अब बहस का केंद्र यही है कि किन 10 जिलों में कटौती सबसे कम रही जहां नाम बचा रहने की दर बेहतर दिखी और किन जिलों में सबसे ज्यादा नाम घटे, जिससे प्रशासन और राजनीतिक दलों की निगाहें सीधे उन इलाकों पर टिक गई हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 6 जनवरी 2026 को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने पूरे प्रदेश में सियासी से लेकर आम जनजीवन तक नई हलचल पैदा कर दी। सुबह से ही लोग वेबसाइट/कैंपों पर नाम तलाशते दिखे किसी के चेहरे पर राहत थी कि सूची में एंट्री कायम है, तो कई जगहों पर सवाल गूंजे कि नाम आखिर गायब क्यों हो गया। आयोग की इस कवायद के बाद जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने चर्चा और तेज कर दी। ड्राफ्ट सूची में प्रदेशभर में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं की संख्या कम दिखाई दे रही है। अब बहस का केंद्र यही है कि किन 10 जिलों में कटौती सबसे कम रही जहां नाम बचा रहने की दर बेहतर दिखी और किन जिलों में सबसे ज्यादा नाम घटे, जिससे प्रशासन और राजनीतिक दलों की निगाहें सीधे उन इलाकों पर टिक गई हैं।
उत्तर प्रदेश की SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखते हैं। पहले मतदाता बनाम अब मतदाता के मुकाबले में जिन 10 जिलों में कटौती प्रतिशत सबसे कम रहा, उनमें ललितपुर (9.96%) और हमीरपुर (10.78%) सबसे नीचे रहे, जबकि महोबा (12.42%), बांदा (13.00%) और चित्रकूट (13.67%) भी इसी लो-कट श्रेणी में दिखे। सूची में अमरोहा (13.22%), पीलीभीत (13.61%), अंबेडकरनगर (13.82%), गाजीपुर (13.85%) और झांसी (13.92%) जैसे जिले भी शामिल हैं जहां कटौती 14% से कम रही।
उत्तर प्रदेश की SIR Draft Roll-2026 के आंकड़ों में सबसे बड़ी कटौती राजधानी लखनऊ में दर्ज हुई है। यहां मतदाता संख्या 30.04% घटकर 39,94,535 से 27,94,397 पर आ गई यानी हर तीन में से लगभग एक नाम ड्राफ्ट रोल में कम दिखाई दे रहा है। ड्राफ्ट डेटा के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजहें चार श्रेणियों में सामने आती हैं: 1,28,242 नाम मृत्यु के आधार पर हटाए गए, 4,27,705 मतदाता Untraceable/Absent (यानी सत्यापन में नहीं मिले/अनुपस्थित) दर्ज हुए, 5,35,855 लोगों के अन्य स्थान पर शिफ्ट होने की एंट्री हुई, जबकि 49,046 नाम डुप्लीकेट पाए गए। लखनऊ के बाद जिन जिलों में कटौती की दर ज्यादा रही, उनमें उत्तर प्रदेश के कई बड़े और हाई-मूवमेंट इलाके शामिल हैं गाजियाबाद (28.83%), बलरामपुर (25.98%), कानपुर नगर (25.50%), मेरठ (24.65%), प्रयागराज (24.64%), गौतमबुद्ध नगर (23.98%), आगरा (23.25%), हापुड़ (22.30%) और शाहजहांपुर (21.76%)। कुल मिलाकर, ये आंकड़े संकेत देते हैं कि जहां तेज शहरीकरण, लगातार माइग्रेशन, पते बदलने की रफ्तार और डुप्लीकेट एंट्री ज्यादा रहती है, वहां SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कटौती का प्रतिशत भी ऊंचा नजर आता है।
ड्राफ्ट सूची में नाम न दिखना अंतिम फैसला नहीं है यही तो दावा-आपत्ति का अहम चरण है, जहां आपकी बात सुनी जाती है और गलती सुधारी जा सकती है। उत्तर प्रदेश के मतदाताओं के पास 6 फरवरी 2026 तक का समय है कि वे ऑनलाइन या अपने क्षेत्र के BLO (बूथ लेवल अधिकारी) के जरिए आवेदन देकर नाम जुड़वाएं, गलतियां ठीक कराएं या पता/उम्र जैसी जानकारी अपडेट करा लें। याद रखें, ड्राफ्ट लिस्ट सिर्फ पहला संकेत है; असली काम इसके बाद शुरू होता है। इसलिए सबसे पहले सूची में अपना नाम जांचें, और अगर कहीं कमी दिखे तो समय रहते फॉर्म भरकर प्रक्रिया पूरी करें ताकि आपका वोटिंग अधिकार किसी तकनीकी वजह से छूट न जाए।
दावा-आपत्ति के दौर में चुनाव आयोग ने तीन की फॉर्म के जरिए प्रक्रिया को बिल्कुल साफ और आसान रखा है। अगर ड्राफ्ट सूची में आपका नाम गायब है और नया नाम जोड़ना है, तो Form-6 भरकर आवेदन करें। यदि सूची में किसी व्यक्ति का नाम मृत्यु के बाद भी दर्ज है या फिर गलत तरीके से जुड़ गया है, तो उसे हटाने के लिए Form-7 के जरिए डिलीशन रिक्वेस्ट दी जा सकती है। वहीं अगर आपका नाम मौजूद है लेकिन नाम की स्पेलिंग, उम्र, पता या फोटो जैसी जानकारी में गलती है, तो Form-8 के माध्यम से करेक्शन/अपडेट कराया जा सकता है।