उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के क्रिकेटर विप्रज निगम एशियन गेम्स में भारतीय टीम की स्वर्ण पदक जीत के बाद चर्चा में हैं। वह 15 सदस्यीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन उन्हें टूर्नामेंट में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला।

UP News : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के क्रिकेटर विप्रज निगम इन दिनों एक दिलचस्प वजह से चर्चा में हैं। भारतीय क्रिकेट टीम की जिस 15 सदस्यीय टीम ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता, विप्रज भी उसका हिस्सा थे। खास बात यह है कि उन्हें टूर्नामेंट में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन टीम के आधिकारिक सदस्य होने के कारण वह भी स्वर्ण पदक विजेता माने जाते हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार की पुरस्कार नीति के तहत उन्हें 3 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, पुरस्कार और सरकारी नौकरी को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी नियमों और आधिकारिक घोषणा से स्पष्ट होगी।
एशियन गेम्स में भारतीय क्रिकेट टीम की जीत के साथ बाराबंकी के विप्रज निगम का नाम भी स्वर्ण पदक विजेताओं में शामिल हुआ। वह भारतीय टीम की 15 सदस्यीय टीम का हिस्सा थे, लेकिन उन्हें किसी मैच में मैदान पर उतरने का अवसर नहीं मिला। इसके बावजूद टीम के आधिकारिक सदस्य के रूप में उनकी पदक विजेता की पहचान बनी। टीम स्पर्धाओं में खिलाड़ियों की पात्रता केवल इस बात से तय नहीं होती कि उन्होंने फाइनल या किसी अन्य मैच में खेला था या नहीं। आधिकारिक टीम में उनकी सदस्यता और संबंधित प्रतियोगिता के नियम भी अहम होते हैं।
दी गई जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार की खेल पुरस्कार नीति के तहत एशियन गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग पुरस्कार राशि निर्धारित है।
स्वर्ण पदक: 3 करोड़ रुपये
रजत पदक: 1.5 करोड़ रुपये
कांस्य पदक: 75 लाख रुपये
इसी नीति के आधार पर विप्रज निगम को स्वर्ण पदक के लिए 3 करोड़ रुपये मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, उनके मामले में पुरस्कार की वास्तविक पात्रता और भुगतान की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेश से होना जरूरी है।
पदक विजेता खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार के अलावा सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था भी चर्चा में है। दी गई जानकारी के अनुसार, पात्र खिलाड़ियों को राजपत्रित अधिकारी के पद पर नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। कई खिलाड़ियों को पुलिस विभाग में डीएसपी जैसे पदों पर नियुक्त किया जाता है। विप्रज निगम को किस पद पर नौकरी मिल सकती है या उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया क्या होगी, यह लागू नियमों और सरकार के आधिकारिक निर्णय पर निर्भर करेगा। UP News :
गाजीपुर के हॉकी खिलाड़ी राजकुमार पाल का उदाहरण भी इसी संदर्भ में सामने आया है। बताया गया है कि भारतीय हॉकी टीम की स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में शामिल होने के बावजूद वह सेमीफाइनल और फाइनल में नहीं खेले थे। यदि वह संबंधित प्रतियोगिता के आधिकारिक पदक विजेता दल के सदस्य हैं और पुरस्कार नीति की शर्तें पूरी करते हैं, तो वह भी प्रोत्साहन राशि के पात्र हो सकते हैं।
दी गई जानकारी के मुताबिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को कुल 28 करोड़ 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस राशि में शामिल खिलाड़ियों और उनके पदकों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने आने पर ही इसकी पूरी पुष्टि हो सकेगी। विप्रज निगम का मामला टीम स्पर्धाओं में पदक और पुरस्कार की पात्रता को लेकर खास है। इससे स्पष्ट होता है कि किसी टीम की जीत में आधिकारिक रूप से शामिल खिलाड़ियों को मिलने वाला सम्मान केवल मैदान पर खेलने तक सीमित नहीं होता। अंतिम पुरस्कार संबंधित प्रतियोगिता के नियमों और राज्य सरकार की नीति के अनुसार तय होता है। UP News :
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