उत्तर प्रदेश के मेरठ-सहारनपुर शिक्षक MLC चुनाव के बीच डॉ. कुलदीप मलिक अचानक चर्चा में क्यों हैं ? श्रीचंद शर्मा की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों पर उन्होंने कौन से सवाल उठाए हैं और आखिर इस पूरे विवाद की असली कहानी क्या है ?

UP News : उत्तर प्रदेश के मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद चुनाव इस बार केवल राजनीतिक मुकाबले तक सीमित नहीं है। चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, शिक्षक के रूप में उनकी पहचान और चुनावी पात्रता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी कड़ी में शिक्षक नेता और शिक्षाविद् डॉ. कुलदीप मलिक ने वर्तमान एमएलसी तथा भाजपा प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग उठाई है। डॉ. कुलदीप मलिक का आरोप है कि श्रीचंद शर्मा की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए और यदि उनकी पात्रता को लेकर कोई विसंगति है तो उसे सक्षम प्राधिकारी तथा न्यायिक प्रक्रिया के सामने रखा जाना चाहिए। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड को लेकर यह विवाद विशेष रूप से श्रीचंद शर्मा के वर्ष 2021 के चुनावी शपथपत्र में दर्ज वर्ष 1987 की ‘साहित्य रत्न’ उपाधि से जुड़ा है। UP News
डॉ. कुलदीप मलिक की पहचान केवल एक चुनाव प्रत्याशी के रूप में नहीं है। उनके उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उनका जन्म 1978 में मुजफ्फरनगर जिले में हुआ। वह शिक्षाविद् होने के साथ सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षक नेता के रूप में भी सक्रिय रहे हैं। वर्तमान में वह ग्रेटर नोएडा स्थित ITS इंजीनियरिंग कॉलेज के कंप्यूटर विभाग में प्रोफेसर हैं। उनके प्रोफाइल के अनुसार उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में करीब 24 वर्ष का अनुभव है। UP News
डॉ. कुलदीप मलिक की शैक्षणिक पृष्ठभूमि तकनीकी शिक्षा से जुड़ी रही है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने वर्ष 2001 में एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर से एमसीए किया। इसके बाद वर्ष 2004 में इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट से टेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री तथा उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय से योगिक साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की। वर्ष 2013 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने का विवरण भी उनके प्रोफाइल में दिया गया है। UP News
डॉ. मलिक के प्रोफाइल के अनुसार पिछले लगभग दो दशकों से वह शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, पर्यावरण, बेरोजगारी और किसानों जैसे मुद्दों पर काम करते रहे हैं। इसी सामाजिक सक्रियता के बाद उन्होंने शिक्षक राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2020 में उन्होंने मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी शिक्षक वर्ग का चुनाव लड़ा। उनके पिछले चुनाव की खास बात यह बताई जाती है कि उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दल और संगठन के समर्थन के चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया था। प्रोफाइल के अनुसार उन्हें उस चुनाव में 205 वोट मिले। वर्ष 2020 के चुनाव में कुल 15 उम्मीदवार मैदान में थे और डॉ. कुलदीप मलिक भी उनमें शामिल थे।
शिक्षा के अलावा डॉ. कुलदीप मलिक की एक अलग पहचान पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी बनी है। उनके प्रोफाइल के अनुसार पिछले लगभग 15 वर्षों से वह पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। विभिन्न स्थानों पर बरगद, नीम और पीपल जैसे वृक्ष लगाने के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण अभियान चलाने का दावा उनके प्रोफाइल में किया गया है। इसी वजह से उन्हें मीडिया और सामाजिक गतिविधियों में ‘बरगद बाबा’ के नाम से भी पहचान मिलने का उल्लेख उनके प्रोफाइल में है। डॉ. मलिक के प्रोफाइल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में योग एवं स्वास्थ्य संबंधी कार्यशालाओं और योग शिविरों के आयोजन का भी उल्लेख है।
डॉ. कुलदीप मलिक केवल जमीनी स्तर पर ही सक्रिय नहीं हैं। उनके प्रोफाइल के अनुसार विभिन्न अखबारों और मैगजीन में लेखों के माध्यम से वह राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं। इसके अलावा अलग-अलग टीवी चैनलों की डिबेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी वह अपने मुद्दे उठाते हैं। उनके प्रोफाइल में जाति, धर्म, संप्रदाय, मंदिर-मस्जिद जैसे विवादित मुद्दों के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, बेरोजगारी और किसान जैसे विषयों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की बात कही गई है।
डॉ. कुलदीप मलिक की सार्वजनिक पहचान में शिक्षा का मुद्दा प्रमुख है। उपलब्ध प्रोफाइल में उन्हें ‘शिक्षक नेता’, ‘शिक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के संस्थापक तथा वेदाणा फाउंडेशन के निदेशक के रूप में बताया गया है। हालिया चुनावी गतिविधियों में भी वह शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते दिखाई देते हैं। सितंबर 2026 में श्रीचंद शर्मा से जुड़े एक विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने शिक्षकों और प्रबंधकों से चुनाव के दौरान किए जा रहे दावों की पुष्टि करने की अपील की थी।
यही वह मुद्दा है जिसने डॉ. कुलदीप मलिक को वर्तमान एमएलसी चुनाव के दौरान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भाजपा ने मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से वर्तमान एमएलसी श्रीचंद शर्मा को दोबारा प्रत्याशी बनाया है। इसके बाद उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल उठे हैं। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2021 के चुनावी शपथपत्र में श्रीचंद शर्मा ने अपनी शैक्षणिक योग्यता में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज से वर्ष 1987 में ‘साहित्य रत्न’ प्राप्त करने का उल्लेख किया था। इसी योग्यता की मान्यता और शिक्षक एमएलसी चुनाव में इसकी वैधानिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। डॉ. कुलदीप मलिक का कहना है कि इस पूरे मामले का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं बल्कि मूल प्रमाणपत्र, संबंधित संस्थाओं के रिकॉर्ड और सरकारी नियमों की जांच से होना चाहिए।
यह सवाल इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिलहाल उपलब्ध सामग्री के आधार पर इसे अंतिम रूप से “फर्जी डिग्री” घोषित करना उचित नहीं होगा। विवाद का वास्तविक प्रश्न यह है कि वर्ष 1987 में प्राप्त बताई गई ‘साहित्य रत्न’ उपाधि की उस समय क्या स्थिति थी, वर्तमान में उसकी मान्यता क्या है और क्या वह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक पात्रता से संबंधित किसी नियम को पूरा करती है। चेतना मंच ने भी इस मामले में दस्तावेज आधारित जांच की मांग की है। यदि प्रमाणपत्र वैध है और चुनाव के लिए स्वीकार्य है तो संबंधित दस्तावेज और नियम सार्वजनिक होने चाहिए। यदि कोई विसंगति सामने आती है तो सक्षम प्राधिकारी को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की प्रकृति ही ऐसी है कि यहां शिक्षक समुदाय अपने प्रतिनिधि का चुनाव करता है। इसलिए उम्मीदवार की शिक्षक के रूप में पात्रता और शैक्षणिक दस्तावेजों की स्थिति चुनावी बहस का महत्वपूर्ण विषय बन सकती है। डॉ. कुलदीप मलिक इसी सवाल को लेकर श्रीचंद शर्मा के दस्तावेजों की जांच की मांग कर रहे हैं। उनका राजनीतिक संदेश भी इसी व्यापक विचार के इर्द-गिर्द है कि शिक्षा और शिक्षक से जुड़े चुनाव में वास्तविक मुद्दे शिक्षा, शिक्षक, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सरोकार होने चाहिए।
डॉ. कुलदीप मलिक का पूरा सार्वजनिक प्रोफाइल देखें तो उनकी पहचान तीन प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई देती है—
पहला—शिक्षा:
करीब 24 वर्षों का शैक्षणिक अनुभव और ग्रेटर नोएडा के ITS इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्य।
दूसरा—समाजसेवा और पर्यावरण:
शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, बेरोजगारी और किसानों से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से सक्रियता तथा वृक्षारोपण अभियान।
तीसरा—शिक्षक राजनीति:
2020 में मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के बाद अब शिक्षक राजनीति में फिर सक्रिय भूमिका और वर्तमान एमएलसी श्रीचंद शर्मा की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल।
डॉ. कुलदीप मलिक के प्रोफाइल में देश की राजनीति को वास्तविक मुद्दों की ओर ले जाने की इच्छा को प्रमुखता दी गई है। उनके अनुसार राजनीति में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, बेरोजगारी और किसानों जैसे विषय प्रभावी होने चाहिए। इसी दृष्टिकोण के साथ वह टीवी डिबेट, लेखों, सोशल मीडिया तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में अपनी आवाज उठाते हैं।
उनका प्रोफाइल एक ऐसे शिक्षक नेता की तस्वीर प्रस्तुत करता है जो शिक्षा के क्षेत्र से निकलकर सामाजिक मुद्दों और फिर शिक्षक राजनीति तक पहुंचा है। अब मेरठ-सहारनपुर शिक्षक एमएलसी चुनाव में श्रीचंद शर्मा की शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठाए गए सवालों ने उनकी राजनीतिक सक्रियता को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
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