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उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के माधोपट्टी गांव को यूं ही 'आईएएस-आईपीएस वालों का गांव' नहीं कहा जाता। इस गांव की कुल आबादी करीब 1,174 है और कुल 75 घर हैं। हैरानी की बात ये है कि इनमें से 47 लोग अब तक आईएएस, आईपीएस, पीसीएस जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयनित हो चुके हैं।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के माधोपट्टी गांव को यूं ही 'आईएएस-आईपीएस वालों का गांव' नहीं कहा जाता। इस गांव की कुल आबादी करीब 1,174 है और कुल 75 घर हैं। हैरानी की बात ये है कि इनमें से 47 लोग अब तक आईएएस, आईपीएस, पीसीएस जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयनित हो चुके हैं। इतना ही नहीं, गांव के लोग इसरो, बार्क, और विश्व बैंक जैसे शीर्ष संस्थानों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
इस गांव में कोई कोचिंग सेंटर नहीं है, लेकिन यहां के युवाओं ने खुद की मेहनत और अनुशासन के बल पर यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता हासिल की। यहां के लोग पढ़ाई को सेवा और प्रतिष्ठा का जरिया मानते हैं, न कि सिर्फ नौकरी पाने का साधन। इस गांव के लोग इसरो से विश्व बैंक तक पहुंचे हुए हैं। माधोपट्टी गांव के डॉ. ज्ञानू मिश्रा इसरो में वैज्ञानिक रहे, जबकि जन्मेजय सिंह विश्व बैंक में कार्य कर चुके हैं। यह गांव भारतीय नौकरशाही और वैज्ञानिक समुदाय में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराता रहा है। संघर्ष से सफलता तक की मिसाल बन चुका है जौनपुर का माधोपट्टी गांव जहां खेतों में हल चलाने वाले हाथ आज देश की नीतियों को दिशा दे रहे हैं। यह गांव बताता है कि बड़े सपनों के लिए बड़ा शहर जरूरी नहीं, बस सोच बड़ी होनी चाहिए। Uttar Pradesh Samachar :ं।