राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होने का अंतिम मौका, पेश होना अनिवार्य

अदालत ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी को 20 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। यह मामला लगभग आठ साल पुराना है और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित विवादित बयान से संबंधित है।

rahul (13)
राहुल गांधी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar19 Jan 2026 06:11 PM
bookmark

UP News : सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने कांग्रेस नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी को मानहानि मामले में अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी को 20 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। यह मामला लगभग आठ साल पुराना है और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित विवादित बयान से संबंधित है। उस बयान को लेकर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।

राहुल गांधी 20 फरवरी को अदालत में पेश होंगे

मामले की सुनवाई के दौरान पहले गवाह रामचंद्र दूबे ने अपना बयान दर्ज कराया था, और अधिवक्ताओं ने उनके बयान की जिरह भी की। राहुल गांधी को पिछले सुनवाई पर उपस्थित होना था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हो सके। उनके वकील ने अदालत को बताया कि राहुल गांधी निश्चित रूप से 20 फरवरी को अदालत में पेश होंगे।

गैर-मौजूदगी पर अंतिम चेतावनी जारी 

हालांकि राहुल गांधी पहले अपना बयान दर्ज कर चुके हैं और फिलहाल जमानत पर हैं, अदालत ने इस मामले में उनकी गैर-मौजूदगी पर अंतिम चेतावनी जारी की है। यह मामला आठ साल पुराना है और इस मामले में राहुल गांधी अपना बयान पहले ही दर्ज करवा चुके हैं। पिछले जिरह में राहुल मौजूद नहीं थे, इसलिए उनकी उपस्थिति को लेकर अदालत ने उन्हें अन्तिम चेतावनी दी है। 

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

उत्तर प्रदेश सरकार के विरूद्ध बड़ा आंदोलन, आर-पार की लड़ाई की घोषणा

पाल समाज की घोषणा के बाद पाल समाज ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बड़ा प्रदर्शन किया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के ऊपर उत्तर प्रदेश पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। लाठीचार्ज के बाद भी आंदोलन शांत नहीं हुआ है।

मणिकर्णिका घाट की गलियों में पाल समाज का प्रदर्शन
मणिकर्णिका घाट की गलियों में पाल समाज का प्रदर्शन
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar19 Jan 2026 05:35 PM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार के विरूद्ध बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। पिछले कुछ सालों में हुए तमाम आंदोलनों में इस आंदोलन को सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पाल समाज ने उत्तर प्रदेश सरकार के विरूद्ध आर-पार की लड़ाई की घोषणा कर दी है। पाल समाज की घोषणा के बाद पाल समाज ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बड़ा प्रदर्शन किया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के ऊपर उत्तर प्रदेश पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। लाठीचार्ज के बाद भी आंदोलन शांत नहीं हुआ है।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शुरू हो गया बड़ा आंदोलन

उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित मणिकर्णिका घाट का विवाद बड़े आंदोलन का कारण बन गया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश के पाल समाज ने अहिल्याबाई होल्कर की क्षतिग्रस्त मूर्ति के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया। घाट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस से तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। समझाने के बावजूद न मानने पर पुलिस ने लाठी भांजकर भीड़ को खदेड़ा और करीब डेढ़ दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया। मणिकर्णिका घाट जाने वाली गली में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब रानी अहिल्याबाई की तस्वीर लेकर कुछ लोग नारेबाजी करने लगे। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। ऐसे में पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और जबरन भीड़ को मौके से हटाना पड़ा। डीसीपी काशी जोन गौरव बंशवाल के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुंभ महादेव मंदिर का वीडियो गलत संदर्भ में वायरल किया जा रहा है, जबकि वह मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है। इस मामले में शनिवार को नामजद प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब संजय सिंह और पप्पू यादव सहित आठ लोगों को तीन दिन के भीतर चौक थाने में पेश होने को कहा गया है। पुलिस उन सभी की पहचान कर रही है जो धार्मिक उन्माद फैलाने वाले पोस्ट कर रहे हैं। इन सबके बीच आज अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को लेकर सोमवार को पाल समाज के लोग मणिकर्णिका की गलियों में एकत्रित हुए. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रशासन ने मूर्ति को खंडित किया है, इसलिए उन्हें वहां फिर से मूर्ति स्थापित करने की अनुमति दी जाए. स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा और कई लोगों को हिरासत में लेकर चौक थाने ले गई. इस दौरान काफी देर तक मणिकर्णिका क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

वाराणसी पुलिस का एक्शन 

वाराणसी पुलिस ने मणिकर्णिका घाट विवाद में एआई जनरेटेड वीडियो और भ्रामक पोस्ट साझा करने के आरोप में राज्यसभा सांसद संजय सिंह और सांसद पप्पू यादव को चौक थाने में बयान दर्ज कराने का नोटिस भेजा है। पुलिस ने कुंभ महादेव मंदिर को खंडित बताने वाली पोस्टों को धार्मिक सद्भाव बिगाडऩे की साजिश करार देते हुए यह कार्रवाई की। इसी बीच, सोमवार को मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति खंडित किए जाने का आरोप लगाकर प्रदर्शन कर रहे पाल समाज के लोगों को पुलिस ने बल प्रयोग कर हटा दिया। पुलिस ने इस दौरान एक दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।

क्या है उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विवाद का कारण?

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास और पुनरुद्धार कार्य विवादों की आग में घिर गया है। सोशल मीडिया पर बुलडोजर से तोडफ़ोड़ की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय निवासियों, पाल समाज और धार्मिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। विपक्षी दल जैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे सनातन धरोहर पर हमला करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है। यह विवाद मुख्य रूप से घाट पर एक प्राचीन चबूतरा और उससे जुड़ी मूर्तियों, खासकर रानी अहिल्याबाई होल्कर से संबंधित प्रतिमाओं के कथित क्षतिग्रस्त होने के आरोपों से जुड़ा है। कुछ लोगों का दावा है कि विकास के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक संरचनाओं और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे घाट का मूल आध्यात्मिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर का यह पुनर्विकास कार्य श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की सफलता के बाद शुरू किया गया है. इसका मुख्य मकसद घाट पर भीड़भाड़ कम करना, श्रद्धालुओं और अंतिम संस्कार करने वालों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, स्वच्छता सुधारना, सीढिय़ां मजबूत करना और मानसून में आने वाली बाढ़ की समस्याओं से निजात दिलाना है. प्रोजेक्ट में मल्टी-लेवल प्लेटफॉर्म, बेहतर एक्सेस, वुड प्लाजा और अन्य आधुनिक सुविधाओं का प्रस्ताव है, ताकि 24म7 जलने वाली चिताओं के बीच भी श्रद्धालुओं को सुविधा मिले। यह काम नगर निगम और संबंधित एजेंसियों की देखरेख में चल रहा है, और इसकी कुल लागत करोड़ों में बताई जा रही है।

कोई भी मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई है

विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से वाराणसी के प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोई भी मंदिर या पूजनीय मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई है। खुदाई के दौरान मिली कलाकृतियां और मूर्तियां संस्कृति विभाग के संरक्षण में हैं, जिन्हें पुनर्निर्माण के बाद उसी स्थान पर या उपयुक्त जगह पर पुन: स्थापित किया जाएगा। कई वायरल तस्वीरों को एआई जनरेटेड या पुरानी/गुमराह करने वाली बताया गया है, जिसके खिलाफ पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं वाराणसी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन किए, फिर प्रोजेक्ट साइट ऑफिस से विकास कार्यों का निरीक्षण किया. सीएम ने कहा कि कुछ तत्व काशी को बदनाम करने और विकास कार्यों में बाधा डालने की साजिश रच रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस पर पुरानी तस्वीरों और फर्जी वीडियो से भ्रम फैलाने का आरोप लगाया, और याद दिलाया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समय भी इसी तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं, लेकिन अब श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई है। UP News



संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, बनेगा टीबी मुक्त प्रदेश

इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है कि होटल तथा रेस्टोरेंट आदि के कर्मचारियों की नियमित रूप से टीबी की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar19 Jan 2026 05:04 PM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला यह है कि उत्तर प्रदेश को जल्दी ही टीबी यानि कि Tuberculosis की बीमारी से मुक्त प्रदेश बना दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त प्रदेश बनाने के लिए एक के बाद एक महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला किया है कि होटल तथा रेस्टोरेंट आदि के कर्मचारियों की नियमित रूप से टीबी की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। इस फैसले को लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त प्रदेश बनाने का फैसला सरकार की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। यह बैठक उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में बड़ा फैसला लिया गया कि उत्तर प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में होटल एवं हास्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारियों की नियमित टीबी जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। साथ ही सरकारी एवं निजी मेडिकल कालेजों के विद्यार्थियों और जिला अस्पतालों व मेडिकल कालेजों में कार्यरत रसोई कर्मचारियों की भी अनिवार्य जांच कराने पर भी सहमति बनी। इससे संक्रमण के किसी भी जोखिम को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित किया जा सकेगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने राज्य एवं जिला टीबी फोरम की प्रत्येक माह बैठकें करने और जिला टीबी फोरम की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए। सचिवालय में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा, जब सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करेंगे। यह केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। निर्देश दिए कि संभावित टीबी रोगियों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए और चिह्नित रोगियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार बिना विलंब के उपलब्ध कराया जाए।

उत्तर प्रदेश में बन चुके हैं 81 मेडिकल कॉलिज

इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार  की तरफ से हेल्थटेक कॉन्क्लेव भी आयोजित किया गया है। रविवार को उत्तर प्रदेश के पहले हेल्थटेक कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वह परिवर्तन किया है, जिसकी कल्पना पहले संभव नहीं थी. साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे. आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल भवन खड़े करना नहीं था, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना था, जिसमें अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी सम्मानजनक व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।

टीबी को हराने में उत्तर प्रदेश सबसे आगे

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। संस्थागत प्रसव अब राष्ट्रीय औसत के समकक्ष पहुंच चुका है। कई जनपद ऐसे हैं, जहां ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है।  उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था। मानसून आते ही इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व कालाजार जैसी बीमारियां विकराल रूप ले लेती थीं। इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी.साल 2017 में सरकार ने इसके खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया। समय पर पहचान, स्थानीय स्तर पर इलाज और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था लागू की गई। मात्र दो वर्षों के भीतर इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया और आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से ज़ीरो डेथ दर्ज की जा रही है. डेंगू, मलेरिया, कालाजार और चिकनगुनिया पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। UP News

संबंधित खबरें