प्रदेश में रबी विपणन सीजन के तहत सरकारी गेहूं खरीद की प्रक्रिया 30 मार्च से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस बार सरकार ने व्यवस्था को पहले से ज्यादा पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने का दावा किया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में रबी विपणन सीजन के तहत सरकारी गेहूं खरीद की प्रक्रिया 30 मार्च से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस बार सरकार ने व्यवस्था को पहले से ज्यादा पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने का दावा किया है। अब तक प्रदेश भर में लाखों किसानों ने अपनी फसल बेचने के लिए पंजीकरण करा लिया है, जिससे खरीद प्रक्रिया ने शुरूआती दौर में ही रफ्तार पकड़ ली है।
खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, करीब 2 लाख से अधिक किसान गेहूं बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसान सीधे सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेच सकें और उन्हें उचित मूल्य मिल सके। इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 160 अधिक है। इस बढ़ोतरी से किसानों को बेहतर आय मिलने की उम्मीद है और उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से भी राहत मिलेगी।
सरकार ने इस बार भुगतान व्यवस्था को तेज और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया है। निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को उनकी फसल का भुगतान 48 घंटे के भीतर डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजा जाए। प्रदेश में अब तक 3500 से अधिक क्रय केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि कुल मिलाकर करीब 6500 केंद्र संचालित किए जाने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के लिए छाया, पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं हर केंद्र पर सुनिश्चित की जाएं।
पहले इस वर्ष गेहूं खरीद का लक्ष्य 30 लाख मीट्रिक टन रखा गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया।
इस फैसले से अधिक किसानों को सरकारी खरीद प्रणाली का लाभ मिलने की संभावना है। सरकार ने किसानों को राहत देते हुए उतराई, सफाई और छनाई जैसे कार्यों के लिए 20 प्रति क्विंटल अतिरिक्त देने का प्रावधान किया है। इससे किसानों का परिवहन और श्रम खर्च कुछ हद तक कम होगा।
बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए पूरी खरीद प्रक्रिया को आॅनलाइन कर दिया गया है। किसान पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से पंजीकरण या नवीनीकरण कर सकते हैं, जिससे उन्हें किसी भी तरह की दलाली से बचाया जा सके। यदि किसी किसान को पंजीकरण या बिक्री प्रक्रिया में कोई समस्या आती है, तो वह टोल-फ्री नंबर 18001800150 पर संपर्क कर सकता है।
इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट के जरिए भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।