रेड कॉर्नर नोटिस एक अंतरराष्ट्रीय अलर्ट होता है, जिसे इंटरपोल द्वारा जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य किसी फरार अपराधी की लोकेशन ट्रेस करना और उसे गिरफ्तार कर संबंधित देश को सौंपना होता है।

UP News : रेड कॉर्नर नोटिस एक अंतरराष्ट्रीय अलर्ट होता है, जिसे इंटरपोल द्वारा जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य किसी फरार अपराधी की लोकेशन ट्रेस करना और उसे गिरफ्तार कर संबंधित देश को सौंपना होता है। अधिकारियों का कहना है कि कफ सिरप तस्करी के खिलाफ अब कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। यदि दुबई में उसकी लोकेशन कन्फर्म होती है, तो शुभम जायसवाल को प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर उसे भारत लाया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम को कफ सिरप तस्करी के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में ऐसे नेटवर्क पर सख्त अंकुश लगने की उम्मीद है।
प्रतिबंधित कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़े चर्चित मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के खिलाफ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच एजेंसियों के अनुरोध पर इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है। इस कदम के बाद आरोपी की गिरफ्तारी की संभावना काफी बढ़ गई है।
जांच में सामने आया है कि शुभम जायसवाल देश छोड़कर विदेश भाग चुका है और उसके दुबई में छिपे होने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां अब वहां की स्थानीय पुलिस और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ मिलकर उसे पकड़ने की तैयारी कर रही हैं। रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद किसी भी देश की पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर संबंधित देश को सौंप सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही शुभम को गिरफ्तार कर भारत लाया जा सकता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुभम जायसवाल इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना है और उसके खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। कफ सिरप की अवैध तस्करी के जरिए यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और विभिन्न राज्यों में इसकी सप्लाई चेन फैली हुई थी। इस मामले में पुलिस पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद की गई है।
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि यह गिरोह कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़े पैमाने पर अवैध सप्लाई कर रहा था। इस तरह के सिरप का उपयोग नशे के रूप में किया जाता है, जिस पर कानून के तहत कड़ी रोक है। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए लाखों-करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था, जिसमें कई लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे।
मामले के खुलासे के बाद से ही पुलिस, एसआईटी और अन्य जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। शुभम के फरार होने के बाद उसके करीबियों और सहयोगियों की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। तीन साल के संपत्ति रिकॉर्ड और लेन-देन की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।