उत्तर प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए आज का दिन राहत भरी खबर लेकर आया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने संगठित और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाकर उनकी आय में सीधा इजाफा कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए आज का दिन राहत भरी खबर लेकर आया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने संगठित और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाकर उनकी आय में सीधा इजाफा कर दिया है। कालीन से कांच तक, ईंट-भट्ठे से प्लास्टिक उद्योग तक, डेयरी से निजी अस्पतालों तक और सड़क निर्माण से ताला उद्योग तक, उत्तर प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिक अब पहले के मुकाबले ज्यादा भुगतान पाएंगे। महंगाई की मार झेल रहे श्रमिक परिवारों के लिए यह फैसला किसी राहत पैकेज से कम नहीं माना जा रहा। श्रम विभाग ने महंगाई के असर को देखते हुए मूल मजदूरी और परिवर्तनीय महंगाई भत्ते में संशोधन किया है, जिसके बाद अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और अति कुशल सभी श्रेणियों की मजदूरी नई दरों पर तय कर दी गई है। विभाग का कहना है कि इस बदलाव से दिहाड़ी में करीब 10 से 14 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। यह इजाफा भले कागज पर सीमित लगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के लाखों मेहनतकश परिवारों के लिए यह रोजमर्रा के खर्चों के बीच अहम राहत साबित हो सकता है।
श्रमायुक्त मार्कंडेय शाही की ओर से उत्तर प्रदेश में अप्रैल 2026 के लिए मजदूरी की नई दरों का आदेश जारी कर दिया गया है। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत सूचीबद्ध 74 नियोजनों के लिए संशोधित दरें लागू की गई हैं। महंगाई भत्ते में इजाफे के बाद यह नई व्यवस्था प्रदेश के औद्योगिक और श्रम क्षेत्र में सीधा असर डालने वाली है। श्रम विभाग का कहना है कि हर छह महीने पर महंगाई भत्ते की समीक्षा की जाती है, ताकि बदलती आर्थिक परिस्थितियों के मुताबिक श्रमिकों को राहत दी जा सके। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कामगारों के लिए यह संशोधन किया गया है। हालांकि उद्योगों पर इससे कुछ अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, लेकिन इसे बहुत बड़ा भार नहीं माना जा रहा।
इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश के 74 निर्धारित नियोजनों में काम कर रहे श्रमिकों पर पड़ेगा। इनमें ईंट-भट्ठा उद्योग, रबर उत्पाद, प्लास्टिक उद्योग, मिष्ठान उद्योग, प्लाईवुड, डेयरी, वस्त्र उद्योग, निजी अस्पताल, धातु उद्योग, प्रिंटिंग प्रेस, चमड़ा उद्योग, निजी कोचिंग संस्थान, फर्नीचर निर्माण, दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। सड़क निर्माण, चिकनकारी, बेकरी, लांड्री, कोल्ड स्टोरेज, सिलाई, ताला उद्योग और दियासलाई उद्योग जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। ईंट-भट्ठा उद्योग को छोड़कर बाकी कई क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों की मासिक मजदूरी अब 11021 रुपये से बढ़कर 11313 रुपये हो गई है। वहीं अर्द्धकुशल श्रमिकों को अब 12123 रुपये के बजाय 12445 रुपये मिलेंगे। कुशल श्रमिकों के वेतन में भी बढ़ोतरी की गई है और अब उनकी मासिक मजदूरी पहले की तुलना में अधिक होगी। उत्तर प्रदेश के श्रम बाजार के लिहाज से यह फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा।
उत्तर प्रदेश के कांच उद्योग, खासकर चूड़ी निर्माण से जुड़े श्रमिकों के लिए भी नई दरें राहत लेकर आई हैं। अकुशल श्रमिकों की मासिक मजदूरी 9825 रुपये से बढ़ाकर 10096.68 रुपये कर दी गई है। यानी उन्हें अब प्रतिदिन 388.33 रुपये के हिसाब से भुगतान मिलेगा। अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 442.52 रुपये प्रतिदिन मजदूरी तय की गई है, जबकि कुशल श्रमिकों को 492.19 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे। इसी तरह कांच उद्योग के अन्य वर्गों में भी मजदूरी बढ़ाई गई है। तारवाला श्रेणी के श्रमिकों की मासिक मजदूरी 25503 रुपये से बढ़कर 26180.93 रुपये हो जाएगी। इसके अलावा बेलनिया और पर्यवेक्षक श्रेणी के कर्मचारियों की दिहाड़ी में भी बढ़ोतरी की गई है। उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों से जुड़े कामगारों के लिए यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UP News