‘ओवैसी-ओवैसी’ बंद करो! अखिलेश अपने दम पर काफी हैं - शिवपाल यादव

इसी टिप्पणी के बाद यूपी की राजनीति में यह चर्चा तेज हुई कि क्या सपा, चुनावी गणित के लिहाज से AIMIM जैसे दलों के साथ नए समीकरण तलाश रही है खासकर तब, जब अतीत में सपा कई बार ओवैसी की पार्टी को वोट-कटवा कहकर निशाने पर लेती रही है।

शिवपाल सिंह यादव
शिवपाल सिंह यादव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 12:48 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच समाजवादी पार्टी ने AIMIM के साथ संभावित गठबंधन की अटकलों पर सख्त रुख अपनाया है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने साफ शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव को असदुद्दीन ओवैसी की जरूरत नहीं है और समाजवादी पार्टी को AIMIM से किसी तरह के गठबंधन की आवश्यकता नहीं। शिवपाल ने स्पष्ट किया कि 2027 को लेकर AIMIM से न तो कोई बातचीत हुई है, न ही कोई प्रस्ताव सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तैर रही अफवाहों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि सपा यूपी की जमीन पर अपनी संगठनात्मक पकड़ और जनता के भरोसे चुनाव लड़ती है। उनका दावा है कि पार्टी पहले भी जनसमर्थन के दम पर सत्ता तक पहुंची है और इस बार भी उत्तर प्रदेश की जनता के साथ अपने बलबूते मैदान में उतरकर सरकार बनाने का माद्दा रखती है।

सांसद के बयान से उड़ी थीं चर्चाओं की धूल

दरअसल, हाल में सपा ने आगामी चुनावी रणनीति को लेकर उत्तर प्रदेश के मोर्चे पर अपने सांसदों के साथ बैठक की थी। बैठक के बाद सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर से जब मीडिया ने ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना पर सवाल किया, तो उन्होंने सीधे किसी दल का नाम लिए बिना यह संकेत दिया कि भाजपा को हराने के लिए जो भी साथ आना चाहे, उसका स्वागत है। इसी टिप्पणी के बाद यूपी की राजनीति में यह चर्चा तेज हुई कि क्या सपा, चुनावी गणित के लिहाज से AIMIM जैसे दलों के साथ नए समीकरण तलाश रही है खासकर तब, जब अतीत में सपा कई बार ओवैसी की पार्टी को वोट-कटवा कहकर निशाने पर लेती रही है।

2027 की तैयारियों में UP बना केंद्र

शिवपाल के ताजा बयान को उत्तर प्रदेश में सपा की चुनावी लाइन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि पार्टी अपने मुख्य सामाजिक गठजोड़ को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहती है। पार्टी के भीतर 2027 को लेकर रणनीतिक मंथन जारी है और अखिलेश यादव की ओर से PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और धार देने की कवायद भी तेज बताई जा रही है। हालांकि, गठबंधन को लेकर चर्चाएं समय-समय पर उठती रही हैं, लेकिन शिवपाल यादव के इस बयान के बाद यूपी में AIMIM के साथ संभावित तालमेल की बातें फिलहाल ठंडी पड़ती दिख रही हैं। शिवपाल यादव ने दो टूक कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा किसी भ्रम या अफवाह के सहारे नहीं, बल्कि संगठन और जनाधार के दम पर चुनाव लड़ेगी। उनके मुताबिक पार्टी का लक्ष्य स्पष्ट है 2027 में यूपी की सत्ता के लिए मजबूत दावेदारी और इसी दिशा में पार्टी जमीन पर काम कर रही है। UP News

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आचार संहिता केस में अब्बास की बढ़ी टेंशन, कोर्ट ने तय किए आरोप

अब्बास अंसारी के अधिवक्ता दरोगा सिंह के अनुसार, कोर्ट ने मुकदमे में लगी तीन धाराओं में से दो को हटाया है। हालांकि धारा 133 के तहत आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप तय कर दिए गए हैं। अब अगली सुनवाई में साक्ष्य के आधार पर केस की दिशा तय होगी।

अब्बास अंसारी
अब्बास अंसारी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 11:00 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े एक चर्चित मामले में मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2022 के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामले में बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत ने अब्बास अंसारी समेत पांच आरोपियों पर आरोप तय कर दिए है। अब यह केस औपचारिक बहस से आगे निकलकर साक्ष्य और गवाही के चरण में प्रवेश कर रहा है। कोर्ट ने अगली कार्यवाही के लिए 4 फरवरी की तारीख मुकर्रर की है।

कोर्ट के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा

अब्बास अंसारी की पेशी को लेकर न्यायालय परिसर को छावनी जैसी सुरक्षा में तब्दील कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में चुनावी मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी, मुख्य द्वार पर गहन तलाशी और जांच के बाद ही लोगों को भीतर जाने की अनुमति मिली। परिसर के भीतर और बाहर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई, ताकि किसी भी तरह की हलचल या अप्रिय स्थिति पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके।

क्या है मामला?

यह केस 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के वक्त का है। आरोप है कि प्रचार के दौरान अब्बास अंसारी निर्धारित सीमा से अधिक वाहनों के काफिले के साथ निकले थे, जो आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आता है। इस संबंध में 12 फरवरी 2022 को दक्षिणटोला थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। चुनाव आयोग की शिकायत के आधार पर तत्कालीन थानाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह ने अब्बास अंसारी, शाहिद लारी, साकिब लारी, इसराइल अंसारी और रमेश राम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बुधवार को इसी केस में सभी आरोपी अदालत में पेश हुए। अब्बास अंसारी के अधिवक्ता दरोगा सिंह के अनुसार, कोर्ट ने मुकदमे में लगी तीन धाराओं में से दो को हटाया है। हालांकि धारा 133 के तहत आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोप तय कर दिए गए हैं। अब अगली सुनवाई में साक्ष्य के आधार पर केस की दिशा तय होगी। पेशी के दौरान विधायक अब्बास अंसारी ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इंकार किया। उन्होंने संक्षेप में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

सुप्रीम कोर्ट से गैंगस्टर एक्ट केस में मिली थी राहत

इस बीच, कानूनी मोर्चे पर एक राहत की भी चर्चा रही। इससे पहले 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एवं समाज-विरोधी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज एक मामले में अब्बास अंसारी की पूर्ण जमानत याचिका मंजूर की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एम. पांचोली की पीठ ने सुनवाई में यह भी माना था कि वे लंबे समय से अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और अब तक जमानत की शर्तों के दुरुपयोग का कोई आरोप सामने नहीं आया है। UP News

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"मुस्लिम अलग हुआ तो अखिलेश...” ब्रजेश पाठक का सपा पर तीखा प्रहार

इसके उलट उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों पर परिवारवाद का आरोप लगाया और तंज कसते हुए कहा कि ये दल अब प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 10:38 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ ही सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। बागपत दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि भाजपा ही ऐसी पार्टी है जो लोकतांत्रिक परंपरा और संगठनात्मक अनुशासन के साथ आगे बढ़ती है, जबकि कई दल परिवारवाद के दायरे से बाहर नहीं निकल पाए हैं। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि अगर मुस्लिम समाज का साथ सपा से छूट जाए, तो पार्टी की राजनीतिक जमीन इतनी खिसक जाएगी कि वह ग्राम प्रधानी तक जीतने की स्थिति में नहीं रहेगी। पाठक ने संकेतों में कहा कि सपा का जनाधार व्यापक जनसमर्थन से ज्यादा एक तय सियासी समीकरण पर टिका है, और यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी है।

“भाजपा में कार्यकर्ता भी अध्यक्ष बन सकता है”- पाठक

ब्रजेश पाठक ने मंच से कहा कि भाजपा में संगठनात्मक ढांचा ऐसा है कि सबसे पीछे बैठा कार्यकर्ता भी मेहनत के दम पर अध्यक्ष तक बन सकता है। इसके उलट उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों पर परिवारवाद का आरोप लगाया और तंज कसते हुए कहा कि ये दल अब प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चल रहे हैं।

कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि नेतृत्व एक परिवार के इर्द-गिर्द ही घूमता है और आगे भी वही सिलसिला चलता रहेगा। 

सपा शासनकाल पर कानून-व्यवस्था को लेकर आरोप

सपा पर तीखे हमले को आगे बढ़ाते हुए डिप्टी सीएम ने दावा किया कि सपा के शासनकाल में बागपत-बड़ौत क्षेत्र में अपराध, कब्जे और दबंगई की घटनाएं बढ़ीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में हथियारों का प्रदर्शन आम बात थी, माहौल तनावपूर्ण रहता था और बेटियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर गंभीर लापरवाही होती थी। डिप्टी सीएम ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है। UP News

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