मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रचार अभियान को और आक्रामक बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बाद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी असम के चुनावी रण में उतारा गया है।

UP News : असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ रहा है। मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रचार अभियान को और आक्रामक बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बाद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी असम के चुनावी रण में उतारा गया है। भाजपा की कोशिश साफ है अंतिम चरण के प्रचार में बड़े चेहरों के दम पर माहौल को अपने पक्ष में मोड़ा जाए और मतदाताओं तक विकास, सुरक्षा और मजबूत शासन का संदेश तेजी से पहुंचाया जाए। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा ने 2 से 5 अप्रैल के बीच असम में अपने कई प्रमुख नेताओं की सभाएं तय की हैं, और पश्चिम बंगाल में भी योगी आदित्यनाथ के कई चुनावी कार्यक्रम प्रस्तावित बताए गए हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को असम में भाजपा के पक्ष में चुनावी सभाओं को संबोधित करने जा रहे हैं। पार्टी ने उन्हें उन इलाकों में उतारा है जिन्हें राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है। भाजपा की नजर सिर्फ भीड़ जुटाने पर नहीं, बल्कि उन सीटों पर संगठनात्मक ऊर्जा बढ़ाने पर भी है जहां चुनावी लड़ाई तेज है। योगी की छवि भाजपा के भीतर ऐसे प्रचारक की रही है जो कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और समर्थकों को एकजुट करने में असरदार माने जाते हैं। यह राजनीतिक महत्व इसलिए भी रखता है क्योंकि भाजपा ने असम में अपने प्रचार के लिए मोदी, शाह, नड्डा और योगी जैसे बड़े चेहरों को एक साथ मैदान में उतारा है।
इस पूरे अभियान में उत्तर प्रदेश का संदर्भ सिर्फ योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी भर नहीं है। भाजपा उन्हें अक्सर कानून-व्यवस्था, सख्त प्रशासन और तेज फैसलों वाले चेहरे के रूप में पेश करती है। असम जैसे राज्य में, जहां सुरक्षा, पहचान, सीमाई सतर्कता और घुसपैठ जैसे मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं, वहां योगी की सभाएं भाजपा के बड़े नैरेटिव को और धार देती दिखती हैं। हाल के दिनों में अमित शाह ने भी असम में घुसपैठ और सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है, जिससे साफ है कि भाजपा चुनाव को केवल स्थानीय वादों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीतिक संदेश से भी जोड़ रही है।
असम में मतदान की तारीख करीब आने के साथ भाजपा ने प्रचार की रफ्तार बढ़ा दी है। पार्टी का लक्ष्य अंतिम दिनों में मतदाताओं तक सीधे पहुंच बनाना, स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना और चुनावी चर्चा का केंद्र अपने मुद्दों को बनाए रखना है। भाजपा के घोषणापत्र में रोजगार, विकास, बुनियादी ढांचा, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है, जबकि प्रचार मंचों से सुरक्षा और मजबूत प्रशासन का संदेश भी साथ-साथ दिया जा रहा है। यही वजह है कि स्टार प्रचारकों की सभाओं को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आखिरी दौर की निर्णायक राजनीतिक कवायद माना जा रहा है।
भाजपा जिन इलाकों में अपने बड़े नेताओं को भेज रही है, वहां चुनावी मुकाबले को गंभीर माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि बड़े चेहरे न सिर्फ प्रचार को दृश्यता देते हैं, बल्कि स्थानीय इकाइयों को भी अतिरिक्त संबल प्रदान करते हैं। योगी आदित्यनाथ की सभाओं को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इन कार्यक्रमों के जरिए भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि असम का चुनाव उसके लिए बेहद अहम है और वह एक-एक सीट पर पूरी ताकत के साथ लड़ रही है।
योगी आदित्यनाथ की व्यस्तता केवल असम तक सीमित नहीं दिख रही। पश्चिम बंगाल में भी उनके कई चुनावी कार्यक्रम प्रस्तावित बताए गए हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि भाजपा 2026 के चुनावी परिदृश्य में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में अपने आक्रामक प्रचार अभियान का अहम चेहरा बना रही है। बंगाल में अमित शाह के रोडशो और बड़े सीट लक्ष्य के ऐलान के बीच योगी की संभावित सक्रियता भाजपा की व्यापक रणनीति को और स्पष्ट करती है।
असम में योगी आदित्यनाथ का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भाजपा चुनावी राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद कुछ चुनिंदा चेहरों पर सबसे ज्यादा दांव लगाती है। योगी उन्हीं नेताओं में शामिल हैं जिनकी सभाएं संगठन के लिए मनोबल बढ़ाने का माध्यम बनती हैं। उत्तर प्रदेश में उनकी राजनीतिक शैली तेज संदेश, स्पष्ट आक्रामकता और समर्थकों से सीधा जुड़ाव को भाजपा दूसरे राज्यों में भी प्रभावी मानती है। असम में उनका दौरा इसी विश्वास का विस्तार है। यह केवल एक चुनावी सभा नहीं, बल्कि भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें यूपी की राजनीतिक ऊर्जा को दूसरे राज्यों के चुनावी मैदान तक पहुंचाया जा रहा है। UP News