खास बात यह है कि शिकायत किसी संगठन या व्यक्ति ने नहीं, बल्कि कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने स्वयं वादी बनकर दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, प्रचार में इस्तेमाल शब्दों और शीर्षक पर बढ़ते आक्रोश को देखते हुए इसे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक शांति के लिए संभावित चुनौती माना गया।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद अब सोशल मीडिया से निकलकर सीधे थाने की FIR तक पहुंच गया है। हजरतगंज कोतवाली में इस सीरीज के शीर्षक और प्रचार सामग्री को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि शिकायत किसी संगठन या व्यक्ति ने नहीं, बल्कि कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने स्वयं वादी बनकर दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, प्रचार में इस्तेमाल शब्दों और शीर्षक पर बढ़ते आक्रोश को देखते हुए इसे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक शांति के लिए संभावित चुनौती माना गया। एफआईआर के बाद विवाद और तेज होने के संकेत हैं, क्योंकि पुलिस की दृष्टि में यह मुद्दा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि धार्मिक-जातिगत संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था से सीधे जुड़ा है इसी वजह से हजरतगंज जैसे हाई-सिक्योरिटी इलाके में इसे गंभीरता से लिया गया।
हजरतगंज कोतवाली में तैनात करीब 46 वर्षीय इंस्पेक्टर विक्रम सिंह इससे पहले लखनऊ के कृष्णानगर थाना क्षेत्र में अपनी तैनाती के दौरान भी चर्चा में रहे हैं। उनका 10 अक्टूबर 2022 को लखनऊ में ट्रांसफर हुआ था और वे मैनपुरी से यहां आए थे, जहां वे साइबर सेल के प्रभारी इंस्पेक्टर के रूप में भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा, वे वाराणसी और झांसी क्राइम ब्रांच में सेवा दे चुके हैं और पहले अयोध्या में एसओ के पद पर भी तैनात रहे। पुलिस विभाग में उनका अनुभव कई जिलों में काम करने का रहा है। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह 2001 बैच के सब-इंस्पेक्टर हैं। परिवार में मां, पत्नी और दो बेटे हैं। उनकी ट्रेनिंग मुरादाबाद में हुई थी। पुलिसिंग के साथ-साथ वे अपने मानवीय और सामाजिक पहलुओं के लिए भी जाने जाते रहे हैं।
कृष्णानगर में तैनाती के दौरान जुलाई 2023 में एक 80 वर्षीय वृद्धा के निधन के बाद, उनके बेटे के शहर से बाहर चले जाने पर इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने थाना टीम के साथ मिलकर अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया था। वह दृश्य जब इंस्पेक्टर खुद अर्थी को कंधा देते नजर आए लखनऊ में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा। हजरतगंज में उन्होंने बच्चों के मन से पुलिस का डर कम करने के लिए भी विशेष पहल की। बच्चों को कोतवाली बुलाकर उन्हें इंस्पेक्टर की कुर्सी पर बैठाया, मिठाई-टॉफी बांटी और सितंबर 2024 में इस कदम की सार्वजनिक रूप से सराहना हुई थी। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को उनके काम के लिए दिसंबर 2025 में तत्कालीन डीजीपी राजीव कृष्ण द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किए जाने की बात सामने आई है। हजरतगंज जैसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी जोन में उनकी कार्यशैली को देखते हुए यह सम्मान दिया गया था।
लखनऊ पुलिस ने घूसखोर पंडत वेब सीरीज के निर्देशक और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता व आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की नींव रख दी है। एफआईआर में आरोप है कि कंटेंट/शीर्षक के जरिए जाति-धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने (धारा 196), धार्मिक व जातिगत भावनाओं को जानबूझकर आहत करने (धारा 299) और अपमानजनक कृत्यों के जरिए सार्वजनिक शांति भंग करने की कोशिश (धारा 352/353) की गई। वहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार और दुरुपयोग को लेकर आईटी एक्ट की धारा 66 भी जोड़ी गई है।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की शिकायत के मुताबिक, फिल्म/सीरीज का शीर्षक एक विशिष्ट समुदाय को अपमानित करने के उद्देश्य से रखा गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ऐसे शीर्षक और प्रचार सामग्री जातिगत विद्वेष बढ़ा सकते हैं, समाज के एक बड़े वर्ग की छवि धूमिल कर सकते हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी सामग्री परोसना अनुचित है, जो आस्था और सामाजिक पहचान पर चोट करे। UP News