1999 बैच के आईपीएस अधिकारी रमित शर्मा इस समय बरेली जोन ADG यानी अपर पुलिस महानिदेशक (Additional Director General of Police) के पद पर तैनात हैं। आइए उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी रमित शर्मा के बारे में विस्तार में जानते हैं।

उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में जिन आईपीएस अधिकारियों की भूमिका अहम मानी जाती है, उनमें रमित शर्मा का नाम भी शामिल है। 1999 बैच के आईपीएस अधिकारी रमित शर्मा इस समय बरेली जोन ADG यानी अपर पुलिस महानिदेशक (Additional Director General of Police) के पद पर तैनात हैं। उत्तर प्रदेश में माफिया अपराध के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई हो या फिर आम जनता की शिकायतों का समय पर समाधान निकालना हो, अपनी हर जिम्मेदारी को इन्होंने बखूबी निभाया है। उनके काम करने के तरीके ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। प्रयागराज के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में भी वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। अतीक अहमद के बेटे असद के एनकाउंटर के दौरान भी वह चर्चा में रहे। अब इस समय बरेली जोन के एडीजी के पद पर तैनात हैं। आखिर कौन हैं रमित शर्मा और कैसा रहा है उनका पुलिसिंग का सफर? आइए उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी रमित शर्मा के बारे में विस्तार में जानते हैं।
रमित शर्मा उत्तर प्रदेश कैडर के 1999 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका नाम उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और पुलिस इकाइयों में जिम्मेदारी संभाली है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ से संबंध रखने वाले रमित शर्मा ने अपने पुलिस करियर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध पर नियंत्रण और पुलिस प्रशासन को प्रभावी बनाने से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। रमित शर्मा की पहचान एक ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में बनी, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए प्रशासनिक अनुभव हासिल किया। मेरठ, मुरादाबाद, बरेली और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनाती के दौरान उन्हें विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन जिम्मेदारियों ने उनके अनुभव को व्यापक बनाया और उन्हें प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।
आईपीएस रमित शर्मा का जन्म 23 जनवरी 1974 को हुआ था। उनका गृह जनपद हापुड़ है। उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में अपना करियर बनाया और वर्ष 1999 बैच के आईपीएस अधिकारी बने। पुलिस सेवा में आने के बाद रमित शर्मा ने विभिन्न पदों पर काम करते हुए प्रशासनिक और मैदानी अनुभव हासिल किया। पुलिस विभाग में वरिष्ठ पदों तक पहुंचने के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों के साथ-साथ पुलिस बल के संचालन और अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारियां भी मिलीं।
रमित शर्मा का पुलिस करियर कई महत्वपूर्ण तैनातियों से जुड़ा रहा है। वह मेरठ में डीआईजी रेंज के पद पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा मुरादाबाद और बरेली में भी आईजी के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इन तैनातियों के दौरान उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस व्यवस्था की निगरानी करने का अवसर मिला। बरेली में आईजी रेंज के रूप में काम करने के बाद वह प्रयागराज में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वर्ष 2017 में उन्होंने प्रयागराज रेंज के आईजी के रूप में कार्य किया था। इस दौरान उन्हें क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों को संभालने का अनुभव मिला। अलग-अलग रेंज में तैनाती के कारण उन्हें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की पुलिस व्यवस्था, अपराध नियंत्रण तथा पुलिस अधिकारियों के बीच समन्वय जैसे विषयों पर काम करने का अवसर मिला। यही अनुभव आगे चलकर प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर और बरेली जोन के एडीजी के रूप में उनकी जिम्मेदारियों में उपयोगी रहा।
रमित शर्मा के करियर की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में प्रयागराज के पहले पुलिस कमिश्नर का पद भी शामिल है। दिसंबर 2022 में प्रयागराज में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें शहर के पहले पुलिस आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई। पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में पुलिस आयुक्त को शहरी कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त होते हैं। ऐसे में किसी बड़े शहर में इस व्यवस्था की शुरुआत के समय पुलिस आयुक्त की भूमिका काफी अहम हो जाती है। रमित शर्मा के सामने भी प्रयागराज में नई व्यवस्था को संचालित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की महत्वपूर्ण चुनौती थी। प्रयागराज धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। यहां बड़ी संख्या में लोग विभिन्न आयोजनों और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने पहुंचते हैं। ऐसे शहर में पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। रमित शर्मा ने पुलिस कमिश्नर के रूप में इसी व्यवस्था की कमान संभाली।
रमित शर्मा के प्रयागराज पुलिस कमिश्नर रहते हुए फरवरी 2023 में उमेश पाल हत्याकांड हुआ। इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक चर्चा पैदा कर दी थी। उमेश पाल की हत्या के मामले में माफिया अतीक अहमद और उसके परिवार के सदस्यों के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच और आरोपियों की तलाश के लिए कार्रवाई तेज की। इस हत्याकांड में अतीक अहमद के बेटे असद का नाम भी सामने आया था। मामले की जांच के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष टीमों ने आरोपियों की तलाश की। अप्रैल 2023 में झांसी के पास पुलिस मुठभेड़ में असद और शूटर गुलाम मारे गए। इस कार्रवाई के बाद रमित शर्मा एक बार फिर चर्चा में आए, क्योंकि उस समय वह प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर थे। उमेश पाल हत्याकांड प्रदेश की कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला बन गया था। इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी और माफिया नेटवर्क के खिलाफ उठाए गए कदमों पर पूरे देश की नजर रही। रमित शर्मा क तैनाती के दौरान हुई इस कार्रवाई ने उनके पुलिस करियर को व्यापक चर्चा में ला दिया।
प्रयागराज में पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी निभाने के बाद रमित शर्मा को बरेली जोन के अपर पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनात किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्हें जोन के अंतर्गत आने वाले जिलों में पुलिस व्यवस्था की निगरानी और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की समीक्षा की जिम्मेदारी मिली। एडीजी का पूरा नाम अपर पुलिस महानिदेशक होता है। अंग्रेजी में इसे एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस कहा जाता है। यह पुलिस विभाग का एक वरिष्ठ पद है, जिस पर तैनात अधिकारी को अपने निर्धारित क्षेत्र या विभाग से जुड़े प्रशासनिक और पुलिस संबंधी कार्यों की निगरानी करनी होती है। बरेली जोन पश्चिमी और रुहेलखंड क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण जिलों को कवर करता है। यहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों पर नियंत्रण, पुलिस अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा और आम जनता की शिकायतों का समाधान पुलिस प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं। रमित शर्मा की भूमिका भी इन्हीं कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने से जुड़ी है।
पुलिस प्रशासन में आम जनता की शिकायतों का समय पर समाधान करना महत्वपूर्ण माना जाता है। उत्तर प्रदेश में आईजीआरएस यानी एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों का निर्धारित समय में निस्तारण करना और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। बरेली जोन में रमित शर्मा के नेतृत्व के दौरान आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई। इस प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों से समय पर जवाब देने के साथ शिकायतों की वास्तविक स्थिति की जांच करने और जरूरी कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।
बरेली जोन में शिकायत निस्तारण की व्यवस्था को लेकर रमित शर्मा को प्रदेश स्तर पर आईजीआरएस प्रणाली की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारी भी दी गई है। इस भूमिका के तहत अलग-अलग जोन में शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की समीक्षा करना और जरूरत के अनुसार अधिकारियों को दिशा-निर्देश देना महत्वपूर्ण कार्य है। आईजीआरएस प्रणाली का प्रभावी संचालन शासन और पुलिस प्रशासन के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि इससे नागरिकों की शिकायतों को सीधे संबंधित विभागों तक पहुंचाने और उनके समाधान की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिलती है। शिकायतों के निस्तारण में देरी, अधूरी कार्रवाई या बार-बार सामने आने वाली समस्याओं की पहचान करके व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है। बरेली जोन में अपनाई गई कार्यप्रणाली को अन्य क्षेत्रों के लिए उपयोगी उदाहरण के रूप में देखा गया।
रमित शर्मा जनवरी 2025 में अपनी एक तकनीकी पहल को लेकर भी चर्चा में आए थे। उन्होंने स्मार्ट पुलिसिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपना एआई आधारित जनसंपर्क अधिकारी तैयार किया, जिसे जारविस नाम दिया गया। इस पहल को पुलिस विभाग में तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक प्रयोग के रूप में देखा गया। आज के समय में पुलिस प्रशासन के लिए सूचना का तेजी से प्रसार, नागरिकों तक सही जानकारी पहुंचाना और जनसंपर्क को प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण हो गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल से इन कार्यों में सहायता मिलने की संभावना रहती है। जारविस जैसी पहल इसी दिशा में तकनीक के उपयोग को लेकर चर्चा में आई। पुलिस व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल तभी प्रभावी माना जा सकता है, जब उससे सूचना की सटीकता, पारदर्शिता और नागरिकों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया बेहतर हो। रमित शर्मा की इस पहल ने स्मार्ट पुलिसिंग और एआई के संभावित उपयोग को लेकर ध्यान आकर्षित किया।
रमित शर्मा को पुलिस सेवा में उनके योगदान के लिए विभिन्न सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक प्राप्त हुआ है। इसके अलावा राष्ट्रपति और पुलिस महानिदेशक की ओर से भी उन्हें उत्कृष्ट तथा सराहनीय सेवाओं के लिए पदक मिलने की जानकारी दी गई है। पुलिस सेवा में ऐसे सम्मान अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान उनके योगदान और सेवा को मान्यता देने के लिए दिए जाते हैं। लंबे समय तक अलग-अलग पदों पर काम करते हुए कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जिम्मेदारियों और पुलिसिंग से जुड़े कार्यों का अनुभव किसी अधिकारी के करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। रमित शर्मा ने अपने करियर में रेंज स्तर से लेकर पुलिस कमिश्नरेट और जोन स्तर तक जिम्मेदारियां संभाली हैं। इन विभिन्न पदों पर काम करने के कारण उन्हें पुलिस प्रशासन के अलग-अलग पहलुओं पर काम करने का अवसर मिला।
रमित शर्मा का पुलिस करियर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। मेरठ में डीआईजी, मुरादाबाद और बरेली में आईजी, प्रयागराज में पुलिस कमिश्नर और बरेली जोन में एडीजी जैसे पदों पर काम करने के दौरान उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों की पुलिस व्यवस्था संभाली। प्रयागराज में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था की शुरुआत, उमेश पाल हत्याकांड के बाद पुलिस की कार्रवाई और बरेली जोन में शिकायतों के निस्तारण पर जोर जैसे मामले उनके कार्यकाल से जुड़ी प्रमुख घटनाओं में शामिल हैं। इसके अलावा एआई आधारित जनसंपर्क अधिकारी जारविस की पहल ने भी उन्हें चर्चा में रखा। एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है। पुलिस प्रशासन को प्रभावी बनाना, अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करना, जनता की शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उनके पद से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
विज्ञापन