उत्तर प्रदेश में है गौरैया वाली हवेली : 300 साल से चिड़ियों का बसेरा, अनोखी परंपरा कायम

बिजनौर जिले के स्योहारा कस्बे में स्थित एक पुरानी हवेली इन दिनों खास चर्चा में है। गौरैया वाली हवेली के नाम से मशहूर यह जगह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि प्रकृति और इंसान के बीच रिश्ते की मिसाल है। यहां सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों गौरैया पिछले कई सौ वर्षों से रह रही हैं।

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केक काटकर लोगों को जागरूक किया जाता है
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Mar 2026 06:43 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के स्योहारा कस्बे में स्थित एक पुरानी हवेली इन दिनों खास चर्चा में है। गौरैया वाली हवेली के नाम से मशहूर यह जगह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि प्रकृति और इंसान के बीच रिश्ते की मिसाल है। यहां सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों गौरैया पिछले कई सौ वर्षों से रह रही हैं।

पीढ़ियों से निभाई जा रही जिम्मेदारी

यह हवेली शेख परिवार की है, जिसने इस परंपरा को करीब 300 साल से जीवित रखा है। 

* परिवार में जब भी संपत्ति अगली पीढ़ी को सौंपी जाती है, तो एक खास शर्त रखी जाती है

* हवेली के ढांचे में बदलाव नहीं किया जाएगा

* यहां रहने वाली गौरैयों को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा

इसी वजह से यह परंपरा बिना टूटे लगातार आगे बढ़ती रही है।

हजारों गौरैयों का सुरक्षित आशियाना

इस हवेली में लगभग 2 से 2.5 हजार गौरैया रहती हैं। 

* बड़े आंगन में पेड़, पौधे और बेलें घोंसले बनाने के लिए उपयुक्त माहौल देते हैं

* दीवारों और कोनों में प्राकृतिक तरीके से घोंसले बने हुए हैं

* सुबह और शाम चिड़ियों की आवाज से पूरा इलाका जीवंत हो उठता है

खाने-पीने और सुरक्षा का पूरा इंतजाम

परिवार के सदस्य इन पक्षियों की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।

* रोजाना अलग-अलग तरह का दाना दिया जाता है, गेहूं, बाजरा, चावल, दलिया आदि

* मिट्टी के बर्तनों में साफ पानी रखा जाता है

* वातावरण शांत रखने का विशेष ध्यान रखा जाता है

* पंखे बंद रखे जाते हैं ताकि चिड़ियों को नुकसान न हो

* छत पर आवाजाही सीमित रहती है

* रोशनी भी कम रखी जाती है

विश्व गौरैया दिवस पर खास आयोजन

हर साल 20 मार्च को यहां गौरैया दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

* प्रतीकात्मक रूप से गौरैयों का जन्मदिन मनाया जाता है

* केक काटकर लोगों को जागरूक किया जाता है

* युवाओं को घरों में घोंसले लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है

आज के आधुनिक शहरों में गौरैयों की संख्या तेजी से कम हो रही है।

* कंक्रीट के मकानों में घोंसले की जगह नहीं बची

* पर्यावरणीय बदलाव भी एक बड़ा कारण है

ऐसे में यह हवेली दिखाती है कि थोड़ी सी संवेदनशीलता से इन पक्षियों को बचाया जा सकता है। बिजनौर की गौरैया वाली हवेली एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जहां इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन को पीढ़ियों से संभालकर रखा गया है। यह कहानी बताती है कि अगर हम चाहें, तो अपने आसपास की जैव विविधता को बचाना बिल्कुल संभव है।


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उत्तर प्रदेश में शराब ठेके के खिलाफ महिलाओं का उग्र प्रदर्शन, सड़क पर फेंकी बोतलें

सहारनपुर जिले के आमवाला गांव में शराब के ठेके को हटाने की मांग को लेकर महिलाओं का गुस्सा शनिवार को खुलकर सामने आ गया। कई दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रही महिलाओं ने इस बार सीधा ठेके में घुसकर विरोध जताया और शराब की बोतलें सड़क पर फेंक दीं।

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शराब की बोतलें सड़क पर फेंक दीं
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Mar 2026 06:07 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के आमवाला गांव में शराब के ठेके को हटाने की मांग को लेकर महिलाओं का गुस्सा शनिवार को खुलकर सामने आ गया। कई दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रही महिलाओं ने इस बार सीधा ठेके में घुसकर विरोध जताया और शराब की बोतलें सड़क पर फेंक दीं। फतेहपुर थाना क्षेत्र के आमवाला गांव में बड़ी संख्या में महिलाएं नारेबाजी करते हुए शराब के ठेके तक पहुंचीं। ठेके के अंदर रखी शराब की पेटियां बाहर निकाली गईं। बोतलों और पाउच को सड़क पर फेंक दिया गया जिसके कुछ ही देर में सड़क पर शराब बिखर गई और अफरा-तफरी मच गई।

क्यों भड़का महिलाओं का गुस्सा?

प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि गांव के बीच स्थित यह ठेका सामाजिक माहौल खराब कर रहा है। पुरुषों की कमाई शराब में खर्च हो रही है। घरों में झगड़े और हिंसा बढ़ रही है तथा बच्चों पर भी इसका गलत असर पड़ रहा है। महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई न होने पर उग्र कदम उठाना पड़ा, महिलाओं ने पुलिस पर डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

महिलाओं ने साफ कहा है कि अगर जल्द ठेका नहीं हटाया गया तो विरोध और तेज किया जाएगा। बड़े आंदोलन की चेतावनी, गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति संभालने की कोशिश की। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में, लेकिन तनाव बरकरार है।



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लखनऊ में ईद की खुशियों के बीच सियासी हलचल, अखिलेश यादव पहुंचे ईदगाह

लखनऊ में ईद के मौके पर जहां एक ओर खुशियों और भाईचारे का माहौल देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर सियासत की हलचल भी साफ नजर आई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ऐशबाग ईदगाह पहुंचे और लोगों को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।

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अखिलेश यादव
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Mar 2026 05:33 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ईद के मौके पर जहां एक ओर खुशियों और भाईचारे का माहौल देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर सियासत की हलचल भी साफ नजर आई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ऐशबाग ईदगाह पहुंचे और लोगों को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।

ऐशबाग ईदगाह पर उमड़ी भीड़, उत्साह का माहौल

ईदगाह पर नमाज के बाद जैसे ही अखिलेश यादव पहुंचे, वहां मौजूद लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने और मिलने के लिए जुटे। अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे गूंजने लगे, सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्होंने लोगों से मुलाकात की और ईद की मुबारकबाद दी।

गले मिलकर दी बधाई, जनता से सीधा संवाद

अखिलेश यादव ने मौके पर मौजूद लोगों को गले लगाकर ईद की शुभकामनाएं दीं। लोगों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दिया। मीडिया से बातचीत में कई राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर बोले। ईद के मौके पर दिए गए बयान में उन्होंने आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा इशारा किया। 2027 में बड़ी शपथ का जिक्र कर सियासी संदेश दिया।

दावा किया कि प्रदेश में बदलाव की जरूरत है, अपने समर्थकों में जोश भरने की कोशिश की।

कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा

मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए व ब्राह्मण समाज के सम्मान को लेकर टिप्पणी की। अपराध और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। ईद-उल-फित्र के मौके पर लोगों ने नमाज अदा की और एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। राजधानी में कुछ स्थानों पर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया तथा ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर नाराजगी जाहिर की। लखनऊ में ईद का पर्व जहां भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक बना, वहीं इस बार इसमें सियासत का रंग भी साफ दिखाई दिया। अखिलेश यादव के बयान और मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया कि 2027 के चुनावी समीकरणों की तैयारी अब से ही शुरू हो चुकी है।


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