2022 में सपा के दारा सिंह चौहान ने चुनाव जीतने के बाद बीजेपी का दामन थाम लिया। इससे सीट खाली हुई और उपचुनाव हुआ। 2023 में सपा के सुधाकर सिंह ने चुनाव जीतकर सीट को सपा के खाते में रखा। अब उनके निधन के बाद फिर से उपचुनाव हो रहा है।

UP News : मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट में उपचुनाव का ऐलान हो गया है। इसका मुख्य कारण है सपा विधायक सुधाकर सिंह का निधन, जिनकी उम्र 67 साल थी। सुधाकर सिंह 2023 के उपचुनाव में जीत हासिल कर विधायक बने थे। दिलचस्प बात यह है कि घोसी सीट पिछले पांच साल में दो बार उपचुनाव का गवाह बन चुकी है। 2022 में सपा के दारा सिंह चौहान ने चुनाव जीतने के बाद बीजेपी का दामन थाम लिया। इससे सीट खाली हुई और उपचुनाव हुआ। 2023 में सपा के सुधाकर सिंह ने चुनाव जीतकर सीट को सपा के खाते में रखा। अब उनके निधन के बाद फिर से उपचुनाव हो रहा है। इस तरह, पांच साल के भीतर घोसी में दो-दो बार उपचुनाव होने की अनोखी स्थिति बन गई है।
यह उपचुनाव यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक तापमान नापने का एक अहम परीक्षण है। घोसी के नतीजे संकेत देंगे कि प्रदेश में सत्ता पक्ष और विपक्ष किस स्थिति में हैं। बीजेपी और सपा दोनों इसे जीतने के लिए पूरी रणनीति के साथ उतरेंगे। विशेष रूप से यह सीट यह भी बताएगी कि सहानुभूति लहर कितना असर डाल सकती है और स्थानीय वोटर ब्लॉकों की ताकत किस हद तक निर्णायक होगी।
सुधाकर सिंह के निधन के बाद सपा का फोकस परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाना माना जा रहा है। संभावित उम्मीदवार सुजीत सिंह (सुधाकर सिंह का छोटा बेटा), जो पहले दो बार ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने परिवार से मिलने जाकर संवेदना जताई, जिससे यह संकेत मिलता है कि सपा परिवार को प्राथमिकता दे सकती है। सपा के लिए यह सीट महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछली बार यहां से जीत हासिल कर पार्टी ने उपचुनाव में ताकत दिखाई थी।
बीजेपी के लिए घोसी सीट चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। 2023 में दारा सिंह चौहान को हार मिली थी, और अब वह एमएलसी बन चुके हैं, इसलिए उनकी उम्मीदवारी लगभग असंभव है। चर्चा में है कि बीजेपी पूर्व विधायक विजय राजभर को मैदान में उतार सकती है।
घोसी में राजभर वोटर ब्लॉक अहम है, और विजय राजभर के चुनावी अनुभव को बीजेपी फायदेमंद मान रही है। बीजेपी इस सीट को जीतकर सपा पक्ष के प्रभाव को चुनौती देना चाहती है और आगामी विधानसभा चुनावों की राह आसान बनाना चाहती है। दोनों दलों की पूरी ताकत इस छोटे लेकिन अहम विधानसभा क्षेत्र में झोंकी जाएगी। घोसी सीट पर नतीजे यह भी बताएंगे कि मऊ जिले में स्थानीय वोटर किस दल के साथ ज्यादा जुड़े हैं, और यह संकेत मिलेगा कि 2027 के लिए राजनीतिक समीकरण किस दिशा में बदल रहे हैं।