एलियन इनवैशिव स्पिेसीज) हो सकती है। इसके जीवनी पैटर्न और बढ़ने की क्षमता से गंगा-गोमती के पारिस्थितिकी तंत्र को बड़ा खतरा हो सकता है। इन मछलियों की मोटी प्लेटेड त्वचा, ऊँची संतोषनीय प्रवृत्ति और कम आॅक्सीजन में भी जीने की आदत होती है, जिससे स्वदेशी प्रजातियों को प्रतिस्पर्धा में पीछे धकेल सकती है।
यह पहली बार कहाँ-कहाँ देखी गई?
वर्ष 2020 में वाराणसी के समीप रामनगर में भी एक ऐसा मछुआरा सुकेरमाउथ कैटफिश गंगा में फंसा पाया गया। उस समय वैज्ञानिक अनुमान लगाए थे कि यह संभवत: एक्वेरियम बैकलॉग से छोड़ी गई मछली थी। उसी समय भदोही जिले के धनतुलसी कला गाँव के पास भी एक अजीब चार आँखों वाली मछली पकड़ी गई, जिसमें शरीर भर कांटे थे। ग्रामीणों ने इसे सुकेरमाउथ कैटफिश समझा, जिससे इलाके में चर्चा छिड़ गई। वन एवं मत्स्य विभाग की टीम मौके पर पहुँची और मछली को परीक्षण के लिए सुरक्षित रखा गया।
क्या है चिंता की वजह?
यह मछली स्वाभाविक रूप से भारतीय नदियों में नहीं थी। आगे बढ़ने की प्रवृत्ति से मछलियों की खाने-पीने की आदतों और अंडों पर प्रभाव पड़ सकता है। मीठे पानी की प्रणाली में संतुलन गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र में भारी परिवर्तन और जैव विविधता संकट हो सकता है। क्योंकि यह पौधों व छोटे जीवों के पत्ते और फैलकर चाय जैसी खाद्य श्रृंखला में शामिल हो जाती है। स्थानीय मत्स्य विभाग अधिकारियों को केस दर्ज कर निरीक्षण और मछली को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने चेताया है कि और जानकारियों के लिए मछुआरे जागरूक रहें और किसी भी इस तरह की प्रजातियों की सूचना दें। लखनऊ-गाजीपुर से लेकर भदोही व वाराणसी तक फैल चुके इस विदेशी कैटफिश का मिलना इस बात का संकेत है कि भारतीय नदियों में पर्यावरणीय विशेषज्ञता और निगरानी की व्यवस्था तेज करनी होगी। ऐसे ठीक दरवाजे खुल जाते हैं, जो पारिस्थितिक असंतुलन और स्थानीय मछलियों के अस्तित्व पर संकट ला सकते हैं। राज्य मत्स्य विकास विभाग तथा वन्यजीव बोर्ड को तत्काल जांच, जैव निगरानी और सामुदायिक जागरूकता अभियान चला कर ऐसे खतरे को रोका जाना चाहिए। Uttar Pradesh Samachar :