बरेली में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर पायल रानी हैं, जिन्होंने अपने पति गुलशन और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर पति गुलशन का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक साथ रहकर, संघर्ष करते हुए अपनी पत्नी को पढ़ाया-लिखाया और पुलिस विभाग तक पहुँचाया।

UP News : उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सामने आया यह मामला न केवल कानूनी रूप से गंभीर है, बल्कि सामाजिक रूप से भी कई सवाल खड़े करता है। एक ओर बरेली में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर पायल रानी हैं, जिन्होंने अपने पति गुलशन और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर पति गुलशन का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक साथ रहकर, संघर्ष करते हुए अपनी पत्नी को पढ़ाया-लिखाया और पुलिस विभाग तक पहुँचाया, लेकिन अब उन्हीं पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
महिला दरोगा पायल रानी ने पुलिस अधीक्षक हापुड़ को दी गई शिकायत में कहा है कि उनकी शादी 2 दिसंबर 2022 को गुलशन के साथ हुई थी। उनका आरोप है कि शादी के समय मायके की ओर से दहेज दिया गया, लेकिन इसके बावजूद ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे।
पायल रानी के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद ही उनसे 10 लाख रुपये नकद और एक कार की मांग की जाने लगी। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो कथित तौर पर मानसिक दबाव, मारपीट और अपमान का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और तेजाब फेंकने जैसी डरावनी धमकियाँ भी मिलीं। इन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी सुरक्षा को खतरे में बताते हुए कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर नगर कोतवाली में पति समेत छह ससुरालजनों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और धमकी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
वहीं पति गुलशन ने पत्नी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वे और पायल रानी वर्ष 2016 से एक-दूसरे को जानते थे और उनके बीच प्रेम संबंध था। दोनों ने साथ पढ़ाई की और 2021 में आपसी सहमति से कोर्ट मैरिज की। गुलशन के अनुसार, परिवार की सहमति से 2022 में सामाजिक रीति-रिवाज से शादी हुई, जिसमें किसी भी प्रकार का दहेज नहीं लिया गया। उनका दावा है कि शादी के बाद पायल रानी उनके साथ ही रहीं और उन्होंने अपनी कमाई से उनकी पढ़ाई, तैयारी और हर तरह का सहयोग किया, जिससे वे सब-इंस्पेक्टर बन सकीं। गुलशन का आरोप है कि नौकरी लगने के बाद रिश्तों में दूरी आई और अब उन्हें व उनके परिवार को झूठे दहेज केस में फंसाया जा रहा है। इसी को लेकर उन्होंने एसपी हापुड़ से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भारतीय कानून में दहेज उत्पीड़न एक गंभीर अपराध है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून बेहद सख्त हैं। लेकिन साथ ही उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय यह भी कह चुके हैं कि इन कानूनों का दुरुपयोग भी कुछ मामलों में सामने आया है। इसलिए हर केस में तथ्यों, साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।
इस मामले में सच्चाई इन बिंदुओं पर निर्भर करेगी:
* शादी और कोर्ट मैरिज से जुड़े दस्तावेज
* दहेज मांग से संबंधित कोई लिखित या डिजिटल सबूत
* मारपीट या उत्पीड़न की मेडिकल रिपोर्ट
* दोनों पक्षों के कॉल रिकॉर्ड, चैट और गवाह
* यह भी कि विवाद कब और किन परिस्थितियों में शुरू हुआ
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मामले में कौन सही है और कौन गलत। न तो केवल आरोप के आधार पर पति को दोषी ठहराया जा सकता है और न ही बिना जांच पत्नी के बयान को झूठा कहा जा सकता है। सच वही होगा जो निष्पक्ष पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद सामने आएगा। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि रिश्तों में जब भरोसा टूटता है, तो कानूनी लड़ाई सामाजिक बहस का रूप ले लेती है।