बैठक के बाद मंत्रियों के संकेत भी यही रहे कि इन फैसलों से एक ओर आम लोगों की रोजमर्रा की सेवाएं ज्यादा सहज होंगी, तो दूसरी ओर निवेश और औद्योगिक गति को नया बूस्ट मिलेगा।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोकभवन में मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने एक साथ कई बड़े फैसलों पर मुहर लगाकर सियासी-प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टांप-रजिस्ट्री, उद्योग, परिवहन, चिकित्सा शिक्षा और पुलिस आवास जैसे अहम क्षेत्रों से जुड़े 13 प्रस्तावों को मंजूरी देकर साफ संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश में अब निर्णय सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने के लिए लिए जा रहे हैं। बैठक के बाद मंत्रियों के संकेत भी यही रहे कि इन फैसलों से एक ओर आम लोगों की रोजमर्रा की सेवाएं ज्यादा सहज होंगी, तो दूसरी ओर निवेश और औद्योगिक गति को नया बूस्ट मिलेगा।
कैबिनेट के फैसलों में सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश के स्टांप एवं पंजीकरण विभाग से जुड़े बड़े निर्णय की रही। मंत्री रविंद्र जायसवाल के मुताबिक अब प्रदेश में आवासीय और कृषि भूमि की तरह औद्योगिक व व्यावसायिक संपत्तियों की भी गिफ्ट डीड परिजनों/अपनों के नाम महज ₹5,000 के स्टांप पर रजिस्टर्ड कराई जा सकेगी। अब तक यह राहत केवल घर और खेती की जमीन तक सीमित थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में रजिस्ट्री पर करीब 7% और ग्रामीण क्षेत्रों में 5% शुल्क की व्यवस्था के कारण पारिवारिक हस्तांतरण महंगा पड़ता था। नई व्यवस्था से खासकर व्यापारिक संपत्तियों के पारिवारिक ट्रांसफर में आम लोगों को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है। इसी कड़ी में कैबिनेट ने कुशीनगर और झांसी में नए रजिस्ट्री कार्यालयों के लिए जमीन से जुड़े प्रस्तावों पर भी मुहर लगा दी है।
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मुताबिक शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) के एक निजी विश्वविद्यालय पर फर्जी मार्कशीट जारी करने की शिकायतें सामने आने के बाद जांच तेज हुई। जांच में अपेक्षित सहयोग न मिलने और अन्य तथ्यों के आधार पर विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त कर दी गई, साथ ही परिसमापन (लिक्विडेशन) की प्रक्रिया पूरी करने का निर्णय भी लिया गया। यह कदम बताता है कि उत्तर प्रदेश में अब डिग्री और साख—दोनों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी। दूसरी ओर, शिक्षा के विस्तार की दिशा में सरकार ने मेरठ के एक विश्वविद्यालय के ऑफ-कैंपस को मंजूरी देकर उसे नोएडा में संचालित करने का रास्ता साफ किया है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर के छात्रों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक विकल्प, संसाधन और नए अवसर मिलने की संभावना बढ़ गई है।
उद्योग विभाग की ओर से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को लेकर तैयार गाइडलाइन/नियमावली को भी मंजूरी मिल गई। मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की सेमीकंडक्टर पॉलिसी जनवरी 2024 में लाई गई थी और अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे आगे बढ़ाने में तेजी आएगी। सरकार के अनुसार, जो इकाई ₹3,000 करोड़ का निवेश करेगी, उसे केस-टू-केस आधार पर सब्सिडी और अन्य रियायतें दिए जाने का रास्ता खुलेगा। उद्देश्य है कि उत्तर प्रदेश हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और नई अर्थव्यवस्था के निवेश नक्शे पर मजबूत जगह बनाए।
परिवहन विभाग से जुड़ा बड़ा निर्णय पीलीभीत को मिला। कैबिनेट ने पीलीभीत में नए बस स्टेशन के निर्माण के लिए जमीन दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
जानकारी के अनुसार, मुख्यालय से करीब एक किलोमीटर दूरी पर कनेक्ट रोड के पास 7,000 वर्ग मीटर भूमि 30 साल की लीज पर दी गई है, जिसे आगे दो बार 30-30 साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। लक्ष्य है कि दो वर्षों में बस अड्डा बनकर तैयार हो जाए, जिससे उत्तर प्रदेश के इस सीमावर्ती जिले में परिवहन नेटवर्क को नई रफ्तार मिले।
स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने वाराणसी को बड़ी सौगात दी है। मंडलीय चिकित्सालय के पुराने 11 भवनों का ध्वस्तीकरण कर 500 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का प्रस्ताव मंजूर हुआ है। इसे चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बताई गई है। इसके साथ ही नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के लिए वाराणसी में 50 एकड़ भूमि देने का भी निर्णय हुआ, जिसे कानून-व्यवस्था और न्यायिक-वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सुरक्षा बलों के आधारभूत ढांचे और खेल व्यवस्था दोनों मोर्चों पर एक साथ बड़ा कदम बढ़ाया है। कानपुर स्थित पीएसी 37वीं वाहिनी परिसर में जर्जर और निष्प्रयोज्य भवनों को ध्वस्त कर उसी भूमि पर 108 टाइप-1 आवास बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है, जिससे जवानों और उनके परिवारों को बेहतर आवासीय सुविधा मिलने की राह खुलेगी। वहीं खेल विभाग में भी भर्ती नीति को नई दिशा दी गई है,अब क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी के खाली पदों में दो-तिहाई पद प्रमोशन से और एक-तिहाई पद अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं से भरे जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से उत्तर प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को सिस्टम के भीतर सीधे जिम्मेदारी और नेतृत्व का अवसर मिलेगा और मैदान के अनुभव का लाभ प्रशासनिक स्तर पर भी नजर आएगा। UP News