100 साल से खड़ा है यूपी का ये चमत्कारी पुल, बिना सीमेंट-सरिया के भी मजबूत!
Uttar Pradesh Samachar
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 11:32 AM
Uttar Pradesh Samachar : उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ऐसा अनोखा पुल मौजूद है जो आज के आधुनिक इंजीनियरिंग युग में भी आश्चर्य का विषय बना हुआ है। न इसमें लोहे की सरिया लगी है, न ही सीमेंट का उपयोग हुआ है। बावजूद इसके यह बीते 100 वर्षों से मजबूती से खड़ा है। जहां देशभर में आए दिन नए पुलों के ध्वस्त होने की खबरें आती रहती हैं, वहीं कानपुर का यह ब्रिटिशकालीन पुल आज भी अपनी मजबूती और अनोखी रचना के लिए चर्चा में है।
गुड़ और अरहर दाल से बना था पुल!
यह ऐतिहासिक पुल कानपुर शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित है, जो गुजैनी बाईपास के पास पांडु नदी पर बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पुल के निर्माण में गुड़ की चाशनी और अरहर की दाल का पानी मिलाकर मिश्रण तैयार किया गया था, जो ईंटों और चूने के साथ मिलाकर उपयोग किया गया। इसमें न तो कोई स्टील की रॉड लगी है और न ही सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। इसके बावजूद इसकी संरचना आज भी किसी आधुनिक पुल को टक्कर देती है।
तकनीकी बनावट भी उतनी ही अद्भुत
इस पुल की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि इसके ऊपर नहर का पानी बहता है, जबकि नीचे से पांडु नदी गुजरती है। यानी यह एक जल-से-जल पारगमन संरचना है, जिसे आज भी इंजीनियरिंग का नायाब उदाहरण माना जाता है। पुल के पिलर्स को गोलाकार डिजाइन में 6 हिस्सों में बांटा गया है। ईंटों से बने ये स्तंभ नदी के भीतर स्थापित किए गए हैं और इसके ब्रिकवर्क में चूना और सुर्खी का महीन मिश्रण लगाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देखरेख जारी रही तो यह पुल अगले 50 वर्षों तक भी संरक्षित रह सकता है।
इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए प्रेरणा
आज जब टिकाऊ निर्माण सामग्री और आधुनिक तकनीक के बावजूद कई संरचनाएं कम समय में ही जवाब दे जाती हैं, ऐसे में यह पुल स्थायित्व और शिल्प के पारंपरिक कौशल का प्रतीक बनकर उभरा है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के अनुसार, यह पुल विरासत संरक्षण और पुरानी निर्माण तकनीकों को समझने के लिए एक जीवंत उदाहरण है।