कौन हैं डॉ. लोकेश एम., जिन्हें उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मंडल की कमान मिली है? जानिए डेंटिस्ट से IAS बनने की कहानी, नोएडा में सख्त कार्यशैली, PWD में जिम्मेदारी और प्रयागराज में उनकी नई चुनौती के बारे में।

UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में कुछ अधिकारी ऐसे हैं, जिनकी पहचान सिर्फ उनके पद से नहीं बल्कि उनकी फील्ड में उतरकर काम देखने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने वाली कार्यशैली से बनती है। डॉ. लोकेश एम. ऐसे ही अधिकारियों में शामिल हैं। 2005 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी डॉ. लोकेश एम. अब प्रयागराज मंडल के मंडलायुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की प्रयागराज मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर उनका नाम मंडलायुक्त के रूप में दर्ज है। प्रयागराज मंडल की जिम्मेदारी भी छोटी नहीं है। इसके अंतर्गत प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर और प्रतापगढ़ चार जिले आते हैं। ऐसे में मंडलायुक्त के रूप में उनके सामने विकास कार्यों की निगरानी, राजस्व प्रशासन, जन शिकायतों, सरकारी योजनाओं, विभागीय समन्वय और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग जैसी कई जिम्मेदारियां हैं। लेकिन डॉ. लोकेश एम. की कहानी केवल वर्तमान पद तक सीमित नहीं है। उनकी प्रशासनिक यात्रा में सहारनपुर, कौशांबी, कई जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी, सहारनपुर मंडलायुक्त, नोएडा प्राधिकरण के CEO और उत्तर प्रदेश PWD के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं। UP News
डॉ. लोकेश एम. की प्रोफाइल का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उनका शैक्षणिक बैकग्राउंड चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा रहा। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने BDS यानी बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की राह चुनी और वर्ष 2005 में IAS में चयनित हुए। वह उत्तर प्रदेश कैडर के 2005 बैच के अधिकारी हैं। एक डॉक्टर से प्रशासनिक अधिकारी बनने का यह सफर उन्हें दूसरे अधिकारियों से अलग प्रोफाइल देता है। IAS के शुरुआती दौर में उन्होंने प्रशिक्षण के बाद सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया और आगे चलकर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट तथा मुख्य विकास अधिकारी जैसी जिम्मेदारियां संभालीं। उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड में उनके शुरुआती पदों में सहारनपुर और इलाहाबाद से जुड़ी जिम्मेदारियां दर्ज हैं। UP News
डॉ. लोकेश एम. को कौशांबी का जिलाधिकारी भी बनाया गया। इसके बाद उनके प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां जुड़ती चली गईं। उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने उत्तर प्रदेश में राजस्व प्रशासन और जिला प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। बाद में उन्होंने कर्नाटक में इंटर-कैडर डेपुटेशन पर भी सेवाएं दीं। इसके बाद उत्तर प्रदेश लौटकर उन्होंने मंडल और प्राधिकरण स्तर की बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। यही वह अनुभव है जिसने उन्हें जिला प्रशासन से लेकर बड़े शहरी और मंडलीय प्रशासन तक काम करने का अवसर दिया। UP News
डॉ. लोकेश एम. के प्रशासनिक करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय सहारनपुर मंडलायुक्त के रूप में रहा। सहारनपुर में उनके कार्यकाल की चर्चा खास तौर पर नशे के खिलाफ अभियान और नशे की समस्या से जूझ रहे युवाओं के लिए डी-एडिक्शन सेंटर जैसी पहल को लेकर हुई। नोएडा के CEO के रूप में कार्यभार संभालने के समय प्रकाशित रिपोर्टों में भी उनके सहारनपुर कार्यकाल में नशामुक्ति अभियान को प्रमुखता दी गई थी। उनकी कार्यशैली का एक दूसरा पहलू भी सामने आया—फील्ड इंस्पेक्शन। सहारनपुर में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों से सीधे जवाब मांगने के कई उदाहरण सामने आए। एक रिपोर्ट में ट्रैफिक व्यवस्था के निरीक्षण के दौरान एक पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आने पर डॉ. लोकेश एम. की सख्त टिप्पणी का उल्लेख किया गया था। यानी उनके प्रशासनिक काम करने के तरीके में कार्यालय की बैठकों के साथ-साथ मौके पर जाकर स्थिति देखने पर भी जोर दिखाई देता है। UP News
जुलाई 2023 में डॉ. लोकेश एम. ने नोएडा प्राधिकरण के CEO के रूप में कार्यभार संभाला। उस समय उन्होंने नोएडा को बेहतर और सुंदर शहर बनाने के साथ-साथ आवंटियों, किसानों और अन्य हितधारकों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता बताया था। सड़कों, फुटपाथों, सेंट्रल वर्ज और सार्वजनिक स्थानों की स्थिति सुधारने पर भी जोर दिया गया।
नोएडा में उनका कार्यकाल उनकी प्रशासनिक शैली को समझने के लिए खासा महत्वपूर्ण है। यहां उन्होंने कई बार अधिकारियों के साथ बैठकों के बजाय खुद मौके पर पहुंचकर सड़क, सफाई, नाले, फुटपाथ और दूसरी नागरिक सुविधाओं की स्थिति देखी। UP News
मई 2024 में नोएडा में निरीक्षण के दौरान उन्हें कई इलाकों में सड़कों की हालत खराब मिली। इसके बाद संबंधित एजेंसी पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई। उन्होंने विभिन्न सड़कों का निरीक्षण कर मरम्मत के निर्देश भी दिए। इस दौरान लेबर चौक के आसपास श्रमिकों से भी बातचीत की गई और राशन कार्ड तथा सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए। यह उनकी कार्यशैली के उस पहलू को दिखाता है जिसमें शहरी प्रशासन को केवल सड़क और सफाई तक सीमित रखने के बजाय नागरिक समस्याओं से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। UP News
जुलाई 2024 में नोएडा की सड़कों की सफाई और रखरखाव को लेकर डॉ. लोकेश एम. ने चार वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग प्रमुख सड़कों की जिम्मेदारी सौंपी। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर कूड़ा और अव्यवस्था मिलने के बाद सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की व्यवस्था की गई। संबंधित ठेकेदार पर पांच लाख रुपये की कार्रवाई और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी रिपोर्टों में सामने आए। यह तरीका खास था जिम्मेदारी तय करो, फिर उसकी नियमित समीक्षा करो। यही कार्यशैली बाद में डॉ. लोकेश एम. की प्रशासनिक पहचान का एक प्रमुख हिस्सा बनती दिखाई दी। UP News
अप्रैल 2024 में सेक्टर-137 के ड्रेन का निरीक्षण करते हुए उन्होंने सीवेज और गंदे पानी की समस्या पर अधिकारियों को निर्देश दिए। साथ ही फुटपाथ, सड़क और पेवमेंट की मरम्मत पर भी जोर दिया गया। बारिश के बाद भी उन्होंने कई इलाकों का निरीक्षण किया और खराब सड़कों, क्षतिग्रस्त ड्रेनेज तथा सड़क किनारे बढ़ी झाड़ियों जैसी समस्याओं को चिन्हित कर तत्काल सुधार के निर्देश दिए। नोएडा में उनका फोकस इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि यहां नागरिकों की अपेक्षाएं केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं। एक आधुनिक औद्योगिक शहर के रूप में सड़क, सफाई, जल निकासी, ट्रैफिक, फुटपाथ, पार्किंग और सार्वजनिक स्थानों की गुणवत्ता भी प्रशासन के प्रदर्शन का पैमाना बनती है। UP News
नोएडा में डॉ. लोकेश एम. ने RWA प्रतिनिधियों के साथ बैठकों में पानी, अतिक्रमण, आवारा कुत्तों, पार्किंग, वेंडिंग जोन, सीवर, सार्वजनिक परिवहन और आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों जैसी समस्याओं पर चर्चा की। इससे उनकी कार्यशैली का एक और पहलू सामने आता है शिकायत सुनना, मौके की स्थिति देखना और फिर संबंधित विभाग को जिम्मेदारी देना।
नोएडा के बाद डॉ. लोकेश एम. को उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग यानी PWD के सचिव की जिम्मेदारी मिली। मार्च 2026 की रिपोर्टों में उनके PWD सचिव बनाए जाने की पुष्टि हुई थी। PWD जैसी बड़ी व्यवस्था में उनकी भूमिका का दायरा नोएडा के शहरी प्रशासन से अलग था। यहां सड़क निर्माण, रखरखाव और बड़े सार्वजनिक निर्माण कार्यों की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण होती हैं। इस तरह उनके करियर में प्रशासन का एक और महत्वपूर्ण आयाम जुड़ा शहर के नागरिक प्रशासन से लेकर प्रदेश स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग तक।
अब डॉ. लोकेश एम. प्रयागराज मंडल के मंडलायुक्त हैं। आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम वर्तमान मंडलायुक्त के रूप में दर्ज है। प्रयागराज में उनकी कार्यशैली की झलक शुरुआती दौर में ही दिखाई देने लगी है। अगस्त 2026 में जलभराव की समस्या को लेकर किए गए निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से केवल अस्थायी समाधान के बजाय स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। शहर के विभिन्न हिस्सों में सिल्ट हटाने, नालों को चौड़ा करने और चोक प्वाइंट ठीक करने के काम का निरीक्षण किया गया। यह दृष्टिकोण उनके पुराने काम करने के तरीके से मेल खाता है समस्या को सिर्फ तत्काल ठीक करने के बजाय उसके स्थायी समाधान पर जोर।
प्रयागराज में मंडलायुक्त के रूप में उनकी सख्ती का एक और उदाहरण नaini स्थित जलशोधन संयंत्र की समीक्षा में सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार करीब 273 करोड़ रुपये की जलशोधन परियोजना की प्रगति अपेक्षा से काफी पीछे मिली। निरीक्षण में करीब 20 से 25 प्रतिशत काम पूरा पाया गया, जबकि इस स्तर तक लगभग 60 प्रतिशत प्रगति अपेक्षित थी।इसके बाद डॉ. लोकेश एम. ने परियोजना की निगरानी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यानी प्रयागराज में भी उनका वही फॉर्मूला दिखाई दे रहा है—फाइल पर प्रगति की रिपोर्ट से संतुष्ट होने के बजाय जमीन पर जाकर काम की वास्तविक स्थिति देखना।
उनके अब तक के कार्यकाल को एक साथ देखा जाए तो उनकी कार्यशैली के कुछ प्रमुख बिंदु सामने आते हैं—
पहला—फील्ड इंस्पेक्शन।
वह केवल कार्यालयी रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय मौके पर जाकर स्थिति देखने के लिए जाने जाते हैं।
दूसरा—जवाबदेही।
काम खराब मिला तो संबंधित एजेंसी या अधिकारी से जवाब मांगना और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करना उनकी शैली का हिस्सा रहा है।
तीसरा—नागरिक सुविधाओं पर जोर।
नोएडा में सड़क, सफाई, फुटपाथ, जल निकासी, पानी और अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता इसका उदाहरण है।
चौथा—स्थायी समाधान।
प्रयागराज में जलभराव और जलशोधन परियोजना की समीक्षा के दौरान भी केवल कागजी प्रगति के बजाय वास्तविक और टिकाऊ समाधान पर जोर दिखाई दिया है।
डॉ. लोकेश एम. का प्रशासनिक करियर पूरी तरह विवादों से अछूता रहा हो, ऐसा कहना सही नहीं होगा। वर्ष 2026 की शुरुआत में नोएडा प्राधिकरण के CEO पद से हटाए जाने के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनके कार्यकाल से जुड़े विवाद और जांच का उल्लेख हुआ था। इन रिपोर्टों में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत से जुड़े मामले और अन्य घटनाक्रमों का जिक्र किया गया। हालांकि, ऐसे मामलों में मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप, जांच और अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य—इन तीनों को अलग-अलग रखना जरूरी है। इसलिए किसी जांच या आरोप को अंतिम निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। इसके बाद उन्हें PWD में सचिव की जिम्मेदारी मिली और अब वह प्रयागराज मंडल के मंडलायुक्त हैं।
डॉ. लोकेश एम. की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि इसकी शुरुआत मेडिकल शिक्षा से होती है और सफर उत्तर प्रदेश के बड़े प्रशासनिक पदों तक पहुंचता है। BDS की पढ़ाई → 2005 बैच IAS → शुरुआती जिला प्रशासन → कौशांबी के जिलाधिकारी → सहारनपुर मंडलायुक्त → नोएडा प्राधिकरण CEO → PWD सचिव → अब प्रयागराज मंडलायुक्त। उनकी उपलब्ध सेवा प्रोफाइल में जिला प्रशासन से लेकर मंडलायुक्त और नोएडा प्राधिकरण जैसी जिम्मेदारियों का उल्लेख मिलता है।
प्रयागराज में डॉ. लोकेश एम. के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ किसी एक सड़क, नाले या परियोजना को सुधारना नहीं है। असली चुनौती चार जिलों वाले पूरे मंडल में प्रशासनिक मशीनरी की जवाबदेही और विकास कार्यों की गति को बेहतर करना है। प्रयागराज शहर में जलभराव, ट्रैफिक, शहरी विस्तार, पेयजल और बुनियादी ढांचे से जुड़े सवाल हैं। वहीं मंडल के दूसरे जिलों में राजस्व, ग्रामीण विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की अपनी चुनौतियां हैं। ऐसे में आने वाला समय यह तय करेगा कि नोएडा में दिखाई देने वाली उनकी “फील्ड में उतरकर काम देखने और जिम्मेदारी तय करने” वाली शैली प्रयागराज मंडल में कितनी बड़ी प्रशासनिक मिसाल बन पाती है।
नोएडा में उन्होंने सड़कों और सफाई से लेकर नागरिक सुविधाओं तक पर फील्ड विजिट की। सहारनपुर में नशे के खिलाफ अभियान को बढ़ावा दिया। PWD में प्रदेश स्तरीय सार्वजनिक निर्माण व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली और अब प्रयागराज में चार जिलों वाले मंडल की कमान उनके हाथ में है। ऐसे में डॉ. लोकेश एम. के सामने अब सबसे बड़ी परीक्षा यही है कि क्या उनकी सख्त और फील्ड-आधारित प्रशासनिक शैली प्रयागराज को भी उसी तरह प्रभावित करेगी, जैसे नोएडा में उनकी पहचान बनी थी? फिलहाल उनके शुरुआती कदम संकेत दे रहे हैं कि प्रयागराज में भी फाइलों से ज्यादा जमीन पर काम की वास्तविक तस्वीर पर नजर रखने वाली प्रशासनिक शैली जारी रहने वाली है।
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