यूपी में कहां हैं सबसे ज्यादा मुसलमान? नवाबों की नगरी नहीं, ये जिला निकला सबसे आगे!
भारत
चेतना मंच
06 Aug 2025 03:54 PM
Uttar Pradesh Samachar : उत्तर प्रदेश देश का सबसे घनी आबादी वाला राज्य, जहां हर धर्म, हर संस्कृति के लोग एक साथ सांस लेते हैं। यहां अयोध्या की आरती भी है, तो अमरोहा की अजान भी। लेकिन जब बात मुस्लिम आबादी की आती है, तो जेहन में सबसे पहले लखनऊ का नाम आता है, नवाबों का शहर, तहजीब की मिसाल। मगर क्या आप जानते हैं कि यूपी का सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला जिला लखनऊ नहीं, बल्कि एक ऐसा इलाका है जिसका नाम सुनकर आप चौंक जाएंगे?
संभल : मुस्लिम आबादी में सबसे आगे
जी हां, उत्तर प्रदेश का वह जिला लखनऊ नहीं है। वह जिला है संभल, जहां मुसलमानों की आबादी सबसे ज्यादा मानी जाती है। 2012 में मुरादाबाद से अलग होकर बने संभल जिले में मुस्लिम आबादी 60 से 70 फीसदी के बीच बताई जाती है। हालांकि 2011 की जनगणना में इसका अलग रिकॉर्ड नहीं था, लेकिन अनुमान बताते हैं कि यह यूपी का सबसे मुस्लिम-बहुल जिला है। यह इलाका वर्षों से सांस्कृतिक तौर पर विविधतापूर्ण रहा है, लेकिन अब यह सांख्यिकीय दृष्टि से भी सबसे आगे है।
यूपी के अन्य मुस्लिम-बहुल जिले (2011 जनगणना के अनुसार) :
इन जिलों में मुस्लिम आबादी इतनी सघन है कि स्थानीय राजनीति, व्यापार और संस्कृति में इनकी अहम भूमिका है।
जिला मुस्लिम आबादी (%)
े मुरादाबाद 50.82%
े रामपुर 50.57%
े बिजनौर 43.03%
े सहारनपुर 41.95% (शामली अलग होने से पहले)
े मुजफ्फरनगर 41.30% (शामली अलग होने से पहले)
भारत में मुस्लिम आबादी एक नजर
2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या थी 121.09 करोड़, जिसमें हिंदू आबादी : 79.8% और मुस्लिम आबादी : 14.2% (17.22 करोड़) रिकार्ड की गई थी। इस तरह मुसलमान देश की दूसरी सबसे बड़ी धार्मिक आबादी हैं। 2021 की जनगणना का डेटा अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभल, मुरादाबाद और रामपुर जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत और भी बढ़ा होगा। जब यह डेटा आएगा, तो न केवल सामाजिक समीकरण बल्कि राजनीतिक गणित भी बदल सकता है। लखनऊ को भले ही "नवाबों की नगरी" कहा जाता हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल जिलों की असली तस्वीर संभल, रामपुर और मुरादाबाद में छुपी है। ये जिले न केवल सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं, बल्कि जनसंख्या के आंकड़ों में भी शीर्ष पर हैं। अब देखना यह होगा कि अगली जनगणना में ये आंकड़े कितने बदलते हैं और इसके सामाजिक-राजनीतिक मायने क्या निकलते हैं। Uttar Pradesh Samachar :