“आगे आगे देखिए होता है क्या…” मीर के शेर हर दौर में नए क्यों लगते हैं

अहमद शाह अब्दाली और नादिरशाह के हमलों के बाद उजड़ी हुई, खौफ़ और खामोशी से भरी दिल्ली को मीर ने अपनी आँखों से देखा और वही टूटन उनकी शायरी में शहर की नहीं, इंसान की कहानी बनकर उतर आई।

मीर तक़ी मीर के शेर

मीर तक़ी मीर के शेर

locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar27 Dec 2025 09:37 AM
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