चित्रकूट में पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्ता के पुत्र विदुप अग्रहरि भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए। व्यापारियों के सम्मान की अनदेखी का आरोप लगाया। मऊ-मानिकपुर सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज। पढ़े पूरी खबर

UP News:उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच व्यापारी नेता और पूर्व सांसद एवं महापौर श्यामाचरण गुप्ता के पुत्र विदुप अग्रहरि ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया है। लखनऊ में सपा प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उनके इस फैसले के बाद चित्रकूट की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। खासतौर पर मऊ-मानिकपुर विधानसभा सीट से उनके चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विदुप अग्रहरि ने भाजपा छोड़ने की वजह व्यापारियों के सम्मान की अनदेखी को बताया है। उनका कहना है कि भाजपा में व्यापारियों को उचित सम्मान नहीं मिल रहा था। इसी कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। सपा में शामिल होने को उन्होंने घर वापसी बताया है। हालांकि, उनके इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियों और स्थानीय स्तर पर पार्टी से नाराजगी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। UP News
विदुप अग्रहरि के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद उनके पिता और पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्ता की राजनीतिक विरासत एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। श्यामाचरण गुप्ता का चित्रकूट जिले से पुराना नाता रहा है। वह मूल रूप से मानिकपुर क्षेत्र के ऊंचाडीह गांव के निवासी थे। उनका जन्म 9 फरवरी 1945 को हुआ था। श्यामाचरण गुप्ता ने अपने कारोबारी जीवन की शुरुआत मानिकपुर क्षेत्र के जंगलों में मिलने वाले तेंदूपत्ते से बीड़ी बनाने के व्यवसाय से की थी। धीरे-धीरे उनका कारोबार उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश तक फैल गया। वर्ष 1973 में उन्होंने श्याम समूह की स्थापना की और व्यापार जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। व्यापार में सफलता के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उनका राजनीतिक सफर संजय विचार मंच से शुरू हुआ। वर्ष 1984 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश करते हुए तत्कालीन बांदा जिले की कर्वी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने प्रयागराज की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाई। UP News

श्यामाचरण गुप्ता ने वर्ष 1989 में भाजपा के टिकट पर इलाहाबाद नगर निगम के महापौर का चुनाव जीतकर राजनीतिक सफलता हासिल की। वर्ष 1991 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। वर्ष 1995 में उनकी पत्नी जमुनोत्री गुप्ता भी भाजपा के टिकट पर इलाहाबाद की महापौर बनीं। भाजपा से मतभेद के बाद श्यामाचरण गुप्ता ने वर्ष 2004 में पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। सपा के टिकट पर उन्होंने बांदा-चित्रकूट लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर पहली बार संसद पहुंचे। वर्ष 2009 में उन्होंने फूलपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा में वापसी की। भाजपा ने उन्हें इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने चुनाव जीतकर लोकसभा में जगह बनाई। इस चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रेवती रमण सिंह को पराजित किया। UP News
विदुप अग्रहरि के सपा में शामिल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी उन्हें मऊ-मानिकपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारेगी? चित्रकूट से उनके परिवार का पुराना जुड़ाव, पिता श्यामाचरण गुप्ता की राजनीतिक पहचान और व्यापारिक समुदाय में उनकी सक्रियता को इन चर्चाओं की प्रमुख वजह माना जा रहा है। मऊ-मानिकपुर क्षेत्र में उनके परिवार की राजनीतिक विरासत को देखते हुए उनके संभावित चुनाव लड़ने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, विदुप अग्रहरि ने अभी तक इस सीट से चुनाव लड़ने के संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से भी उनकी उम्मीदवारी का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। ऐसे में फिलहाल उनके सपा में शामिल होने को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। मऊ-मानिकपुर सीट पर उनकी भूमिका क्या होगी और समाजवादी पार्टी उन्हें चुनावी मैदान में उतारेगी या नहीं, इसका फैसला आने वाले समय में पार्टी के रुख और राजनीतिक परिस्थितियों से स्पष्ट होगा। UP News
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