
उत्तर प्रदेश के इटावा के दानरपुर गांव में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां कथावाचक संत सिंह यादव और उनके सहयोगी मुकुटमणि शास्त्री को कथित रूप से सिर्फ इसलिए प्रताड़ित किया गया क्योंकि वे 'यादव' जाति से हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कथावाचकों के साथ मारपीट, बाल काटने, और महिला से पैर छुवाने जैसी अपमानजनक हरकतें सामने आई हैं। इस घटना के बाद चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पीड़ित संत सिंह यादव ने खुद अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह गांव के मंदिर के पाठक बाबा और उनके साथी पप्पू महाराज के आमंत्रण पर भागवत कथा कहने पहुंचे थे। उन्होंने बताया, "हम कानपुर के रहने वाले हैं और पहले स्कूल चलाते थे। बाद में धार्मिक प्रवचन का मार्ग चुना। कथा शुरू हुई, पहले दिन श्लोक भी बोला गया। लेकिन शाम को गांव वालों ने हमारी जाति पूछी।
पीड़ित कथावाचक संत सिंह यादव ने बताया कि वह कानपुर निवासी हैं और पहले एक स्कूल संचालित करते थे। आर्थिक तंगी के कारण विद्यालय बंद हो गया, जिसके बाद उन्होंने धार्मिक आयोजनों में भाग लेना शुरू किया। दानरपुर गांव में कथा वाचन के लिए उन्हें स्थानीय मंदिर के पाठक बाबा और पप्पू महाराज ने आमंत्रित किया था। कथा का शुभारंभ हुआ, पहला श्लोक भी हो चुका था, लेकिन उसी शाम गांव के कुछ लोगों ने उनका जातिगत विवरण पूछना शुरू कर दिया। संत सिंह ने आगे अपने बयान में बताया कि हमने बताया कि हम यादव हैं। उन्होंने आधार कार्ड मांगा, जो उस वक्त हमारे पास नहीं था। हमने कहा—नंबर ले लीजिए, घर से पुष्टि कर सकते हैं ।
पीड़ित संत सिंह यादव ने बताया कि जैसे ही गांववालों ने उनके बेटे के नाम में 'यादव' सुना, माहौल एकदम से बदल गया। उन्होंने कथित तौर पर कहा—"यह गांव ब्राह्मणों का है, जहां तीन सौ देवी-देवताओं की पूजा होती है। तुम यादव होकर यहां कथा सुनाने आए हो?" इसके बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया। संत सिंह और उनके सहयोगी मुकुटमणि के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि रातभर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। बाल काटे गए और एक महिला द्वारा कथित तौर पर उनके ऊपर मूत्र फेंका गया। संत का आरोप है कि इसके बाद गांववालों ने ताना मारते हुए कहा—'अब तुम पर ब्राह्मण का मूत्र गिर गया, अब तुम पवित्र हो गए हो।
मुख्य कथावाचक मुकुटमणि शास्त्री ने बताया, “गांव के लोगों ने हमें बंधक बना लिया, मोबाइल छीन लिया, 25 हजार रुपये नकद, एक सोने की चेन और चार अंगूठियां ले लीं। मारपीट के बाद हमारी सहायक आचार्य की चोटी काटी गई, फिर मेरी। ‘जय बजरंगबली’ के नारे लगाते हुए हमें गांव से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि शुरू में किसी ने उनकी जाति नहीं पूछी, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि वह यादव हैं, तो उन्हें कथावाचन से रोक दिया गया।
घटना के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कथित अमानवीयता कैद है। इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पीड़ितों की तहरीर के आधार पर थाना बकेवर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच अभी जारी है।
घटना की गूंज राजनीतिक गलियारों में भी सुनाई दी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा किधर्म के नाम पर जातिवादी अत्याचार का यह चेहरा शर्मनाक और अस्वीकार्य है। दोषियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। UP News