गोरखपुर जिले का एक छोटा सा गांव आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गया है। जंगलों के बीच बसा वनटांगिया गांव तिनकोनिया नंबर तीन अब ऐसा गांव बन चुका है जहां महिलाएं खुद ही घर-घर जाकर पानी की गुणवत्ता की जांच करती हैं। यह पहल जलसखी समूह के माध्यम से शुरू की गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का एक छोटा सा गांव आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गया है। जंगलों के बीच बसा वनटांगिया गांव तिनकोनिया नंबर तीन अब ऐसा गांव बन चुका है जहां महिलाएं खुद ही घर-घर जाकर पानी की गुणवत्ता की जांच करती हैं। यह पहल जलसखी समूह के माध्यम से शुरू की गई है। इस अनोखी व्यवस्था के कारण यह गांव उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा गांव बन गया है जहां महिलाएं वैज्ञानिक किट से पीने के पानी की जांच कर रही हैं।
आज जिस गांव की चर्चा हो रही है, कुछ साल पहले उसकी स्थिति बिल्कुल अलग थी। जंगलों के बीच बसे इस गांव के लोगों के पास न बेहतर शिक्षा थी और न ही रोजगार के ज्यादा साधन। अधिकतर लोग मजदूरी या पत्तल बनाने जैसे पारंपरिक कामों पर निर्भर थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां तेजी से बदलाव आया है। गांव में सड़क, स्कूल, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य जैसी कई सुविधाएं पहुंची हैं। अब गांव के स्कूल में स्मार्ट क्लास की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां बच्चे आधुनिक तरीके से पढ़ाई कर रहे हैं।
गांव में महिलाओं का एक विशेष समूह बनाया गया है, जिसे जलसखी समूह कहा जाता है। इस समूह में ज्योति, नीतू, हिना, उर्मिला और मानसी सहित कई महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं सप्ताह में एक बार हर घर में जाकर पानी की जांच करती हैं। इसके लिए उनके पास विशेष टेस्ट किट होती है, जिससे वे पानी में मौजूद क्लोराइड, आर्सेनिक, पीएच सहित करीब 11 प्रकार के तत्वों की जांच करती हैं। अब तक की जांच में गांव के सभी घरों में पानी सुरक्षित पाया गया है। जांच की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भी भेजी जाती है।
गांव की इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। 11 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में द्रौपदी मुर्मू ने जलसखी समूह की सदस्य ज्योति को सम्मानित किया। यह सम्मान गांव की महिलाओं द्वारा पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और समाज में जागरूकता फैलाने के प्रयासों के लिए दिया गया।
गांव में बनी बड़ी पानी की टंकी के माध्यम से 26 दिसंबर 2025 से हर घर तक शुद्ध पानी की आपूर्ति शुरू हो चुकी है। अब ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए अलग से संघर्ष नहीं करना पड़ता। ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांव में पक्के मकान भी बहुत कम थे और जलभराव की समस्या रहती थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
गांव में शिक्षा का स्तर भी तेजी से सुधरा है। पहले जहां साक्षरता दर बहुत कम थी, वहीं अब बच्चे बड़े सपने देख रहे हैं। किसी का सपना शिक्षक बनने का है तो कोई पुलिस अधिकारी बनना चाहता है। गांव की छात्रा ममता गोंड बताती हैं कि वह बीए की पढ़ाई कर रही हैं और उनका लक्ष्य दरोगा बनना है। वहीं स्कूल की छात्रा शशि टीचर बनकर गांव के बच्चों को पढ़ाना चाहती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाओं और प्रशासन की पहल से गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब यहां सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। महिलाएं पशुपालन और सब्जी की खेती जैसे कार्यों से अपनी आय भी बढ़ा रही हैं। यही वजह है कि कभी पहचान के लिए तरसने वाला यह गांव अब पूरे प्रदेश के लिए सशक्त महिला नेतृत्व और जल प्रबंधन का मॉडल बन गया है।