मीरजापुर के मड़िहान क्षेत्र की गढ़वा ग्राम पंचायत स्थित यादव बस्ती में समरसेबल पंप दो माह से खराब है। ग्रामीणों का आरोप है कि 49,629 रुपये का भुगतान होने के बावजूद पंप चालू नहीं हुआ। लोग रोजाना एक किलोमीटर दूर से पानी ला रहे हैं और जिलाधिकारी से समस्या के समाधान व भुगतान की जांच की मांग कर रहे हैं।

UP News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में सरकार की हर घर जल योजना के दावों के बीच पेयजल संकट की तस्वीर सामने आई है। मड़िहान तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत गढ़वा स्थित यादव बस्ती में ग्रामीण पिछले दो माह से पानी की किल्लत झेल रहे हैं। बस्ती में लगा समरसेबल पंप खराब होने के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि समरसेबल के निर्माण या मरम्मत के नाम पर 49,629 रुपये का भुगतान भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद पंप चालू नहीं हुआ। अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से समस्या का समाधान कराने और भुगतान की जांच कराने की मांग की है। UP News:
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ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम पंचायत की ओर से कुछ वर्ष पहले बस्ती में पेयजल की सुविधा के लिए सरकारी धन से समरसेबल पंप लगवाया गया था। करीब दो माह पहले पंप ने पानी देना बंद कर दिया। इसकी सूचना ग्राम प्रशासक को दी गई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ। पेयजल की व्यवस्था ठप होने से बस्ती के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत और विकास विभाग के स्तर पर शिकायत के बावजूद अब तक राहत नहीं मिली है।
बस्ती निवासी कलावती देवी, लालती देवी, मनीषा यादव और रीता देवी ने बताया कि कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो लोगों ने अपने स्तर पर पंप ठीक कराने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने घरों से चंदा जुटाकर एक हजार रुपये इकट्ठा किए और टेक्नीशियन को बुलाया, लेकिन इसके बावजूद पंप चालू नहीं हो सका।
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पानी की किल्लत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बस्ती के लोग हर सुबह करीब छह बजे पानी लेने के लिए निकल पड़ते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें लगभग एक किलोमीटर दूर मनोज सिंह के निजी बोर पर लाइन लगानी पड़ती है। वहां से लोग साइकिल या पैदल किसी तरह पानी ढोकर घर पहुंचाते हैं। इस समस्या का सामना केवल परिवारों को ही नहीं, बल्कि पशुओं की प्यास बुझाने के लिए भी करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से जारी इस परेशानी ने उनकी दिनचर्या प्रभावित कर दी है। UP News:
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल समरसेबल के निर्माण या मरम्मत के नाम पर किए गए भुगतान को लेकर है। ग्रामीणों का दावा है कि 16 सितंबर को ग्राम पंचायत की ओर से 49,629 रुपये का भुगतान किया गया था। इसके बावजूद पंप बंद पड़ा है और बस्ती में पेयजल की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने भुगतान के उद्देश्य, काम की वास्तविक स्थिति और खर्च की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, भुगतान किन कार्यों के लिए किया गया और उसमें कोई अनियमितता हुई है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बस्ती निवासी बालकुमार यादव, दीपचंद यादव, सागर यादव और दीप नारायण यादव समेत अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पेयजल संकट दूर कराने की अपील की है। उन्होंने समरसेबल पंप को जल्द ठीक कराने के साथ 49,629 रुपये के भुगतान की जांच कराने की मांग उठाई है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग ग्रामीणों की शिकायत पर कब कार्रवाई करता है और खराब पड़े पंप को चालू कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, ग्रामीणों को रोजाना दूर से पानी लाने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है। UP News:
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