इसी पृष्ठभूमि में हुई बैठक में शीर्ष नेतृत्व ने दो टूक संदेश दिया कि अभियान में ढिलाई, लापरवाही या देरी अब किसी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। पार्टी स्तर पर जोर दिया गया कि यह वक्त ग्राउंड नेटवर्क को एक्टिव करने, बूथ मैनेजमेंट को मजबूत करने और डेटा-आधारित निगरानी के जरिए हर दिन की प्रगति मापने का है।

UP News : उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची के आते ही सियासत ने तुरंत रफ्तार पकड़ ली है। SIR प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में नामों के हटने और नए नाम जोड़ने के लिए मिले एक महीने के निर्णायक मौके को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी–सरकार के शीर्ष नेतृत्व के साथ वर्चुअल बैठक कर मैदान की रणनीति तय की। बैठक में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, एमएलसी और संगठन पदाधिकारियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला अध्यक्षों को साफ जिम्मेदारी दी गई कि अगले 30 दिन मिशन मोड में मतदाता पंजीकरण बढ़ाया जाए और जिन मतदाताओं के नाम सूची से कटे हैं, उन्हें नियमों के दायरे में तेजी से दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया को ज़मीन पर मजबूत किया जाए।
ड्राफ्ट सूची सामने आते ही यह संकेत और गहरा हो गया है कि इस बार उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में बदलाव मामूली नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर हुए हैं। इसी पृष्ठभूमि में हुई बैठक में शीर्ष नेतृत्व ने दो टूक संदेश दिया कि अभियान में ढिलाई, लापरवाही या देरी अब किसी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। पार्टी स्तर पर जोर दिया गया कि यह वक्त ग्राउंड नेटवर्क को एक्टिव करने, बूथ मैनेजमेंट को मजबूत करने और डेटा-आधारित निगरानी के जरिए हर दिन की प्रगति मापने का है।ताकि उत्तर प्रदेश के हर जिले में मतदाता सूची से जुड़ी आपत्तियां, कटे नामों की शिकायतें और नई एंट्री की प्रक्रियाएं तय समय-सीमा के भीतर निस्तारित कराई जा सकें।
बैठक में तय किया गया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ा अभियान अब टारगेटेड एक्शन के मॉडल पर चलेगा और फोकस तीन वर्गों पर केंद्रित रहेगा। पहला, वे नए युवा मतदाता जिनकी उम्र मतदान के योग्य हो चुकी है, लेकिन नाम अब तक वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हो पाया। दूसरा, वे मतदाता जिनके नाम दस्तावेज़ों की कमी, तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रिया संबंधी कारणों से कट गए हैं ऐसे मामलों में नियमों के तहत तेजी से सुधार कराकर नाम दोबारा जोड़ने पर जोर रहेगा। तीसरा, वे मतदाता जिनका पता सत्यापन में नहीं मिला, या जो मैपिंग/वेरिफिकेशन के दौरान छूट गए उनकी पहचान कर बूथ स्तर पर दोबारा वेरिफिकेशन कराते हुए सूची को अपडेट करने की रणनीति अपनाई जाएगी।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की ओर से सामने रखे गए आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज कर दी। उपलब्ध डेटा के मुताबिक SIR प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश में करीब 2.89 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। जिलावार तस्वीर देखें तो लखनऊ सबसे आगे बताया जा रहा है, जहां लगभग 12 लाख नाम कटने की बात सामने आई है। इसके बाद प्रयागराज में 11.56 लाख नाम हटने का दावा किया गया है। रिपोर्टेड आंकड़ों के अनुसार कानपुर नगर में करीब 9 लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख और बरेली में 7.14 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए हैं। वहीं मेरठ (6.65 लाख), गोरखपुर (6.45 लाख), सीतापुर (6.23 लाख) और जौनपुर (5.89 लाख) में भी बड़ी संख्या में नाम कटने की जानकारी ने यह संकेत दे दिया है कि इस बार उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में बदलाव सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि चुनावी नजरिए से बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।
निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े पक्ष के अनुसार, उत्तर प्रदेश में नए मतदाता जोड़ने का काम भी समानांतर चल रहा है। अब तक 15 लाख से अधिक लोगों ने फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है, जिनमें बड़ी संख्या पहली बार वोटर बनने जा रहे युवाओं की बताई जा रही है। SIR के तहत उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में वोट कटने की रिपोर्ट है और कई जिलों में प्रतिशत काफी ऊंचा बताया गया है। पश्चिमी यूपी में सहारनपुर (16.37%), मुजफ्फरनगर (16.29%), मेरठ (24.65%), गाजियाबाद (28.83%), गौतमबुद्ध नगर (23.98%), आगरा (23.25%) जैसे आंकड़े चर्चा में हैं। मध्य यूपी और ब्रज क्षेत्र में अलीगढ़ (18.60%), मथुरा (19.19%), फिरोजाबाद (18.13%), मैनपुरी (16.17%), एटा (16.80%), हाथरस (16.30%) के आंकड़े सामने आए हैं। बरेली (20.99%) और बदायूं (20.39%) में भी कटौती प्रतिशत के चलते स्थानीय राजनीति गरमाई हुई बताई जा रही है।
बताए गए आंकड़ों में लखनऊ (30.04%), कानपुर नगर (25.50%) और प्रयागराज (24.64%) में वोट कटने की दर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। इसके साथ ही पूर्वांचल में वाराणसी (18.18%), जौनपुर (16.51%), गाजीपुर (13.85%), चंदौली (15.45%), भदोही (16.73%), आजमगढ़ (15.25%) के आंकड़े भी उल्लेखनीय बताए गए हैं। अवध क्षेत्र में सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, गोंडा, बहराइच और बलरामपुर जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नाम बाहर होने की बात कही गई है। खास तौर पर बलरामपुर (25.98%) और बहराइच (20.44%) के आंकड़े चौंकाने वाले बताए जा रहे हैं। बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा में भी हजारों नाम हटने का उल्लेख है।
ड्राफ्ट सूची के बाद उत्तर प्रदेश में अब अगला एक महीना मतदाता जोड़ने, नाम सुधारने और आपत्ति/दावे के निस्तारण के लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है। राजनीतिक दल जहां इसे संगठनात्मक चुनौती के तौर पर देख रहे हैं, वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी लक्ष्य यह है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में दर्ज हो और गलत कटौती की शिकायतें तय प्रक्रिया में समय रहते सुधारी जा सकें। UP News