यह एक वैश्विक सामाजिक और बौद्धिक आंदोलन है, जिसमें ऐसे लोग शामिल हैं जो इस्लाम छोड़ चुके हैं और सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान 'पूर्व-मुसलमान' (Ex-Muslim) के रूप में घोषित करते हैं। यह आंदोलन मुख्य रूप से धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्मत्याग के अधिकार की वकालत करता है।

UP News : उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज में बहुत बड़ा बदलाव हो रहा है। खबर है कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भूतपूर्व मुसलमान अथवा एक्स मुस्लिम का चलन बहुत तेजी के साथ फैल रहा है। उत्तर प्रदेश के बापगत, शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, प्रतापगढ़, बरेली तथा बलिया सहित अनेक जिलों से एक्स मुस्लिम बनने के मामले सामने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के शामली जिले में मौजूद एक एक्स मुस्लिम तो बाकायदा सोशल मीडिया पर एक्स मुस्लिम समाज बनाने का अभियान चला रहा है।
उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे एक्स मुस्लिम प्रचलन की बात करने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर यह एक्स मुस्लिम क्या होता है? आपको बता दें कि दुनिया भर में इस्लाम को मानने वाले नागरिक बड़ी संख्या में अपना धर्म छोड़ रहे हैं। धर्म छोडऩे वाले लोग अपने आप को एक्स मुस्लिम बोलते हैं। धीरे-धीरे एक्स मुस्लिम बनना एक आंदोलन की तरह से फैल रहा है। यह आंदोलन भारत में सबसे ज्यादा केरल प्रदेश में देखने को मिलता है। यह एक वैश्विक सामाजिक और बौद्धिक आंदोलन है, जिसमें ऐसे लोग शामिल हैं जो इस्लाम छोड़ चुके हैं और सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान 'पूर्व-मुसलमान' (Ex-Muslim) के रूप में घोषित करते हैं। यह आंदोलन मुख्य रूप से धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्मत्याग के अधिकार की वकालत करता है।
एक्स मुस्लिम (Ex-Muslim) आंदोलन वर्ष- 2000 के दशक में संगठित रूप में उभरकर सामने आया। हालांकि इस्लाम छोडऩे वाले लोग पहले भी मौजूद थे। 2007 में 'काउंसिल ऑफ एक्स-मुस्लिम्स ऑफ ब्रिटेन' की स्थापना मरयम नमाजी ने की, जिसने इस आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। अन्य देशों में भी ऐसे संगठनों का गठन हुआ, जैसे 'एक्स-मुस्लिम्स ऑफ नॉर्थ अमेरिका' और 'एक्स-मुस्लिम्स ऑफ जर्मनी' आदि। इस आंदोलन की विधिवत शुरुआत का श्रेय मरियम नमाजी को दिया जाता है। मरियम नमाजी का जन्म 1966 में ईरान में हुआ था। ईरानी क्रांति के बाद उनके परिवार ने देश छोड़ दिया था और ब्रिटेन आकर बस गया था। इसका कारण था कि मरियम नमाजी के पिता हुशांग और मां मैरी नमाजी सेक्यूलर मूल्यों में आस्था रखते थे और इस्लामिक क्रांति के बाद उन्हें ईरान का रास्ता ठीक नहीं लगा। फिलहाल वह ब्रिटेन में रह रही हैं और यहां उनका लंबा समय गुजरा है। वह ऐक्टिविस्ट हैं और पत्रकारिता से भी जुड़ी रही हैं। कम्युनिस्ट विचारधारा से ताल्लुक रखने वालीं मरियम नमाजी को इस्लामिक मूल्यों के खिलाफ बोलने के लिए जाना जाता है। शरिया कानून के खिलाफ वह बोलती रही हैं। वह ईशनिंदा कानून के खिलाफ हैं और मजहब को त्यागने की वकालत करती हैं।
एक्स मुस्लिम आंदोलन शुरू करने वाली मरियम नमाजी भारत में भी कई साल रह चुकी हैं। इसके अलावा अमेरिका में भी उन्होंने यूनिवर्सिटी एजुकेशन ली है। वह सूडान, ईरान और तुर्की के शरणार्थियों के लिए भी काम करती रही हैं। खासतौर पर शरिया लॉ के वह खिलाफ रही हैं और इसे समानता के खिलाफ मानती हैं। हालांकि उनका विरोध भी इस्लामिक मुल्कों में खूब होता रहा है। उन्हें 2005 में ब्रिटिश संस्थान नेशनल सेक्युलर सोसायटी ने सेक्युलरिस्ट ऑफ द ईयर के खिताब से नवाजा था। इन दिनों मरियम नमाजी लंदन में रहती हैं। लंदन में रहकर मरियम नमाजी पूरी दुनिया में एक्स मुस्लिम आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं।
बात पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सलीम देवबंदी नामक मुस्लिम एक्स मुस्लिम आंदोलन का चेहरा बन गए हैं। सलीम देवबंदी का असली नाम सलीम अहमद है। सलीम ने अपना नाम बदलकर सलीम वास्तिक कर लिया है। सलीम का कहना है कि वास्तव में वह पूरी तरह से एक्स मुस्लिम की परिभाषा में फिट नहीं बैठते। उनका कहना है कि एक्स मुस्लिम बनने के लिए नाम तथा काम सब कुछ बदलना पड़ता है। मैं अपने समाज के बीच में रहकर ही इस्लाम को नहीं मानता हूं। इस कारण मैं काफिर की श्रेणी में आता हूं। सलीम देवबंदी का कहना है कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में एक्स मुस्लिम आंदोलन तेजी से फैल रहा है। UP News