उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है कि हर ऐसे घुसपैठिए की विस्तृत ‘निगेटिव प्रोफाइल’ तैयार की जाए, ताकि फर्जी कागज़ात, नए नाम या बदले हुए पते के सहारे न वे दोबारा उत्तर प्रदेश में दाखिल हो सकें और न ही देश के किसी और हिस्से में खुद को वैध नागरिक की तरह पेश कर पाएं।

UP News : उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ योगी आदित्यनाथ सरकार ने अब सीधी और सख्त लड़ाई छेड़ दी है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को हथियार बनाते हुए राज्य में ऐसे रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जा रही है, जो चुपचाप बसने की कोशिश में थे। लेकिन इस बार मामला केवल डिटेंशन सेंटर तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है कि हर ऐसे घुसपैठिए की विस्तृत ‘निगेटिव प्रोफाइल’ तैयार की जाए, ताकि फर्जी कागज़ात, नए नाम या बदले हुए पते के सहारे न वे दोबारा उत्तर प्रदेश में दाखिल हो सकें और न ही देश के किसी और हिस्से में खुद को वैध नागरिक की तरह पेश कर पाएं।
सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने SIR सर्वे को सिर्फ कागज़ी जांच तक सीमित न रखकर, इसे एंटी–इन्फिल्ट्रेशन का बड़ा हथियार बनाने की तैयारी कर ली है। राज्य में पहली बार ऐसे संदिग्ध घुसपैठियों का एक केंद्रीकृत बायोमेट्रिक डेटाबेस बनाने की योजना है, जो आगे चलकर पूरे देश में रेफरेंस प्वाइंट बन सकता है। योजना के तहत SIR सर्वे में चिन्हित रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को पहले उत्तर प्रदेश के डिटेंशन सेंटर्स में शिफ्ट किया जाएगा, जहां उनका पूरा बायोमेट्रिक प्रोफाइल फोटो, फिंगरप्रिंट और अन्य डिजिटल डीटेल्स रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके बाद यह डेटा जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार और अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ भी शेयर किया जा सकेगा, ताकि उत्तर प्रदेश से बाहर किसी और राज्य में भी वे नई पहचान के साथ दोबारा घुसपैठ करने की कोशिश न कर पाएं।
उत्तर प्रदेश की नई एंटी–इन्फिल्ट्रेशन नीति पूरी तरह डेटा–ड्रिवन और हाई–टेक मॉडल पर आधारित है। अब हर पकड़े गए घुसपैठिए का सिर्फ नाम या पता नहीं, बल्कि उसकी पूरी डिजिटल पहचान तैयार की जाएगी। इसमें फेशियल रिकॉग्निशन, फिंगरप्रिंट, बायोमेट्रिक मार्कर और संदिग्ध दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड एक ही प्रोफाइल में जोड़ा जाएगा। यह सारी प्रोफाइलें एक खास ‘निगेटिव लिस्ट’ का हिस्सा बनेंगी - एक ऐसी लिस्ट, जिसे देखकर कोई भी सरकारी सिस्टम तुरंत पहचान सकेगा कि यह व्यक्ति किस श्रेणी में आता है और क्या-क्या प्रतिबंध लागू हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश इस निगेटिव लिस्ट को राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों के साथ भी साझा करने की तैयारी में है, ताकि भविष्य में कोई भी घुसपैठिया नई पहचान गढ़कर सिस्टम को दोबारा धोखा न दे सके। इससे न सिर्फ उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची, राशन कार्ड, आधार या पासपोर्ट जैसी सेवाओं में फर्जी एंट्री पर रोक लगेगी, बल्कि देश के दूसरे राज्यों में भी नकली पहचान बनाकर बसने की कोशिशें शुरुआती चरण में ही पकड़ी जा सकेंगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की रणनीति सिर्फ घुसपैठियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके लिए फर्जी पहचान गढ़ने वाले पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने पर फोकस है। प्रशासन की नजर अब उन गैंग्स और बिचौलियों पर है, जो फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड से लेकर किराए के समझौते तक तैयार कर अवैध घुसपैठियों को कागज़ों पर ‘लोकल नागरिक’ बनाकर खड़ा कर देते हैं। सूत्रों के मुताबिक, SIR सर्वे के दौरान मिलने वाले संदिग्ध और फर्जी दस्तावेज इस पूरे रैकेट की कड़ी जोड़ने का अहम आधार बनेंगे। हाई–टेक स्कैनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग और डेटा मिलान के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि सिस्टम के किस स्तर पर बैठा कौन–सा अधिकारी, कर्मचारी या बिचौलिया इस खेल में हिस्सेदार है। तैयार हो रही ‘निगेटिव लिस्ट’ भी सिर्फ घुसपैठियों के नामों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन सभी लोगों को रडार पर लाएगी जो बार–बार पहचान बदलकर या नए कागज़ात के सहारे उत्तर प्रदेश के सिस्टम को धोखा देने की कोशिश करते हैं। ऐसे सभी नाम भविष्य में किसी भी सरकारी प्रक्रिया में रेड अलर्ट की तरह सामने आएंगे।
उत्तर प्रदेश भले ही भौगोलिक रूप से किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सीधे न जुड़ता हो, लेकिन यहां चुपचाप बसने की कोशिश करने वाले अवैध घुसपैठियों को लेकर समय–समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। अब यही उत्तर प्रदेश SIR सर्वे को एक साधारण चुनावी औपचारिकता के बजाय सुरक्षा की पहली लाइन में बदलने की तैयारी कर चुका है। मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण अब केवल नाम जोड़ने–घटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सूबे के जनसांख्यिकीय संतुलन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एक रणनीतिक कवायद बन गया है। घुसपैठियों की डिजिटल निगरानी, बायोमेट्रिक डेटाबेस और ‘निगेटिव प्रोफाइलिंग’ वाला यह मॉडल आगे चलकर उन राज्यों के लिए भी मानक बन सकता है, जो उत्तर प्रदेश की तरह अपनी सीमाओं के भीतर छिपी इस ‘साइलेंट इन्फिल्ट्रेशन’ की चुनौती से जूझ रहे हैं। UP News