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उत्तर प्रदेश का इतिहास बहुत ही शानदार इतिहास है। उत्तर प्रदेश का इतिहास इस प्रदेश की राजनीतिक विरासत के इतिहास के बिना पूरा नहीं हो सकता है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में अनेक महत्वपूर्ण दिनों का खास महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण दिनों में एक दिन था 4 मई 1998 का दिन।

UP News : उत्तर प्रदेश का इतिहास बहुत ही शानदार इतिहास है। उत्तर प्रदेश का इतिहास इस प्रदेश की राजनीतिक विरासत के इतिहास के बिना पूरा नहीं हो सकता है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में अनेक महत्वपूर्ण दिनों का खास महत्व है। इन्हीं महत्वपूर्ण दिनों में एक दिन था 4 मई 1998 का दिन। 4 मई 1998 को उत्तर प्रदेश में स्पेशल टॉस्क फोर्स यानि कि STF का गठन किया गया था। उत्तर प्रदेश में पिछले 28 वर्षों से STF ने एक से बढक़र एक कारनामों को अंजाम दिया है। UP News
उत्तर प्रदेश की STF इन दिनों बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। STF की चर्चा का कारण कोई बड़ा ऑपरेशन (अभियान) अथवा कोई एनकाउंटर नहीं है। दरअसल हाल ही में OTT प्लेटफार्म पर एक सीरीज रिलीज हुई है। इस सीरीज का नाम ‘इंस्पेक्टर अविनाश सीजन-2 है।’ यह पूरी सीरीज उत्तर प्रदेश की STF के द्वारा किए गए एक से एक बड़े कारनामों से भरी पड़ी है। अविनाश मिश्रा किस प्रकार उत्तर प्रदेश के अंदर से माफिया राज को खत्म करता है यह इस सीरीज में बखूबी दर्शाया गया है। OTT प्लेटफार्म पर धूम मचा रही उत्तर प्रदेश STF की यह पूरी कहानी उत्तर प्रदेश के युवा वर्ग में विशेष आकर्षण का केन्द्र बन गई है। STF की इस चर्चा के बीच हम आपको उत्तर प्रदेश STF के पूरे इतिहास से अवगत करा रहे हैं। UP News
यह बात वर्ष-1998 की है। भारतीय जनता पार्टी के प्रसिद्ध नेता स्व. कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने प्रदेश को माफिया मुक्त करने की घोषणा कर रखी थी। उधर श्रीप्रकाश शुक्ला नाम के माफिया ने पूरे प्रदेश में आतंक मचा रखा था। यह पहला मौका था जब श्रीप्रकाश शुक्ला AK -47 जैसी खतरनाक राइफल द्वारा उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ अपराध कर रहा था। इतना ही नहीं श्रीप्रकाश शुक्ला ने उस वक्त के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या करने के लिए 6 करोड़ रूपये की सुपारी ले ली थी। श्रीप्रकाश शुक्ला के आतंक का खात्मा करने के लिए कल्याण सिंह ने उत्तर प्रदेश के तेज तर्रार पुलिस अफसरों को एकत्र करके विशेष टॉस्क फोर्स यानि STF बनाने का फैसला किया था। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निर्देश पर प्रदेश के तत्कालीन एडीजी (कानून व्यवस्था) अजय राज शर्मा ने 6 महीने के लिए उत्तर प्रदेश में STF का गठन किया था। UP News
उत्तर प्रदेश में STF के गठन की योजना पूरी तरह सफल साबित हुई। STF के जाबांज अधिकारियों ने रात-दिन मेहनत करके श्रीप्रकाश शुक्ला के आतंक का अंत कर दिया। उत्तर प्रदेश की STF टीम ने मात्र 4 महीने में 22 सितंबर 1998 को गाजियाबाद जिले में हुई एक सीधी मुठभेड़ में श्रीप्रकाश शुक्ला को मारकर उसका अंत कर दिया। इस बेमिसाल उपलब्धि के बाद उत्तर प्रदेश की सरकार ने यह फैसला लिया कि STF को हमेशा के लिए उत्तर प्रदेश की एक स्थाई पुलिस इकाई के रूप में रखा जाएगा। 4 मई 1998 को गठित की गई उत्तर प्रदेश की STF ने पिछले 28 सालों में उत्तर प्रदेश से संगठित अपराध, बड़े-बड़े अपराधियों तथा माफियाओं को समाप्त करने का शानदार काम किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस अपनी STF के कारण पूरे भारत में एक शानदार पुलिस बल के रूप में स्थापित हुई है। UP News
उत्तर प्रदेश STF का इतिहास तब तक पूरा नहीं होता है जब तक STF के पहले अधिकरियों की चर्चा न हो जाए। उत्तर प्रदेश की STF में सबसे पहले प्रदेश के 3 तेज-तर्रार अधिकारी तैनात किए गए थे। उत्तर प्रदेश के तेज-तर्रार IPS अधिकारी अरूण कुमार को STF का पहला SSP बनाया गया था। उनके साथ IPS अधिकारी सतेन्द्र वीर सिंह को STF का ASP तथा राजेश पांडे को डिप्टी एस.पी (Deputy S.P.) बनाया गया था। इन्हीं तीन अधिकारियों की टीम ने उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बन गए माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला का खात्मा किया था। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निर्देश पर STF की टीम को अत्याधुनिक वाहन तथा उस समय बाजार में उपलब्ध तमाम आधुनिक हथियार भी उपलब्ध कराए गए थे। उन दिनों तक उत्तर प्रदेश पुलिस को किसी व्यक्ति का फोन सर्विलांस पर लगाने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं था। मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निवेदन पर भारत सरकार के सहयोग से यह व्यवस्था बनाई गई कि STF किसी के भी फोन को सर्विलांस पर लगा सकती है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की STF टीम को हवाई यात्रा की मुफ्त सुविधा भी प्रदान की गई। धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश STF का रूतवा बढ़ता चला गया और वर्तमान में STF उत्तर प्रदेश की सबसे शानदार पुलिस फोर्स के रूप में स्थापित है। UP News
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