यूपी का सबसे पुराना इंग्लिश मीडियम स्कूल! 200 साल बाद भी बरकरार है रुतबा, जानें है कहां
Uttar Pradesh Samachar
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
22 Jul 2025 02:21 PM
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
22 Jul 2025 02:21 PM
Uttar Pradesh Samachar : उत्तर प्रदेश में आधुनिक शिक्षा प्रणाली की जड़ें जितनी गहरी हैं, उतनी ही ऐतिहासिक भी। राज्य में अंग्रेजी माध्यम शिक्षा की शुरुआत 19वीं सदी की शुरुआत में हुई थी। वो भी तब, जब भारत स्वतंत्रता संग्राम की पहली हलचल से भी अछूता था। आज हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने इंग्लिश मीडियम स्कूल की, जो लगभग दो शताब्दियों से शिक्षा की लौ जलाए हुए है।
1830 में हुआ था सेंट जॉन स्कूल का जन्म
उत्तर प्रदेश का यह गौरवशाली संस्थान है, सेंट जॉन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मेरठ। इस स्कूल की नींव सन 1830 में ब्रिटिश रेजीमेंट के बच्चों की शिक्षा के उद्देश्य से रखी गई थी। इसे एक स्टेशन स्कूल के रूप में स्थापित किया गया, जिसे "स्कूल आॅफ द रेजिमेंट" कहा जाता था। उस समय मेरठ, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए एक सामरिक केंद्र था, और यहीं से अंग्रेजों ने उत्तर भारत में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की थी। शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक प्रभाव फैलाने की रणनीति के तहत इस स्कूल की स्थापना हुई।
1881 तक सरकारी संरक्षण, फिर हुआ विस्तार
लगभग पांच दशकों तक यह स्कूल ब्रिटिश सरकार के आंशिक वित्तीय सहयोग से संचालित होता रहा। 1881 में गर्ल्स अपर स्कूल की स्थापना ने लड़कियों की शिक्षा में भी एक क्रांतिकारी शुरुआत की। बाद में यह शाखा "सेंट जॉन गर्ल्स अपर स्कूल" के नाम से प्रसिद्ध हुई। 1882 में दो और शाखाएं खोली गईं, जो मध्यम और निम्नवर्गीय परिवारों के उन बच्चों के लिए थीं, जिन्हें हिल स्टेशन बोर्डिंग स्कूल भेजना संभव नहीं था।
1890 में तीनों शाखाओं का हुआ विलय
साल 1890 में तीनों शाखाओं को एकीकृत किया गया और तब से यह संस्थान मेरठ के ऐतिहासिक बेगम समरू चैपल परिसर (117 बैंक स्ट्रीट) में चल रहा है। चैपल की यह इमारत अपने आप में एक विरासत है, जिसका वास्तुशिल्प और ऐतिहासिक महत्व सेंट जॉन स्कूल के गौरव को और बढ़ाता है।
आज भी कायम है साख, बदलते वक्त के साथ ढली पहचान
आज सेंट जॉन सीनियर सेकेंडरी स्कूल सीबीएसई से संबद्ध है और मेरठ सहित पूरे वेस्ट यूपी में इसकी पहचान एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान के रूप में है। स्कूल ने समय के साथ खुद को बदला जरूर है। तकनीकी रूप से उन्नत हुआ, लेकिन शिक्षा की मूल आत्मा और अनुशासन की विरासत आज भी बरकरार है।
इतिहास का साक्षी, भविष्य का निर्माता
1857 की क्रांति से पहले ही स्थापित यह स्कूल उन गिने-चुने शैक्षिक संस्थानों में से है, जो ब्रिटिश भारत के दौरान जन्मे और आज भी प्रासंगिक हैं। यह न सिर्फ यूपी का सबसे पुराना इंग्लिश मीडियम स्कूल है, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर भी है, जिसने सदियों तक पीढ़ियों को गढ़ा है। क्या आप जानते हैं कि यह वही मेरठ है, जहाँ से 1857 की क्रांति का पहला बिगुल फूंक गया था? उसी धरती पर अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित एक स्कूल, आज भारतीय शिक्षा व्यवस्था का जीवंत अध्याय बन चुका है।