वहीं रोप-वे चालू होने के बाद यही दूरी हवा के रास्ते लगभग 16 मिनट में तय हो जाएगी। मतलब, काशी केदारेश्वर के दर्शन अब थकान, धक्कामुक्की और हॉर्न के शोर के बिना, एक सुगम और आधुनिक सफर के साथ पूरे होंगे।

UP News : उत्तर प्रदेश के धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचना अब सड़क जाम के इम्तहान से होकर नहीं, आसमान के रास्ते से होगा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की साझी पहल से बन रहा देश का पहला अर्बन रोप-वे वाराणसी कैंट स्टेशन को सीधे श्री काशी विश्वनाथ धाम से जोड़ेगा। फिलहाल जहां श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुँचने में आधा घंटा या उससे भी ज्यादा समय जाम में फँसकर गुज़ारना पड़ता है, वहीं रोप-वे चालू होने के बाद यही दूरी हवा के रास्ते लगभग 16 मिनट में तय हो जाएगी। मतलब, काशी केदारेश्वर के दर्शन अब थकान, धक्कामुक्की और हॉर्न के शोर के बिना, एक सुगम और आधुनिक सफर के साथ पूरे होंगे।
वाराणसी की संकरी गलियां, सदियों पुरानी बस्तियां और हर मोड़ पर रची-बसी धार्मिक आस्था लंबे समय से उत्तर प्रदेश की शहरी योजनाओं के लिए सबसे बड़ी कसौटी रही हैं। यहां फ्लाईओवर खड़ा करना हो या मेट्रो की पटरी बिछानी हो, दोनों ही काम तकनीकी चुनौतियों और भू-संरचना की वजह से आसान नहीं माने जाते। ऐसे मुश्किल हालात में उत्तर प्रदेश ने शहरी परिवहन का एक बिल्कुल नया और साहसिक रास्ता चुना है – अर्बन रोप-वे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में तैयार हो रही यह योजना सिर्फ वाराणसी का चेहरा नहीं बदलेगी, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक ऐसा ‘शोकेस मॉडल’ मानी जा रही है, जिसे आगे चलकर अयोध्या, मथुरा, प्रयागराज जैसे भीड़भाड़ वाले धार्मिक शहरों सहित अन्य शहरी गलियारों में भी दोहराया जा सकता है।
इस समय वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचना किसी भी श्रद्धालु के लिए धैर्य की परीक्षा जैसा है। करीब 4 किलोमीटर के इस रास्ते पर उत्तर प्रदेश के इस प्राचीन शहर की संकरी सड़कों पर दिनभर लंबी लाइनें, जाम और वाहन रेंगते हुए आम बात हैं। जो दूरी सामान्य हालात में भी 25–30 मिनट में मुश्किल से पूरी होती है, वही रोप-वे के चालू होने के बाद सीधे हवा के रास्ते कुछ ही मिनटों में तय हो जाएगी। ऊपर केबिन में बैठा यात्री नीचे उत्तर प्रदेश के वाराणसी की पुरानी बस्तियों, घाटों और सड़कों का नजारा देखता हुआ आराम से मंदिर तक पहुँच सकेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र की एजेंसियों की निगरानी में बन रहे इस अर्बन रोप-वे की आधारशिला 24 मार्च 2023 को रखी गई थी। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत करीब 645 करोड़ रुपये थी, लेकिन तकनीकी बदलाव, डिजाइन अपडेट और अन्य चुनौतियों के कारण अब परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इंजीनियरिंग और सिविल वर्क तेज रफ्तार से जारी है और अधिकारियों का लक्ष्य है कि मई 2026 तक इसे उत्तर प्रदेश के आम लोगों और देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाए।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने से पहले रोज़ाना जहाँ सिर्फ़ करीब पाँच हजार श्रद्धालु बाबा के दरबार पहुँच पाते थे, वहीं अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश के कोने–कोने से लेकर देश–दुनिया तक से आने वाले भक्तों का सैलाब हर दिन दो लाख की संख्या पार कर रहा है। इसी भारी भीड़ और बढ़ती आस्था को मैनेज करने के लिए वाराणसी रोप–वे की हाईटेक डिजाइन तैयार की गई है। प्लान ये है कि हर केबिन में एक साथ करीब 10 यात्री आराम से बैठ सकेंगे और लगभग 148 केबिन लगातार मूवमेंट में रहेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को न तो लंबी–लंबी लाइनों में घँटों खड़ा होना पड़े, न ही ऑटो–रिक्शा और टैक्सी की जद्दोजहद से जूझना पड़े। ट्रेन से उतरते ही यात्री सीधे रोप–वे स्टेशन तक पहुँचेंगे, वहां से केबिन में बैठकर कुछ ही मिनट में मंदिर परिसर के नज़दीक उतर जाएंगे। मतलब साफ है – उत्तर प्रदेश के वाराणसी कैंट स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर तक की यात्रा अब बिना धक्कामुक्की, बिना जाम और बिना भागदौड़ के, बिल्कुल सुगम और सुकूनभरी होने जा रही है।
रोप-वे शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित धर्मनगरी वाराणसी का मिजाज भी सैलानियों की नजर में बदलता हुआ दिखेगा। अब केबिन के भीतर बैठा यात्री नीचे सड़कों पर भागते–दौड़ते वाहनों, हॉर्न और धुएं को नहीं, बल्कि ऊपर से काशी का अद्भुत पैनोरमिक व्यू देखेगा। घाटों की ओर उतरती संकरी गलियां, सदियों पुराने मोहल्लों की घनी बस्तियां और मंदिरों की श्रृंखला हवा से ऐसे दिखाई देगी, जैसे किसी जीवंत चित्रकला को ऊपर से निहार रहे हों। माना जा रहा है कि रोप-वे की ऊँचाई से दिखने वाली काशी की यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक झलक हर यात्री की यात्रा को सिर्फ़ ‘दर्शन’ नहीं, बल्कि एक यादगार विज़ुअल एक्सपीरियंस में बदल देगी।
उत्तर प्रदेश सरकार इस रोप-वे प्रोजेक्ट को सिर्फ़ श्रद्धालुओं की सुविधा भर नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट मोबिलिटी’ के नए युग की शुरुआत मानकर आगे बढ़ रही है। सरकार की नजर में वाराणसी का यह मॉडल आने वाले समय में पूरे उत्तर प्रदेश के शहरी ट्रैफिक मैनेजमेंट का टेस्ट केस बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर काशी रोप-वे अपनी उम्मीदों पर खरा उतरता है, तो अयोध्या, मथुरा, प्रयागराज जैसे तीर्थ शहरों के साथ–साथ लखनऊ के भी सबसे भीड़भाड़ वाले कॉरिडोर पर ऐसे ही हवाई सफर वाले समाधान पर गंभीर मंथन शुरू हो सकता है। इससे सड़कों पर वाहनों का बोझ हल्का होगा, जाम और शोर–प्रदूषण दोनों में कमी आएगी और पर्यटन पर टिकी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी। यानी वाराणसी की हवा में उड़ता यह रोप-वे, आने वाले समय में पूरे यूपी के स्मार्ट, क्लीन और मॉडर्न ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा तय कर सकता है। UP News