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वसीम बरेलवी (जन्म 18 फरवरी 1940), जिनका वास्तविक नाम ज़ाहिद हुसैन है, भारतीय उर्दू साहित्य के एक प्रतिष्ठित शायर हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मे बरेलवी ने अपनी ग़ज़लों और शायरी से साहित्य जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

Waseem Barelvi : वसीम बरेलवी (जन्म 18 फरवरी 1940), जिनका वास्तविक नाम ज़ाहिद हुसैन है, भारतीय उर्दू साहित्य के एक प्रतिष्ठित शायर हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मे बरेलवी ने अपनी ग़ज़लों और शायरी से साहित्य जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी कई प्रसिद्ध ग़ज़लों को जगजीत सिंह जैसे दिग्गज गायक ने अपनी आवाज़ दी, जिससे उनकी लोकप्रियता देश-विदेश तक पहुंची। उर्दू और हिंदी कविता में उनके योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें फिराक गोरखपुरी अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, कालिदास स्वर्ण पदक (हरियाणा सरकार), बेगम अख्तर कला धर्मी पुरस्कार और नसीम-ए-उर्दू पुरस्कार प्रमुख हैं। वे राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (NCPL) के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। Waseem Barelvi
वसीम बरेलवी न केवल साहित्यिक मंचों पर सक्रिय रहे हैं, बल्कि 2016 से उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य के रूप में सार्वजनिक जीवन में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनकी शायरी की खासियत सरल शब्दों में गहरी बात कहना है, जिसने उन्हें उर्दू अदब का एक लोकप्रिय और सम्मानित चेहरा बना दिया है। Waseem Barelvi
1 अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे

2 आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है

3 - शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ
कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ

4 - दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता
तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता

5 - शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं
इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं

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