वाराणसी के नमो घाट पर प्रस्तावित एयर शो को लेकर CM योगी ने उच्चस्तरीय समीक्षा की। 30 लाख दर्शकों की संभावना, सेक्टरवार पुलिस-मजिस्ट्रेट, ट्रैफिक, पार्किंग और सुरक्षा की विशेष तैयारी।

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी अब भारतीय वायुसेना के शौर्य, सामरिक क्षमता और आधुनिक शक्ति की भव्य झलक देखने के लिए तैयार हो रही है। गंगा के पावन तट पर स्थित नमो घाट पर 24 से 26 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तावित भव्य एयर शो को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रख रहे हैं। शनिवार को लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इतने बड़े आयोजन के दौरान किसी भी स्तर पर अव्यवस्था की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
नमो घाट से गंगा के ऊपर होने वाला यह एयर शो भारतीय वायुसेना की क्षमता, साहस, अनुशासन और तकनीकी दक्षता को प्रदर्शित करेगा। काशी की सनातन सांस्कृतिक विरासत और भारतीय वायुसेना की सामरिक शक्ति का यह संगम देश-दुनिया के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। 25 अक्टूबर को प्रस्तावित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति संभावित बताई जा रही है। हालांकि उनकी मौजूदगी को लेकर अभी अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम की प्रतीक्षा है।
एयर शो को लेकर काशी और आसपास के जिलों में जबरदस्त उत्साह है। प्रशासन को अनुमान है कि आयोजन के दौरान करीब 30 लाख लोग विभिन्न स्थानों से वायुसेना के हवाई करतब देखने के लिए पहुंच सकते हैं। गंगा के दोनों तटों के अलावा नदी के पार खुले मैदानों और प्रमुख घाटों से भी लोगों के शो देखने की संभावना है। इसी वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीड़ प्रबंधन को एयर शो की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि आयोजन क्षेत्र को अलग-अलग जोन और सेक्टर में बांटकर सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की जाए। प्रत्येक सेक्टर में मजिस्ट्रेट के साथ प्रशिक्षित पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। प्रवेश और निकास मार्गों, सुरक्षा जांच केंद्रों, दर्शक दीर्घाओं, ग्रैंड स्टैंड, वीआईपी एवं वीवीआईपी क्षेत्र और मीडिया एरिया की व्यवस्था को भी व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए हैं।
एयर शो केवल नमो घाट तक सीमित नहीं रहेगा। गंगा के किनारे स्थित अन्य प्रमुख घाटों और आसपास के क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए जल मार्ग और थल मार्ग, दोनों से आने-जाने वाले लोगों के लिए अलग-अलग व्यवस्था तैयार की जा रही है। घाटों पर भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग, पैदल आवागमन, पार्किंग और आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत योजना के तहत संचालित किया जाएगा। प्रशासन गंगा के दूसरे किनारे से भी शो देखने पहुंचने वाले लोगों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दे रहा है।
नमो घाट पर आयोजन को लेकर बुनियादी सुविधाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार नमो घाट फेज-3 में बने हेलिपैड तक सीधे पहुंचने के लिए दो नए पक्के रास्तों का निर्माण किया जा रहा है। 25 अक्टूबर के मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित करीब 5,600 विशिष्ट अतिथियों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रवेश और आवागमन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
एयर शो का असर वाराणसी के हवाई यातायात पर भी पड़ने की संभावना है। तैयारियों के तहत बाबतपुर एयरपोर्ट के आसपास निर्धारित अवधि में नो-फ्लाई जोन लागू करने की योजना सामने आई है। इसके चलते वाराणसी आने-जाने वाली कुछ नियमित उड़ानों के समय में बदलाव या री-शेड्यूलिंग की जा सकती है। यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट का अपडेट लेने की सलाह दी गई है।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद वाराणसी के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी तैयारियों को जमीन पर परखना शुरू कर दिया है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रमुख घाटों तथा गंगा पार के संभावित दर्शक क्षेत्रों का निरीक्षण किया है। पड़ाव चौराहा, रामनगर बाईपास, टेंगरा मोड़, डोमरी गंगा घाट और कोदोपुर घाट सहित महत्वपूर्ण स्थानों पर यातायात और पार्किंग व्यवस्था को लेकर मंथन किया जा रहा है।
30 लाख तक लोगों की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यातायात और पार्किंग व्यवस्था की है। इसके लिए गंगा किनारे और प्रमुख संपर्क मार्गों पर पार्किंग स्थलों की पहचान की जा रही है। दर्शकों के लिए प्रवेश और निकास मार्ग अलग रखने, पैदल आवागमन को सुगम बनाने तथा भीड़ के दबाव वाले स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाने की योजना है। आवश्यकता पड़ने पर यातायात डायवर्जन भी लागू किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आम दर्शकों की मूलभूत सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाए।
हर प्रमुख क्षेत्र में:
मुख्यमंत्री ने संभावित आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मॉकड्रिल कराने के निर्देश भी दिए हैं। इसका उद्देश्य पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन दल, जल पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को वास्तविक स्थिति से पहले परखना है। किसी भी आपात स्थिति में सभी टीमें तत्काल और समन्वित तरीके से कार्रवाई कर सकें, इसके लिए जिम्मेदारियां पहले से तय की जाएंगी।
एयर शो में केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने वाराणसी मंडल के सभी जिलाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। आसपास के जिलों से आने वाले वाहनों, यात्रियों और दर्शकों के लिए यातायात तथा पार्किंग व्यवस्था का समन्वय पहले से किया जाएगा।
एयर शो को केवल हवाई करतब तक सीमित रखने के बजाय भारतीय वायुसेना की गौरवगाथा से जोड़ने की तैयारी भी सामने आई है। पूर्व में सामने आई आयोजन संबंधी जानकारी के अनुसार 25 अक्टूबर को 1965 और 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल संघर्ष के ऑपरेशन सफेद सागर तक भारतीय वायुसेना के सफर की झलक भी प्रदर्शित किए जाने की तैयारी है। इससे यह आयोजन युवाओं के बीच देश की रक्षा क्षमता और भारतीय वायुसेना की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला कार्यक्रम भी बन सकता है।
गंगा के तट पर उड़ान भरते लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और अन्य एयर डिस्प्ले भारतीय वायुसेना के शौर्य का प्रदर्शन करेंगे तो दूसरी ओर काशी के घाट इस ऐतिहासिक आयोजन की पृष्ठभूमि बनेंगे। इससे वाराणसी में पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए यह आयोजन काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान के साथ भारत की आधुनिक सामरिक क्षमता को देखने का अनूठा अवसर होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया है कि एयर शो की भव्यता के साथ-साथ सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात, पार्किंग, स्वास्थ्य, स्वच्छता और आपातकालीन व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। भारतीय वायुसेना, वाराणसी जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। अब काशी उस ऐतिहासिक क्षण की ओर बढ़ रही है, जब गंगा की लहरों के ऊपर भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना सुनाई देगी और नमो घाट से लेकर काशी के घाटों तक देश के सामरिक शौर्य और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम दिखाई देगा।
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