विज्ञापन
West Bengal UCC : बीजेपी सरकार का नया बिल पश्चिम बंगाल में एक तीखी राजीनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे सकता है।

West Bengal UCC: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बारे में वह विधानसभा में बचाएंगे।
पीटीआई के मुताबिक सीएम ने कहा, "इसके लिए एक तय प्रक्रिया है और मैं विधानसभा में इसके बारे में बताऊंगा। एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में एक कमेटी बनाई जाएगी। गुजरात, उत्तराखंड और असम में अपनाई गई प्रक्रिया के आधार पर ही यह काम किया जाएगा। मैं सोमवार को विधानसभा में इस बारे में और जानकारी दूंगा।"
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद, यूनिफॉर्म सिविल कोड बीजेपी का एकमात्र ऐसा 'मुख्य मुद्दा' रह गया है जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
बीजेपी ने किया था वादा
2026 के विधानसभा चुनावों से पहले, बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि राज्य में सत्ता में आने के छह महीने के भीतर य लागू किया जाएगा। अप्रैल में पार्टी का चुनावी घोषणापत्र, या 'संकल्प पत्र' जारी करते समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस वादे पर खास तौर पर ज़ोर दिया था।
अधिकारी कैबिनेट के एक मंत्री ने कहा, "उत्तराखंड, गुजरात, असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों ने पहले ही यूसीसी प्रस्तावों को लागू कर दिया है। अब बंगाल भी बीजेपी-शासित अन्य राज्यों की तर्ज पर इसे लागू करेगा, जैसा कि हमने चुनाव से पहले वादा किया था।"
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य में बीजेपी के सत्ता में आने के दो महीने से भी कम समय में विधानसभा के पहले ही सत्र में बिल पेश करना, पार्टी के चुनावी वादे को पूरा करने के लिए नई सरकार की उत्सुकता को दिखाता है।
प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क
इस प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि एक समान कानूनी ढांचा सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करेगा और धर्म-आधारित पर्सनल लॉ से पैदा होने वाली असमानताओं को खत्म करेगा। वे बीजेपी शासित राज्यों का उदाहरण देते हैं जिन्होंने इसी तरह के कानूनी सुधार लागू किए हैं या उनकी दिशा में कदम उठाए हैं।
विरोधियों का क्या कहना है?
हालांकि, राजनीतिक जानकार यह भी कह रहे हैं कि इस प्रस्ताव से बंगाल में तीखी राजनीतिक और कानूनी बहस छिड़ सकती है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने पहले भी यूसीसी पर चिंता जताई है। विरोधी दलों का है कि पर्सनल लॉ धार्मिक स्वतंत्रता और समुदाय की पहचान से गहराई से जुड़े होते हैं। ऐसा लगता है कि यूसीसी पर बहस अब बंगाल की राजनीति का नया केंद्र बनने वाली है। West Bengal UCC
विज्ञापन