डॉ. ईरज राजा कौन हैं? जानें बलिया के नए SP की बायोग्राफी, MBBS की पढ़ाई, मेडिकल ऑफिसर से IPS बनने का सफर, UPSC के प्रयास और एनकाउंटर से जुड़ी चर्चा।

उत्तर प्रदेश में 7 अक्टूबर को हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में 20 IPS अधिकारियों के तबादले किए गए। इसी बदलाव के तहत 2017 बैच के IPS अधिकारी डॉ. ईरज राजा को गाजीपुर से हटाकर बलिया का नया पुलिस अधीक्षक (SP) बनाया गया। 10 अक्टूबर 2026 को उन्होंने बलिया पुलिस लाइन पहुंचकर जिले की कमान संभाल ली। एनकाउंटर को लेकर चर्चा में रहे ईरज राजा की कहानी भी काफी दिलचस्प है। एक ऐसा युवा, जिसके पिता उसे MBBS डॉक्टर बनाना चाहते थे, उसने मेडिकल की पढ़ाई पूरी की, सरकारी अस्पताल में मरीजों का इलाज किया और फिर अपने बचपन के सपने को पूरा करने के लिए UPSC की तैयारी में जुट गया। दिन में डॉक्टर की ड्यूटी और रात में पढ़ाई करते हुए उन्होंने IPS बनने का मुकाम हासिल किया। लेकिन डॉक्टर से पुलिस अधिकारी बनने तक का यह सफर आखिर कैसे तय हुआ? चौथे प्रयास में UPSC पास करने वाले ईरज राजा के करियर में ऐसे कौन-से मोड़ आए, जिन्होंने उन्हें एनकाउंटर को लेकर चर्चा में रहने वाले पुलिस अधिकारियों में शामिल किया? आइए, जानते हैं बलिया के नए SP की पूरी कहानी।
डॉ. ईरज राजा 2017 बैच के भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS अधिकारी हैं। उनका सफर मेडिकल की पढ़ाई से शुरू हुआ, लेकिन बचपन से पुलिस अधिकारी बनने का सपना उन्हें एक अलग दिशा में ले गया। उन्होंने MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी सेवा में मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी। बाद में उन्होंने UPSC परीक्षा पास की और IPS अधिकारी बने। पुलिस सेवा में आने के बाद उनकी तैनाती उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुई। वह लखनऊ, मेरठ, फिरोजाबाद और गाजियाबाद में भी तैनात रहे। इसके बाद उन्होंने जालौन और गाजीपुर में पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। अब उन्हें बलिया जिले का नया पुलिस कप्तान बनाया गया है।
डॉ. ईरज राजा का जन्म 5 दिसंबर 1986 को उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के तिलकपुर गांव में हुआ था। यह गांव जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उनके पिता डॉ. अशोक कुमार पेशे से MBBS डॉक्टर थे। वह आगरा में काम कर चुके थे और बाद में अलीगढ़ जिला अस्पताल में वरिष्ठ परामर्शदाता बने। उनकी मां का नाम सुधा वर्मा है। डॉक्टर पिता के घर जन्म लेने के कारण ईरज के सामने बचपन से ही पढ़ाई और सेवा का माहौल था। पिता चाहते थे कि उनका बेटा भी उनकी तरह डॉक्टर बने। परिवार की इच्छा थी कि ईरज मेडिकल की पढ़ाई करें और आगे चलकर लोगों का इलाज करके समाज की सेवा करें। ईरज ने भी शुरुआत में इसी दिशा में कदम बढ़ाए, लेकिन उनके मन में एक और सपना पल रहा था। वह भारतीय पुलिस सेवा में जाकर देश और समाज के लिए काम करना चाहते थे।
ईरज राजा की शुरुआती पढ़ाई आगरा में हुई। उनकी नर्सरी की पढ़ाई वहीं पूरी हुई थी। बाद में पिता के अलीगढ़ आने के बाद उनकी पढ़ाई भी वहीं आगे बढ़ी। उन्होंने अलीगढ़ पब्लिक स्कूल में शिक्षा हासिल की। बचपन के दिनों को याद करते हुए ईरज बताते हैं कि कई बार उनके पिता उन्हें स्कूल छोड़ने के बाद अपनी ड्यूटी पर चले जाते थे। बाद में वह खुद साइकिल से स्कूल आने-जाने लगे। पढ़ाई के दौरान ही उनमें आत्मनिर्भर बनने की आदत विकसित होने लगी थी। उन्होंने साल 2002 में सीबीएसई बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा पास की। इसके बाद 2004 में अलीगढ़ से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। दोनों परीक्षाओं में उनके अच्छे अंक आए। पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के बाद परिवार ने उन्हें मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
ईरज राजा के पिता चाहते थे कि उनका बेटा भी MBBS डॉक्टर बने। इसी वजह से उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की तैयारी शुरू की। साल 2005 में उनका चयन मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए हुआ। यहां से उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और साल 2011 में MBBS की डिग्री हासिल की। मेडिकल की पढ़ाई पूरी होने के बाद ईरज का चयन मेडिकल ऑफिसर के पद पर हुआ। उनकी पहली तैनाती उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुई। इस तरह उन्होंने डॉक्टर के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। उनके पास एक सुरक्षित सरकारी नौकरी थी और मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता भी खुला था। लेकिन बचपन से IPS अधिकारी बनने का सपना उनके मन में बना हुआ था।
डॉ. ईरज राजा की पहली तैनाती बिजनौर जिले के नहटौर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुई। यह ग्रामीण इलाका था, जहां लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी थी। उन्होंने अस्पताल में मरीजों की देखभाल की और ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर भी लोगों का इलाज किया। ईरज के पिता ने उन्हें सलाह दी थी कि सरकारी नौकरी में मिली जिम्मेदारी को पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाना चाहिए। उन्होंने इस सलाह को गंभीरता से लिया। वह सुबह समय से पहले स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते और स्टाफ के साथ मरीजों की देखभाल में जुट जाते थे। हालांकि, डॉक्टर की नौकरी करने के बावजूद उनके मन में IPS बनने की इच्छा लगातार बनी रही। वह नौकरी छोड़कर परीक्षा की तैयारी करने की स्थिति में नहीं थे। इसलिए उन्होंने काम और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने का फैसला किया। दिन में मरीजों का इलाज करते और रात में UPSC की तैयारी में जुट जाते थे।
ईरज राजा के जीवन का यह दौर उनके संघर्ष की सबसे अहम कड़ियों में से एक रहा। एक ओर सरकारी अस्पताल में मरीजों की जिम्मेदारी थी, तो दूसरी ओर सिविल सेवा परीक्षा पास करने का सपना। उन्होंने दोनों को साथ लेकर चलने का रास्ता चुना। वह रोजाना रात में करीब छह घंटे UPSC की पढ़ाई करते थे। छुट्टी वाले दिन वह अतिरिक्त समय निकालकर पूरे सप्ताह की तैयारी को आगे बढ़ाते थे। नौकरी के साथ परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। करीब पौने पांच साल तक मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम करने के दौरान उन्होंने लगातार UPSC की तैयारी जारी रखी। उनका यह सफर बताता है कि उन्होंने IPS बनने के लिए अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों को छोड़े बिना मेहनत का रास्ता चुना।
डॉ. ईरज राजा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान कई बार प्रयास किया। उनके मुताबिक, वह चारों बार इंटरव्यू तक पहुंचे। यह अपने आप में उनकी लगातार मेहनत और परीक्षा के विभिन्न चरणों तक पहुंचने का संकेत था। साल 2017 में उन्होंने UPSC परीक्षा पास की। इसी साल उनका चयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा में भी हुआ था। उन्होंने लखनऊ और वडोदरा में भी काम किया। बाद में वह भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS में पहुंचे और पुलिस अधिकारी के रूप में अपना करियर शुरू किया। जब परिवार और दोस्तों को उनके IPS बनने की जानकारी मिली, तो घर में खुशी का माहौल था। जिस पिता ने बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था, उसी बेटे ने अब वर्दी पहनकर देश और समाज की सेवा करने का रास्ता चुना था।
IPS बनने के बाद डॉ. ईरज राजा को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैनाती मिली। उनकी शुरुआती पोस्टिंग लखनऊ में हुई। इसके बाद वह मेरठ, फिरोजाबाद और गाजियाबाद में भी तैनात रहे। इन अलग-अलग तैनातियों के दौरान उन्हें पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर काम करने का अवसर मिला। बाद में उन्होंने जालौन जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वह गाजीपुर के SP बनाए गए। गाजीपुर में उनके कार्यकाल के दौरान पुलिस की कार्रवाई और अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों को लेकर वह चर्चा में रहे। गाजीपुर में उन्होंने विशेष कार्यबल यानी STF के साथ मिलकर उस बदमाश के खिलाफ कार्रवाई में भूमिका निभाई, जिस पर रेलवे सुरक्षा बल के दो जवानों की हत्या का आरोप था। इस मामले में बदमाश को मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इस घटना ने भी ईरज राजा को चर्चा में ला दिया।
डॉ. ईरज राजा का नाम उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में चर्चा में रहा है। उनके पुलिस करियर से जुड़ी खबरों में एनकाउंटर का विशेष उल्लेख मिलता है। उनके बारे में 153 एनकाउंटर का आंकड़ा भी बताया जाता है। पुलिस मुठभेड़ों से जुड़ी खबरों के अलावा उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में भी सामने आई है, जिन्होंने मेडिकल क्षेत्र से पुलिस सेवा तक का लंबा सफर तय किया। डॉक्टर के रूप में लोगों का इलाज करने से लेकर पुलिस अधिकारी के रूप में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने तक उनका करियर कई अलग-अलग पड़ावों से गुजरा है।
डॉ. ईरज राजा को पुलिस सेवा के दौरान पुलिस महानिदेशक यानी DGP की ओर से सिल्वर मेडल और गोल्ड मेडल से सम्मानित किए जाने की जानकारी भी दी गई है। ये सम्मान उनके पुलिस करियर की उपलब्धियों में शामिल हैं। मेडिकल की पढ़ाई, सरकारी अस्पताल में नौकरी, UPSC की तैयारी और फिर IPS अधिकारी के रूप में अलग-अलग जिलों में तैनाती तक उनका सफर लगातार मेहनत और करियर में बदलाव की कहानी है। उनके जीवन की यही यात्रा उन्हें एक सामान्य मेडिकल ऑफिसर से पुलिस अधीक्षक के पद तक लेकर आई।
उत्तर प्रदेश में 7 अक्टूबर 2026 को हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद डॉ. ईरज राजा को गाजीपुर से हटाकर बलिया का पुलिस अधीक्षक बनाया गया। उन्होंने 10 अक्टूबर को बलिया पुलिस लाइन पहुंचकर अपना कार्यभार संभाल लिया। इसके साथ ही उनके सामने जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी आ गई है। गाजीपुर और जालौन में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम करने का अनुभव अब बलिया में उनके लिए उपयोगी होगा। जिले में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और पुलिस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से चलाना उनकी जिम्मेदारियों का अहम हिस्सा होगा। डॉ. ईरज राजा की कहानी सिर्फ एक पुलिस अधिकारी के तबादले तक सीमित नहीं है। यह उस व्यक्ति की यात्रा भी है, जिसने डॉक्टर बनने की पढ़ाई की, सरकारी अस्पताल में मरीजों का इलाज किया और फिर अपने बचपन के सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की। अब बलिया में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उनके करियर का एक और अध्याय शुरू हो गया है।
विज्ञापन