यूपी में अनोखी 'पीडीए पाठशाला': बच्चों को 'अ फॉर अखिलेश, इ फॉर आंबेडकर' सिखा रहे नेताजी!
Uttar Pradesh Sarkar
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 10:30 AM
Uttar Pradesh Sarkar : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नया गांव (सिद्पुरा), मल्हीपुर रोड स्थित एक गांव इन दिनों एक अनोखी पाठशाला को लेकर चर्चा में है। समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में चल रही इस "पीडीए पाठशाला" (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का उद्देश्य सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाना बताया गया है, लेकिन इसने सियासी रंग भी खूब बटोरा है।
क्या है पीडीए पाठशाला?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर यह अभियान शुरू किया गया है। सपा नेताओं का दावा है कि यह स्कूल उन गरीब बच्चों के लिए है जिन्हें सरकारी नीतियों के चलते शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है। जिले की पहली पीडीए पाठशाला का संचालन वरिष्ठ सपा नेता फरहाद आलम गाड़ा की अगुवाई में हुआ। उन्होंने बताया कि "बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने हमें शिक्षा का जो अधिकार दिया है, वो आज खतरे में है। गरीब बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, इसलिए हमने यह पाठशाला शुरू की है।"
अ से अखिलेश, इ से आंबेडकर, बदला हुआ एबीसीडी!
इस पाठशाला की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इसमें बच्चों को पढ़ाया गया:
-अ फॉर अखिलेश यादव
-इ फॉर बाबा साहब आंबेडकर
-उ फॉर चौधरी चरण सिंह
-ऊ फॉर डिंपल यादव
-ट फॉर मुलायम सिंह यादव
यानी, परंपरागत ए फॉर एप्पल वाली शिक्षा प्रणाली की जगह, सियासी 'एबीसीडी' ने बच्चों की किताबें रंग दी हैं।
नेता जी ने क्या कहा?
फरहाद आलम ने कहा कि "यदि सरकार ने कोर्ट के फैसले और संविधान सम्मत अधिकारों का सम्मान नहीं किया, तो हमारी पाठशालाओं में हम यही पाठ पढ़ाएंगे।" उनका आरोप है कि सरकार शिक्षा के निजीकरण और सुविधाओं की कटौती के जरिए गरीब तबकों को पढ़ाई से दूर कर रही है। इस अनोखी पहल पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर समाजवादी पार्टी इसे एक सामाजिक जागरूकता अभियान बता रही है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी समर्थक इसे बच्चों के राजनीतिक ब्रेनवॉश की कोशिश करार दे रहे हैं। पीडीए पाठशाला एक ओर गरीब बच्चों को पढ़ाने की पहल है, तो दूसरी ओर यह शिक्षा को लेकर चल रही राजनीति का प्रतीक भी बन चुकी है। सवाल यह है कि क्या राजनीति अब पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी या यह सिर्फ एक आंदोलनात्मक प्रतीक रहेगा? इसका जवाब समय और समाज दोनों को मिलकर देना होगा।