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UP सरकार ने पंचायत स्तर पर होने वाली अनावश्यक शिकायतों पर लगाम कसते हुए ग्राम प्रधानों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक सुरेंद्र नाथ सिंह ने सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर नए नियमों के पालन के निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ उसी गांव के निवासी ही अपने प्रधान के खिलाफ शिकायत कर सकेंगे। पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक सुरेंद्र नाथ सिंह ने सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों को एक पत्र जारी कर नए नियमों के पालन के निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार अब शिकायतकर्ता को ग्राम सभा का निवासी होना अनिवार्य है। केवल हलफनामे पर आधारित शिकायतें ही स्वीकार की जाएंगी। शिकायत फर्जी पाए जाने पर आईपीसी की धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
अब तक कोई भी व्यक्ति, चाहे वह संबंधित गांव से हो या नहीं, ग्राम प्रधान के खिलाफ शिकायत कर सकता था, जिससे कई बार निजी रंजिश या राजनीतिक द्वेष से प्रेरित फर्जी आरोप लगाए जाते थे। नए नियम के तहत अब इस प्रवृत्ति पर रोक लगेगी, क्योंकि शिकायतकर्ता को पहले खुद की ग्राम सभा की नागरिकता साबित करनी होगी और शपथपत्र देना होगा। सरकार के इस निर्णय से ईमानदारी से कार्य करने वाले प्रधानों को अनावश्यक उत्पीड़न से राहत मिलेगी। इससे विकास कार्यों में बाधा बनने वाली मनगढ़ंत शिकायतों की संख्या में भी कमी आएगी। सरकार का यह कदम पंचायत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Uttar Pradesh Samachar :