‘संकट में अंडरग्राउंड हो जाते हैं...’ LPG पर अखिलेश ने भाजपा को घेरा

अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि अगर भाजपा का दावा है कि गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उत्तर प्रदेश समेत देशभर में लोगों की दिक्कतें दूर करने के लिए उसके मंत्री, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता मैदान में क्यों नहीं उतर रहे।

अखिलेश यादव
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 12:00 PM
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UP News : देश में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर बढ़ती बेचैनी के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि जब आम परिवार रसोई गैस के लिए परेशान होकर एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, तब सत्ता पक्ष के नेता जनता के बीच कहीं दिखाई नहीं दे रहे। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि अगर भाजपा का दावा है कि गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर उत्तर प्रदेश समेत देशभर में लोगों की दिक्कतें दूर करने के लिए उसके मंत्री, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता मैदान में क्यों नहीं उतर रहे। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा संकट के समय जैसे अचानक खामोश और गायब हो जाती है। उन्होंने भाजपा नेताओं से अपील की कि वे दफ्तरों और बयानबाजी से बाहर निकलें, गैस एजेंसियों तक पहुंचें और जरूरतमंद परिवारों को समय पर सिलेंडर दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उत्तर प्रदेश में रसोई से जुड़ा मुद्दा बना सियासी सवाल

सपा अध्यक्ष ने कहा कि एलपीजी का मुद्दा सिर्फ सप्लाई या वितरण का प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे घर-घर की रसोई से जुड़ा सवाल है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहां करोड़ों परिवार घरेलू गैस पर निर्भर हैं, वहां सिलेंडर की किल्लत या वितरण में रुकावट आम आदमी के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जब रसोई का चूल्हा प्रभावित होता है, तो उसका असर सबसे पहले गरीब, निम्न मध्यम वर्ग, मजदूर और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जनता परेशान हो, तब सत्ता पक्ष को सबसे पहले मदद के लिए आगे आना चाहिए। लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा नहीं दिख रहा। अखिलेश यादव ने पूछा कि अगर लोगों को गैस नहीं मिल रही, तो वे अपनी समस्या लेकर कहां जाएं। क्या जनता जनप्रतिनिधियों के घर पहुंचे, उनके कार्यालयों के बाहर खड़ी हो या रास्ते में रोककर जवाब मांगे? अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा की कार्यशैली यह बन चुकी है कि किसी भी किल्लत या जनसमस्या को पहले नकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब हालात बिगड़ने लगते हैं, तब भी सत्ता पक्ष सीधे जवाब देने से बचता है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि आम जनता की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जनता पहले से महंगाई, बेरोजगारी और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े दबाव का सामना कर रही है। ऐसे समय में अगर गैस जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ती है, तो यह स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

कोरोना काल का हवाला देकर साधा निशाना

सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कोरोना काल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर सरकार को घेरने वाले सवाल उठे थे। अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब वही चिंता घरेलू गैस और खाद जैसी आवश्यक वस्तुओं को लेकर भी सामने आती दिख रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि जब-जब संकट गहराता है, सबसे ज्यादा मार आम जनता पर पड़ती है। दूसरी ओर, सरकार और सत्ताधारी दल के लोग जवाबदेही से दूरी बनाते नजर आते हैं। उनके अनुसार, यही वजह है कि जनता के भीतर असंतोष बढ़ता है।

आपदा में कालाबाजारी का आरोप

अखिलेश यादव ने भाजपा पर यह आरोप भी लगाया कि संकट की घड़ी में व्यवस्था सुधारने के बजाय हालात ऐसे छोड़ दिए जाते हैं, जहां कालाबाजारी को जगह मिल जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी कमी या किल्लत का सबसे ज्यादा फायदा वे लोग उठाते हैं, जो जरूरत की चीजों को मुनाफे का जरिया बना देते हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह निगरानी मजबूत करे और जनता को राहत दे।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में आम परिवार पहले ही बढ़ते खर्च से जूझ रहे हैं। ऐसे में रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरत पर भी दबाव बढ़ना बेहद गंभीर बात है। सपा प्रमुख ने मांग की कि सरकार सिर्फ बयान जारी करने के बजाय जमीनी व्यवस्था दुरुस्त करे।

सेवा का दावा है तो जनता के बीच जाए भाजपा

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा और उसके समर्थक अक्सर सेवा और जनहित की बात करते हैं, लेकिन असली परीक्षा संकट के समय होती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार हालात संभालने में कठिनाई महसूस कर रही है, तो भाजपा के जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता खुद राहत व्यवस्था में उतरें। गैस एजेंसियों से समन्वय करें, जरूरतमंदों की सूची बनाएं और परेशान परिवारों तक मदद पहुंचाएं। उन्होंने तंज करते हुए यह भी कहा कि अगर सत्ता पक्ष जनता को राहत नहीं दे पा रहा, तो कम से कम भूख और परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए मुफ्त भोजनालय जैसी व्यवस्था शुरू करे। उनके मुताबिक, सरकार का काम सिर्फ दावे करना नहीं, बल्कि मुश्किल समय में लोगों के साथ खड़ा होना है। UP News

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राहुल गांधी का लखनऊ दौरा आज, दलित समाज के बीच संदेश देने की तैयारी

शुक्रवार को राहुल गांधी राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपीटर हॉल में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में दलित चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद का आयोजन किया गया है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 11:00 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सामाजिक समीकरणों की हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। बहुजन आंदोलन के बड़े प्रतीक कांशीराम की जयंती से ठीक पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का लखनऊ दौरा राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक मौजूदगी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में दलित, पिछड़े और वंचित तबकों के बीच कांग्रेस की नई पकड़ बनाने की कोशिश का हिस्सा है। शुक्रवार को राहुल गांधी राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपीटर हॉल में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में दलित चिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद का आयोजन किया गया है। कांग्रेस ने इस आयोजन को ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ का नाम दिया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इसे उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक एजेंडे के विस्तार के तौर पर पेश करना चाहती है।

उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय की जमीन पर नया संदेश देने की कोशिश

कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, महिलाओं तथा युवाओं के अधिकारों जैसे मुद्दों को केंद्र में रख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह पहल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कमजोर पड़े सामाजिक आधार को दोबारा खड़ा करने की कवायद के रूप में देखी जा रही है। दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति लंबे समय से जातीय और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मिशन-2027 के लिए कांग्रेस की शुरुआती सामाजिक तैयारी के तौर पर भी पढ़ा जा रहा है।

कांशीराम जयंती से पहले कार्यक्रम का समय भी बना सियासी संकेत

15 मार्च को कांशीराम जयंती है। उससे ठीक पहले लखनऊ में इस तरह का आयोजन होना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। कांशीराम उत्तर प्रदेश सहित देशभर की बहुजन राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनकी जयंती से पहले राहुल गांधी का दलित बुद्धिजीवियों और सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच पहुंचना कांग्रेस की सोच-समझकर बनाई गई रणनीति की ओर इशारा करता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि 11 मार्च को प्रस्तावित रायबरेली दौरा टलने के बावजूद लखनऊ कार्यक्रम को प्राथमिकता दी गई। इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस फिलहाल उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक और राजनीतिक हस्तक्षेप को नए सिरे से धार देने में जुटी है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने आसान नहीं है राह

हालांकि कांग्रेस की यह कोशिश जितनी महत्वपूर्ण दिख रही है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी अब भी एक मजबूत प्रतीकात्मक और भावनात्मक आधार रखती है, खासतौर पर जाटव समाज में उसकी पकड़ बनी हुई है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी पिछले एक दशक में दलित समुदायों के बीच अपने संगठन और सरकारी योजनाओं के जरिए प्रभाव बढ़ाया है। यही नहीं, समाजवादी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में पिछड़े और सामाजिक न्याय की राजनीति के सवाल पर लगातार सक्रिय रहती है। ऐसे में कांग्रेस के लिए दलित और पिछड़े वोट बैंक में बड़ी हिस्सेदारी बनाना सीधा मुकाबला नहीं, बल्कि लंबी राजनीतिक मेहनत का मामला होगा।

मिशन-2027 के लिए उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक तैयारी भी तेज

राहुल गांधी के लखनऊ दौरे के समानांतर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने की दिशा में भी सक्रिय नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव की तैयारी को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में 375 ‘न्याय योद्धा’ नियुक्त करने की योजना पर काम चल रहा है। इनकी भूमिका केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक-न्याय आधारित हस्तक्षेप की भी होगी। बताया जा रहा है कि ये न्याय योद्धा अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं पर नजर रखेंगे और उन लोगों की मदद करेंगे जो कानूनी लड़ाई लड़ने में सक्षम नहीं हैं। जरूरतमंदों को हर स्तर पर सहयोग देने की जिम्मेदारी इन योद्धाओं को सौंपी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी कांग्रेस के विधि विभाग को दी गई है। UP News

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उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों को आज मिलेगा बड़ा तोहफा

उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए आज का दिन बड़ी राहत और आर्थिक संबल लेकर आया है। कृषि प्रधान इस राज्य के करोड़ों अन्नदाताओं को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त का लाभ मिलने जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए बड़ी सौगात
उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए बड़ी सौगात
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 10:46 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह बड़ी खबर उत्तर प्रदेश के करोड़ो किसानों के लिए किसी राहत से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए आज का दिन बड़ी राहत और आर्थिक संबल लेकर आया है। कृषि प्रधान इस राज्य के करोड़ों अन्नदाताओं को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त का लाभ मिलने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को असम से इस किस्त को जारी करेंगे, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में डीबीटी के जरिए सीधे 4335.11 करोड़ रुपये पहुंचेंगे। यह सिर्फ सरकारी सहायता की एक और किस्त नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भरने वाला कदम है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह रकम खेती की तैयारी, बीज, खाद और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद साबित होगी।

उत्तर प्रदेश को अब तक मिल चुके हैं 94 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगातार सबसे अहम रही है। 21वीं किस्त तक उत्तर प्रदेश के किसानों के बैंक खातों में 94,668.58 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे पहुंचाई जा चुकी है। अब 22वीं किस्त जारी होने के बाद यह कुल आंकड़ा बढ़कर 99,003.69 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। यह बताने के लिए इतना ही काफी है कि उत्तर प्रदेश में यह योजना कितने बड़े स्तर पर असर डाल रही है और लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों किसान परिवार इससे सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

हर साल 6 हजार रुपये की मिलती है मदद

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसान परिवार के एक सदस्य को हर वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना का उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े नियमित खर्चों में सहायता देना और उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत करना है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर 2025 को कोयम्बटूर से इस योजना की पिछली किस्त जारी की थी।

उत्तर प्रदेश में वर्षवार किसानों को मिली सम्मान निधि

वर्षधनराशि
2018-192238.92 करोड़ रुपये
2019-2011006.87 करोड़ रुपये
2020-2114432.14 करोड़ रुपये
2021-2215775.52 करोड़ रुपये
2022-2312454.32 करोड़ रुपये
2023-2413808.48 करोड़ रुपये
2024-2515594.74 करोड़ रुपये
2025-26 (अप्रैल-जुलाई)5043.33 करोड़ रुपये
2025-26 (अगस्त-नवंबर)4314.26 करोड़ रुपये
2025-26 (दिसंबर-मार्च)4335.11 करोड़ रुपये



उत्तर प्रदेश के जिलों में होगा लाइव प्रसारण

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी होने के कार्यक्रम को उत्तर प्रदेश के कई जिलों में व्यापक स्तर पर दिखाने की तैयारी की गई है। सोनभद्र जिले में इस कार्यक्रम का सजीव प्रसारण समितियों, ब्लॉकों और पंचायत भवनों में कराया जाएगा। जिले के 1 लाख 61 हजार 265 किसानों को इस योजना का लाभ मिलने जा रहा है। जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग ने इस आयोजन को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस कार्यक्रम से जुड़ सकें और योजना की जानकारी प्राप्त कर सकें।

समितियों और पंचायत भवनों में दिखेगा वेबकास्ट

सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता की ओर से संबंधित समितियों के अधिकारियों को कार्यक्रम के प्रसारण को लेकर निर्देश दिए गए हैं। वहीं, उप कृषि निदेशक वीरेन्द्र कुमार ने ब्लॉक और पंचायत स्तर पर भी आयोजन सुनिश्चित करने को कहा है। अधिकारियों के मुताबिक, 13 मार्च को शाम 5 बजे जनपद की सभी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों में पीएम इंडिया वेबकास्ट लिंक के जरिए लाइव कार्यक्रम दिखाया जाएगा। इसके लिए स्मार्ट टीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों से प्रसारण की व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही जिला प्रशासन के सहयोग से अधिक से अधिक किसानों और समिति सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। UP News

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