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UP News: इन महिलाओं ने ‘‘सना स्वयं सहायता समूह” के साथ जुडक़र बड़ी मिसाल कायम कर दी है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में वर्ष-2008 में ‘‘सना स्वयं सहायता समूह” की स्थापना हुई थी।

UP News: उत्तर प्रदेश के एक जिले की ग्रामीण तथा बेरोजगार रह चुकी महिलाएं पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए बड़ा प्रेरणास्रोत बन गई है। उत्तर प्रदेश की एक खास पहल के तहत यें महिलाएं अपने तथा अपने परिवार के लिए लाखों रूपए महीना की कमाई कर रही हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश की यें महिलाएं उत्तर प्रदेश का नाम पूरे भारत में रोशन करने का काम कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह के द्वारा छोटे स्तर पर शुरू हुआ इन महिलाओं का काम दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की महिलाएं बनी मिसाल
यहां हम जिन महिलाओं की बात कर रहे हैं वें महिलाएं उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की हैं। इन महिलाओं ने ‘‘सना स्वयं सहायता समूह” के साथ जुडक़र बड़ी मिसाल कायम कर दी है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में वर्ष-2008 में ‘‘सना स्वयं सहायता समूह” की स्थापना हुई थी। इस समूह की स्थापना उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रहने वाले सलीम नामक युवक ने की थी। सलीम बताते हैं कि शुरुआत में यह काम बहुत छोटे स्तर पर था, लेकिन सरकार की ओर से मिली वित्तीय मदद और निशुल्क ट्रेनिंग ने महिलाओं के हौसलों को उड़ान दी. ट्रेनिंग के बाद महिलाएं बेडशीट की बुनाई और उस पर हाथ से कढ़ाई करने के काम में माहिर हो गईं। धीरे-धीरे इस समूह से महिलाएं जुड़ती गईं और आज 35 महिलाएं सीधे तौर पर इससे जुडक़र अच्छा पैसा कमा रही हैं।उत्तर प्रदेश की बेडशीट की देश भर में डिमांड
सलीम के मुताबिक, सना सहायता समूह द्वारा तैयार की गई बेडशीट की खासियत उनकी हाथ की बुनाई और खूबसूरत कढ़ाई है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाली प्रदर्शनियों में इन बेडशीट की खूब मांग रहती है। सरकार की ओर से महिलाओं को इन प्रदर्शनियों में फ्री स्टॉल लगाने की सुविधा दी जाती है, जिससे उन्हें अपना हुनर बड़े बाजार तक पहुंचाने का मौका मिलता है। ग्राहक इन चादरों की क्वालिटी और डिजाइन को काफी पसंद कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश का कोई भी नागरिक जुड़ सकता है इस काम से
उत्तर प्रदेश का कोई भी नागरिक इस काम से जुड़ सकता है। अगर कोई नया व्यक्ति अपना काम शुरू करना चाहता है, तो सलीम उनके लिए एक बेहतर बिजनेस मॉडल बताया हैं। उन्होंने बताया कि चादर बनाने का काम महज 50 हजार रुपये की छोटी सी लागत से शुरू किया जा सकता है। इसके लिए कच्चा माल दिल्ली से आसानी से मिल जाता है. शुरुआत में चादर बुनने के लिए एक मशीन लगाई जा सकती है, जबकि बाकी का सजावटी और कढ़ाई का काम हाथ से किया जाता है। यह एक ऐसा काम है जिसमें लागत कम और मुनाफे की संभावना काफी ज्यादा रहती है।
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