चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नहीं जाएंगे जेल
उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जेल नहीं जाना पड़ेगा। उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर की जांच पूरी होने तक वे जेल जाने से बच गए हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे देश में चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत मिल गई है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत (बेल ) की याचिका स्वीकार करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जेल नहीं जाना पड़ेगा। उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर की जांच पूरी होने तक वे जेल जाने से बच गए हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट अपना फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाएगा।
मार्च के तीसरे हफ्ते तक जेल जाने से बच गए शंकराचार्य
उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के द्वारा फैसला सुरक्षित रखने से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा है कि इस मामले का फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाया जाएगा। फैसला आने तक उत्तर प्रदेश की पुलिस शंकराचार्य को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जांच में सहयोग करना पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रखते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इस आदेश का सीधा सा अर्थ है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तार नहीं कर पाएगी।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने सुनी दोनों पक्षों की बात
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला देने से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील को ध्यान से सुना। अपनी दलील में सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते। उन्होने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। शंकराचार्य के वकील ने कहा पीडि़त का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता और अभिभावकों का कोई पता नहीं है। सरकार ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है। शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ हत्या, दुष्कर्म, हत्या का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां-बाप कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकारी की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे देश में चर्चित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत मिल गई है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत (बेल ) की याचिका स्वीकार करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जेल नहीं जाना पड़ेगा। उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर की जांच पूरी होने तक वे जेल जाने से बच गए हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट अपना फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाएगा।
मार्च के तीसरे हफ्ते तक जेल जाने से बच गए शंकराचार्य
उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के द्वारा फैसला सुरक्षित रखने से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा है कि इस मामले का फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनाया जाएगा। फैसला आने तक उत्तर प्रदेश की पुलिस शंकराचार्य को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जांच में सहयोग करना पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रखते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया है। इस आदेश का सीधा सा अर्थ है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गिरफ्तार नहीं कर पाएगी।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने सुनी दोनों पक्षों की बात
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला देने से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील को ध्यान से सुना। अपनी दलील में सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते। उन्होने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। शंकराचार्य के वकील ने कहा पीडि़त का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता और अभिभावकों का कोई पता नहीं है। सरकार ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है। शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ हत्या, दुष्कर्म, हत्या का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां-बाप कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकारी की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है। UP News












