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महिला आरक्षण का मुद्दा निश्चित रूप से एक बड़ा मुद्दा है। महिला आरक्षण के मुद्दे को उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण के मुद्दे को बड़े राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठा दिया है।

UP News : महिला आरक्षण का मुद्दा निश्चित रूप से एक बड़ा मुद्दा है। महिला आरक्षण के मुद्दे को उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण के मुद्दे को बड़े राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठा दिया है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की विधानसभा का विशेष सत्र बुला लिया गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने से यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। UP News
महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति और तेज हो गई है। महिला आरक्षण का मुद्दा देश की राजधानी दिल्ली से निकलकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिला आरक्षण के मुद्दे को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने के काम में जुट गए हैं। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा के चुनाव के लिए इसे उत्तर प्रदेश सरकार की सोची-समझी रणनीति बताया जा रहा है। UP News
उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 30 अप्रैल को को बुलाया गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह विशेष सत्र केवल एक दिन यानी केवल 30 अप्रैल 2026 को ही चलेगा। इस विशेष सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से एक खास प्रस्ताव रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की योजनना है कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा के विशेष सत्र में एक निंदा प्रस्ताव पास कराया जाएगा। यह निंदा प्रस्ताव महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्षी दलों के विरूद्ध पास कराया जाएगा। आपको बता दें कि लोकसभा में संविधान संशोधन बिल के माध्यम से केन्द्र सरकार वर्ष-2029 में लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनाना चाहती थी। विपक्ष के विरोध के कारण केन्द्र सरकार का बिल लोकसभा में गिर गया। इस मुद्दे को लेकर भाजपा की तरफ से पूरे देश में विपक्ष के विरूद्ध एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र इसी विशेष अभियान का हिस्सा है। भाजपा की योजना यह है कि उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण के मुददे को घर - घर तक पहुंचाया जाए। UP News
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा का चुनाव होगा। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश के ज्यादातर राजनीतिक दलों नेन अपने -अपने मुददे तय कर लिए हैं। इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी को महिला आरक्षण का बड़ा मुददा मिल गया है। सबको पता है कि आधी आबादी (महिलाएं ) एक बहुत बड़ा वोट बैंक हैं। भाजपा की नजर आधी आबादी के इसी वोट बैंक पर टिक गई हैं। यही कारण है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण के मुददे को धार देकर विधानसभा के चुनाव में इस मुददे पर महिलाओं को अपने पक्ष में लाना चाहती है। भारतीय जनता पार्टी अपने इस अभियान में सफल हो गई तो निश्चित तौर पर यह मुददा भाजपा के लिए बड़ा कारगर मुददा साबित हो सकता है। UP News
महिला आरक्षण के मुददे पर समाजवादी पार्टी सपा (SP) भी हमलावर हो रही है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी महिला आरक्षण के मुददे को लगातार उठा रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा के लिए महिला आरक्षण का मुददा केवल एक नारा है। अखिलेश यादव का दावा है कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं भाजपा की पूरी चाल को समझती हैं। इस कारण उत्तर प्रदेश की महिलाएं भाजपा की किसी भी चाल के झांसे में आने वाली नहीं हैं। UP News
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