उत्तर प्रदेश में एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया। यूपी एटीएस ने ऐसे संदिग्ध मॉड्यूल का खुलासा किया है, जो प्रदेश के कई संवेदनशील इलाकों में दहशत फैलाने की तैयारी में था।

UP News : उत्तर प्रदेश में एक तरफ यूपी एटीएस की सतर्कता ने राजधानी लखनऊ को दहलाने वाली एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया, तो दूसरी तरफ प्रदेश की पुलिस व्यवस्था के भीतर की एक चौंकाने वाली लापरवाही भी सामने आ गई। जिस नेटवर्क को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में महीनों पहले गंभीरता से लिया जाना चाहिए था, वही गिरोह अब लखनऊ में रेलवे सिग्नल सिस्टम को निशाना बनाकर बड़े हादसे की जमीन तैयार करता मिला। इस खुलासे ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि शुरुआती स्तर पर हुई ढिलाई किस तरह बड़े खतरे में बदल सकती है।
दरअसल, यूपी एटीएस ने हाल ही में एक बड़े ऑपरेशन के तहत मेरठ के साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, गौतमबुद्धनगर के विकास उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला पंडित को लखनऊ से गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये चारों संदिग्ध लखनऊ रेलवे स्टेशन के आसपास विस्फोट और सिग्नलिंग सिस्टम को ठप कर भीषण रेल दुर्घटना जैसी स्थिति पैदा करने की तैयारी में थे। अगर यह साजिश सफल हो जाती, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी में भारी तबाही मच सकती थी और उसके असर दूर तक महसूस किए जाते। पूछताछ आगे बढ़ी तो इस पूरे नेटवर्क की डोर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से से जुड़ती चली गई। एजेंसियों के अनुसार, इस ऑपरेशन का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा मेरठ का आकिब खान है। यही आकिब सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को जोड़ने, उन्हें विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाने और नेटवर्क तैयार करने का काम कर रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर में इसी आकिब का नाम पहले भी सामने आया था, लेकिन उस समय की गई पुलिस जांच उसे खतरे के बजाय मामूली मामला मानकर आगे बढ़ गई।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ नवंबर 2025 की एक वायरल वीडियो कॉल में बताई जा रही है। इस वीडियो कॉल में दुबई में मौजूद आकिब खान हथियारनुमा वस्तुएं दिखाता नजर आया था। मामला सामने आने के बाद बिजनौर पुलिस ने केस दर्ज तो किया, लेकिन आगे की जांच में जिस गंभीरता की जरूरत थी, वह दिखाई नहीं दी। उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील राज्य में ऐसी जानकारी को महज दिखावे या हल्के मामले की तरह लेना अब पुलिस तंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
आरोप है कि मामले की जांच के दौरान तथ्यों की गहराई में जाने के बजाय आरोपियों के दावों पर भरोसा कर लिया गया। रिपोर्ट में हथियार जैसी दिख रही चीजों को खिलौना और ग्रेनेड जैसी वस्तुओं को सामान्य सामान बताकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यही वह बिंदु था, जहां उत्तर प्रदेश की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुराग नजरअंदाज हो गया। बाद की घटनाओं ने साबित कर दिया कि बिजनौर में जो कुछ दिखाई दिया था, वह किसी बड़े नेटवर्क की शुरुआती परत थी।
लखनऊ में गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ के दौरान जब पुराने डिजिटल लिंक, वीडियो और संपर्कों को जोड़ा गया, तब बिजनौर की वह फाइल दोबारा खुली जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। एटीएस को पता चला कि जिन लोगों और संपर्कों को पहले कमतर आंका गया था, वही अब उत्तर प्रदेश के भीतर बड़े आतंकी प्लान के साथ सक्रिय थे। इससे साफ हो गया कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से खड़ा किया गया नेटवर्क था। जांच में यह भी सामने आया कि इसी नेक्सस से जुड़े तत्वों ने बिजनौर में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की नीयत से एक वाहन को आग के हवाले किया था। उस वाहन पर धार्मिक शब्द लिखे हुए थे और आगजनी का वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक भेजा गया। इस घटना का मकसद सिर्फ नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करना और स्थानीय स्तर पर तनाव भड़काने की कोशिश भी था। जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि लखनऊ की साजिश और बिजनौर की पुरानी जांच आपस में जुड़ी हुई हैं, वैसे ही विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में उस समय जांच से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। नांगल सोती थाने के तत्कालीन प्रभारी को निलंबित किया गया, जबकि संबंधित क्षेत्राधिकारी को पद से हटा दिया गया। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। UP News