यह नया हाई-स्पीड कॉरिडोर शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र और गोगवान जलालपुर के पास से शुरू होकर गोरखपुर और नेपाल सीमा तक पहुंचेगा। शुरुआती डिजाइन के मुताबिक शुरुआत में गोरखपुर-बस्ती-गोंडा-सीतापुर दिशा से मार्ग तय था, लेकिन अब नए सर्वे में एलाइनमेंट बदल दिया गया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में सड़क नेटवर्क लगातार तेजी से फैल रहा है, और अब राज्य को एक और विशाल एक्सप्रेसवे मिलने जा रहा है। सरकार ने शामली से गोरखपुर तक एक नए लगभग 700 किलोमीटर लंबे छह-लेन मेगा एक्सप्रेसवे की योजना को आगे बढ़ा दिया है। यह मार्ग पूर्वी और पश्चिमी यूपी को सीधे जोड़ देगा, जिससे दोनों इलाकों में आवागमन और कारोबार को बड़ी राहत मिलेगी।
यह नया हाई-स्पीड कॉरिडोर शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र और गोगवान जलालपुर के पास से शुरू होकर गोरखपुर और नेपाल सीमा तक पहुंचेगा। शुरुआती डिजाइन के मुताबिक शुरुआत में गोरखपुर-बस्ती-गोंडा-सीतापुर दिशा से मार्ग तय था, लेकिन अब नए सर्वे में एलाइनमेंट बदल दिया गया है। संभावना है कि यह एक्सप्रेसवे लखनऊ, सीतापुर, बरेली, मेरठ, बिजनौर और मुजफ्फरनगर जैसे बड़े जिलों को जोड़ते हुए शामली तक पहुंचेगा।
इस महापरियोजना को दो हिस्सों में तैयार किया जाएगा। पहला चरण शामली से पुवायां तक, लगभग 450 किमी तथा दूसरा चरण पुवायां से गोरखपुर तक, लगभग 300 किमी तैयार किया जाएगा। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार सर्वे लगभग पूरा कर लिया गया है और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेजने की प्रक्रिया में है। सड़क निर्माण से जुड़ी अधिसूचना साल 2026 में जारी होने की उम्मीद है। अधिसूचना के बाद 22 जिलों और 37 तहसीलों में भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। इसके बाद जमीन अधिग्रहण और निर्माण का पहला चरण शुरू होगा।
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के कुल 22 जिलों को जोड़ने वाला है। इनमें प्रमुख जिले हैं मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और गोरखपुर। इन इलाकों के किसानों व स्थानीय निवासियों को भूमि मूल्य वृद्धि और रोजगार के नए अवसरों का सीधा लाभ मिलेगा।
* पूर्वांचल से पश्चिमी यूपी तक तेज, सीधी और सुरक्षित यात्रा
* गोरखपुर-शामली के बीच यात्रा समय में 7-8 घंटे तक कमी
* औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी, नए निवेश की संभावनाएँ
* माल ढुलाई की लागत में कमी
* राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम
* सड़क हादसों में संभावित कमी
* हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार
700 किमी लंबा यह मेगा एक्सप्रेसवे सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत की यातायात प्रणाली को नई दिशा देगा। फ्रेट, पर्यटन, कृषि व उद्योग सभी क्षेत्रों में इसकी सकारात्मक भूमिका देखने को मिलेगी।