गीतकार एवं कवि विनोद भृंग को साहित्य के क्षेत्र में दीर्घकालिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘गायत्री सम्मान’ से नवाजा गया। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर स्थित रेणुकाजी तीर्थ में ऋषि पंचमी के अवसर पर गायत्री मंदिर के 42वें स्थापना दिवस समारोह में संत-महापुरुषों की मौजूदगी के बीच उन्हें सम्मानित किया गया।

UP News : साहित्य की दुनिया में लंबे समय से अपनी रचनात्मक साधना से सक्रिय गीतकार एवं कवि विनोद भृंग को उनकी दीर्घकालिक साहित्य सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित ‘गायत्री सम्मान’ से सम्मानित किया गया। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले स्थित प्रसिद्ध रेणुकाजी तीर्थ में ऋषि पंचमी के अवसर पर आयोजित गायत्री मंदिर के 42वें स्थापना दिवस समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। विनोद भृंग उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की अग्रणी साहित्यिक संस्था ‘समन्वय’ के उपाध्यक्ष भी हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान गायत्री आश्रम के संचालक महामंडलेश्वर परमहंस ब्रह्मर्षि स्वामी दयानंद भारती जी महाराज ने अनेक संत-महापुरुषों की दिव्य उपस्थिति में प्रदान किया। UP News
‘गायत्री सम्मान’ समारोह के दौरान कवि विनोद भृंग को मणिमुक्त माला, शॉल, सम्मानपत्र और ट्रॉफी भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह का गरिमामय संचालन श्री राजेश वशिष्ठ ने किया। समारोह में साहित्य, अध्यात्म और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर साहित्य साधना को समाज में सकारात्मक चेतना और संस्कारों के प्रसार का माध्यम बताते हुए साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित किया गया। UP News
गीतकार विनोद भृंग की साहित्यिक यात्रा लंबे समय से जारी है। उनके रचनात्मक खाते में विभिन्न विधाओं की कई प्रकाशित कृतियां दर्ज हैं। इनमें ‘जय रघुनंदन जय सियाराम’ (अध्यात्म-काव्य), ‘जादूगर बादल’** (बाल कविता-संग्रह), उड़ान जारी है’ (कविता-संग्रह) और ‘गंध तुम्हारी छंद तुम्हारे’ (सहारनपुर की काव्य-यात्रा) प्रमुख हैं। इन कृतियों के माध्यम से उन्होंने अध्यात्म, बाल साहित्य, कविता और स्थानीय साहित्यिक परंपरा जैसे विभिन्न विषयों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति दी है। साहित्यिक क्षेत्र में उनकी रचनाओं को पाठकों और साहित्य-जगत की ओर से सराहना मिलती रही है। UP News
विनोद भृंग को साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रियता और सेवाओं के लिए देश की विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया जा चुका है। ‘गायत्री सम्मान’ को उनकी इसी दीर्घकालिक साहित्य साधना की एक और महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। रेणुकाजी तीर्थ में मिले इस सम्मान के बाद सहारनपुर के साहित्यिक जगत से जुड़े लोगों ने भी विनोद भृंग को बधाई दी और उनके निरंतर साहित्यिक योगदान की सराहना की। UP News
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