उत्तर प्रदेश में इस व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई है ग्राम पंचायत, और इसका प्रमुख होता है ग्राम प्रधान। ग्राम प्रधान को आम बोलचाल में गांव का सरपंच या मुखिया भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में उसकी हैसियत गांव में इतनी मजबूत होती है कि लोग कई बार उसे छोटा विधायक भी कहते हैं।

भारत में पंचायती राज व्यवस्था संविधान के 73वें संशोधन (1992) के तहत लागू की गई थी। इसका उद्देश्य था, गांवों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना, ताकि विकास योजनाओं का सीधा लाभ जनता तक पहुँचे। उत्तर प्रदेश में इस व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई है ग्राम पंचायत, और इसका प्रमुख होता है ग्राम प्रधान। ग्राम प्रधान को आम बोलचाल में गांव का सरपंच या मुखिया भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में उसकी हैसियत गांव में इतनी मजबूत होती है कि लोग कई बार उसे छोटा विधायक भी कहते हैं।
ग्राम प्रधान का चुनाव सीधे जनता के वोट से होता है। कोई भी पात्र नागरिक (जो ग्राम पंचायत का मतदाता है) इस पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन कर सकता है। चुनाव पार्टी चिन्हों पर नहीं होते, यानी कोई बीजेपी या सपा उम्मीदवार नहीं होता, सबको एक समान मैदान मिलता है। ग्राम पंचायत में ग्राम सभा के सदस्य भी चुने जाते हैं, जो गांव की विकास योजनाओं पर चर्चा और निर्णय में भाग लेते हैं। चुनाव हर पांच साल में होते हैं और इनकी देखरेख राज्य निर्वाचन आयोग करता है।
ग्राम प्रधान सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि पूरे गांव के विकास की जिम्मेदारी का केंद्र होता है। उसकी भूमिका प्रशासन, वित्त, और जनसंपर्क तीनों में होती है।
* ग्राम पंचायत की बैठकों का आयोजन और संचालन।
* ग्राम सभा में प्रस्ताव लाना और स्वीकृति प्राप्त करना।
* सरकारी योजनाओं का सही और समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
* केंद्र और राज्य सरकार से आने वाले फंड्स का उपयोग और लेखा-जोखा रखना।
* गांव में सामाजिक सौहार्द और शांति बनाए रखना।
* विवादों को पंचायत स्तर पर सुलझाने की कोशिश करना।
* ग्रामवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना।
* बाल विवाह, दहेज, नशा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाना।
* पंचायत भवन में कार्यालय सुविधा।
* कार्य के दौरान सरकारी वाहन का उपयोग (कुछ योजनाओं के तहत)।
* मोबाइल और स्टेशनरी भत्ता (कई जिलों में स्थानीय स्तर पर)।
* सरकारी अधिकारियों से सीधा संवाद का अधिकार, जैसे बीडीओ, एडीओ, ग्राम सचिव, आदि।
ग्राम प्रधान का रुतबा बड़ा है, लेकिन जिम्मेदारी उससे भी बड़ी। अगर कोई अनियमितता (जैसे फंड घोटाला या भ्रष्टाचार) पाई जाती है, तो उस पर कार्रवाई और निलंबन तक हो सकता है। प्रधान के खिलाफ ग्राम सभा या जिलाधिकारी स्तर पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसलिए एक अच्छा प्रधान वह है जो ईमानदारी से योजनाएँ लागू करे और जनता से सीधा संवाद रखे। ग्राम प्रधान गांव का सबसे बड़ा जनप्रतिनिधि है, उसकी सैलरी छोटी हो सकती है, लेकिन उसके फैसले करोड़ों के होते हैं। ग्राम प्रधान ही वह शख्स होता है जो तय करता है कि गांव में कब सड़क बनेगी, कहां हैंडपंप लगेगा, किसे आवास मिलेगा और किस योजना का लाभ किसे दिया जाएगा। इसलिए यह पद न सिर्फ लोकप्रिय, बल्कि सबसे संवेदनशील और जिम्मेदार भी है।।