पार्टी के अंदरूनी हलकों में यह भी माना जा रहा है कि इन तीन में से कम से कम एक चेहरे को योगी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है और यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में नई गर्माहट साफ महसूस की जा रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सत्ता गलियारों में संकेत हैं कि अगले महीने योगी कैबिनेट में फेरबदल/विस्तार की पटकथा लिखी जा सकती है। जैसे-जैसे यह संभावना मजबूत हो रही है, वैसे-वैसे मंत्री बनने की दौड़ में शामिल दावेदार भी सक्रिय नजर आने लगे हैं भेंट-मुलाकातों से लेकर अपने-अपने समीकरण साधने तक, हर स्तर पर हलचल बढ़ रही है। इस बार चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश बनकर उभरा है, जहां से तीन नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पार्टी के अंदरूनी हलकों में यह भी माना जा रहा है कि इन तीन में से कम से कम एक चेहरे को योगी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है और यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में नई गर्माहट साफ महसूस की जा रही है।
भाजपा उत्तर प्रदेश में 2027 की विधानसभा जंग की तैयारियों को नए साल के साथ और तेज़ धार देने के संकेत दे रही है। संगठन में हालिया फेरबदल के बाद अब सियासी नजरें सरकार के भीतर संतुलन, जवाबदेही और परफॉर्मेंस-आधारित बदलाव की संभावनाओं पर टिक गई हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक संदेश साफ है योगी सरकार की टीम को ऐसा आकार देना है जो प्रदेश के हर बड़े क्षेत्र की नब्ज़ भी पकड़े और चुनावी गणित भी साधे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल को लेकर सियासी हलकों में अंदरखाने हलचल तेज हो गई है। चर्चाओं के मुताबिक, आगामी फेरबदल/विस्तार की तस्वीर बनी तो इस इलाके से मंत्रिमंडल में एक नया चेहरा एंट्री ले सकता है। अभी मंडल और आसपास के क्षेत्रों से गुलाब देवी (माध्यमिक शिक्षा) और बलदेव औलख (कृषि राज्यमंत्री) जैसे चेहरे सरकार में मौजूद हैं, लेकिन भाजपा के भीतर यह महसूस किया जा रहा है कि जमीनी संदेश, क्षेत्रीय संतुलन और नए समीकरणों के लिहाज से गणित दोबारा सेट करने की जरूरत है। यही वजह है कि मुरादाबाद मंडल इस वक्त उत्तर प्रदेश की राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्री चेहरों को लेकर चल रही चर्चाओं में सबसे आगे भूपेंद्र चौधरी का नाम रखा जा रहा है। पार्टी के भीतर यह आकलन है कि उनका राजनीतिक कद और जाट बेल्ट में पकड़ भाजपा के लिए रणनीतिक तौर पर अहम साबित हो सकती है, इसलिए उन्हें दोबारा कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी देने का विकल्प खुला रखा गया है। संदेश साफ माना जा रहा है पश्चिमी यूपी की जाट पट्टी को साधने के साथ संगठन में भरोसे और चुनावी तैयारी को नई धार देना।
इसी बीच, मुरादाबाद के सियासी समीकरणों में आकाश सक्सेना का नाम भी तेजी से उभरकर सामने आया है। दलील यह दी जा रही है कि जिन सीटों पर भाजपा ने कड़े मुकाबले में बढ़त बनाकर अपना आधार मजबूत किया, वहां से उभरते नेतृत्व को आगे लाकर पार्टी अपने वोट-बेस को और स्थायी करना चाहती है—यही वजह है कि आकाश को लेकर चर्चा लगातार गर्म होती जा रही है। तीसरे दावेदार के तौर पर ठाकुर रामवीर सिंह का नाम लिया जा रहा है, जिनकी जीत को पार्टी के भीतर कई मंचों पर “मॉडल परफॉर्मेंस” के रूप में पेश किए जाने की बातें आती रही हैं। चर्चा है कि रिकॉर्ड जीत और क्षेत्रीय संदेश दोनों लिहाज से भाजपा उन्हें सरकार में भूमिका देकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक संकेत और मजबूत कर सकती है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और चर्चा ने हलचल बढ़ा दी है क्या बड़े स्तर पर परिवर्तन की कोई योजना है? इसी कयास ने कई मौजूदा मंत्रियों की बेचैनी बढ़ा दी है, जबकि कई विधायकों की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। पार्टी और सरकार के भीतर यह भी संकेत मिल रहे हैं कि कुछ विभागों के कामकाज को लेकर शिकायतें और फीडबैक शीर्ष स्तर तक पहुंचा है। ऐसे में विस्तार सिर्फ “नई एंट्री” नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस के आधार पर बदलाव की दिशा में भी देखा जा रहा है। गलियारों में एक चर्चा यह भी है कि कैबिनेट समीकरणों को साधने के लिए दलित समाज से जुड़े किसी चेहरे को तीसरे डिप्टी सीएम के तौर पर आगे लाया जा सकता है। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक संकेत नहीं है, लेकिन चुनावी वर्ष की ओर बढ़ रहे उत्तर प्रदेश में ऐसे कयास अक्सर रणनीतिक संकेतों से जोड़कर देखे जाते हैं। UP News